Rail Coach Modification: डिपो में बड़ा फैसला
वाराणसी: भारतीय रेल द्वारा यात्री संरक्षा को अभेद्य बनाने के उद्देश्य से रेल कोच मॉडिफिकेशन (Rail Coach Modification) के तकनीकी कार्यों की गहन समीक्षा की गई है। मंडल रेल प्रबंधक (डीआरएम) वाराणसी, श्री आशीष जैन ने 15 सितम्बर 2026 को वरिष्ठ मंडल यांत्रिक इंजीनियर (सीएंडडब्ल्यू) श्री अभिषेक राय के साथ कोचिंग डिपो बनारस का व्यापक निरीक्षण किया।

निरीक्षण के दौरान रेलवे बोर्ड एवं अनुसंधान अभिकल्प एवं मानक संगठन (आरडीएसओ) द्वारा जारी सुरक्षा मानकों का शत-प्रतिशत अनुपालन सुनिश्चित करने के कड़े निर्देश दिए गए। इस उच्चस्तरीय दौरे का मुख्य केंद्र बिंदु ट्रेनों के कोचों में चल रहे आधुनिकीकरण और सुरक्षात्मक बदलावों की जमीनी पड़ताल करना रहा।
सेंटर बफर कप्लर और संरक्षा: रेल कोच मॉडिफिकेशन (Rail Coach Modification)
निरीक्षण के दौरान कोचिंग डिपो अधिकारी श्री हरिशंकर कुमार गुप्ता ने पावर पॉइंट प्रेजेंटेशन के माध्यम से डिपो में प्रगतिरत कार्यों का विवरण प्रस्तुत किया। इसके उपरांत डीआरएम ने ट्रैक पर उतरकर सेंटर बफर कप्लर (सीबीसी) की कार्यप्रणाली का बारीकी से मुआयना किया।
तकनीकी दृष्टि से रेल कोच मॉडिफिकेशन (Rail Coach Modification) के तहत सीबीसी (CBC) का अपग्रेडेशन अत्यंत महत्वपूर्ण है। यह प्रणाली दुर्घटना की स्थिति में डिब्बों को एक-दूसरे के ऊपर चढ़ने (टेलीस्कोपिंग) से रोकती है। इसके साथ ही लोकोमोटिव (इंजन) और पावर कार में लगाए गए वर्टिकल रेस्ट्रिक्टर का भी परीक्षण किया गया, जो तेज गति के दौरान झटकों को नियंत्रित कर डिब्बों का संतुलन बनाए रखते हैं।
दो बोगियों के बीच यात्रियों के सुरक्षित आवागमन के लिए लगाई जाने वाली वेस्टीब्यूल फॉल प्लेट के संयोजन में किए गए बदलावों को भी परखा गया, जिससे चलती ट्रेन में कोच बदलते समय किसी यात्री के फिसलने या गिरने की आशंका पूरी तरह समाप्त हो सके।
आपातकालीन खिड़की और एल्यूमिनियम बार: रेल कोच मॉडिफिकेशन (Rail Coach Modification)
रेल यात्रियों की सुरक्षा और आपातकालीन निकास को अधिक सुगम बनाने के लिए बोगियों में खिड़कियों का कायाकल्प किया जा रहा है। डीआरएम ने कोचों की खिड़कियों में लगी पुरानी एल्यूमिनियम बार/रॉड को हटाने और नए सुरक्षा मानकों के अनुरूप तैयार की गई इमरजेंसी विंडो (Emergency Window) के रिप्लेसमेंट कार्य की प्रगति जाँची।
इस विशेष रेल कोच मॉडिफिकेशन (Rail Coach Modification) अभियान का उद्देश्य किसी अप्रिय घटना के समय यात्रियों को बिना किसी रुकावट के तुरंत सुरक्षित बाहर निकलने का मार्ग प्रदान करना है। इसके साथ ही मजबूत और आधुनिक रॉड्स लगाने से बाहरी तत्वों द्वारा खिड़की के रास्ते सामान चोरी की घटनाओं पर भी अंकुश लगेगा। डीआरएम ने निर्देश दिया कि यह कार्य सर्वोच्च प्राथमिकता के आधार पर निर्धारित समय-सीमा के भीतर पूर्ण किया जाए।
आरडीएसओ और रेल कोच मॉडिफिकेशन (Rail Coach Modification) क्या है? (People Also Search For)
आम पाठक और रेल यात्री अक्सर यह खोजते हैं कि ट्रेनों में कोच मॉडिफिकेशन क्यों किया जाता है और आरडीएसओ (RDSO) की इसमें क्या भूमिका होती है।
रेलवे विशेषज्ञों के अनुसार, अनुसंधान अभिकल्प एवं मानक संगठन (RDSO) समय-समय पर कोच अल्टरेशन इंस्ट्रक्शन (CAI) जारी करता है। इसका उद्देश्य पुरानी तकनीक को हटाकर नए संरक्षा उपकरणों को जोड़ना होता है। रेल कोच मॉडिफिकेशन (Rail Coach Modification) के अंतर्गत ब्रेकिंग सिस्टम, कप्लर लॉक, अग्निरोधक वायरिंग और आपातकालीन निकास द्वारों को लगातार अपग्रेड किया जाता है ताकि मानवीय भूल या तकनीकी खामी के कारण होने वाले हादसों को न्यूनतम किया जा सके।
मेकेनाइज्ड लॉन्ड्री और रेल कोच मॉडिफिकेशन (Rail Coach Modification) से सुविधा (People Also Search For)
यात्री अक्सर ट्रेनों में मिलने वाले कंबल, चादर और तकिए (बेडरोल) की स्वच्छता को लेकर सवाल करते हैं। इस निरीक्षण के दौरान बनारस डिपो में स्थित मेकेनाइज्ड लॉन्ड्री की क्षमता वृद्धि की भी समीक्षा की गई।
डिपो परिसर में लॉन्ड्री की नई बिल्डिंग के निर्माण और रेनोवेशन कार्य का निरीक्षण करते हुए डीआरएम ने निर्देश दिए कि आधुनिक ऑटोमैटिक मशीनों के जरिए लिनन की धुलाई और कीटाणुशोधन (Sanitization) उच्च गुणवत्ता के साथ किया जाए। इससे ट्रेनों में यात्रा करने वाले यात्रियों को पूरी तरह स्वच्छ, बैक्टीरिया-मुक्त और सुगंधित बेडरोल उपलब्ध कराया जा सकेगा।
मंडल रेल प्रबंधक श्री आशीष जैन ने स्पष्ट किया कि कोचिंग डिपो में किए जा रहे सभी तकनीकी कार्यों में गुणवत्ता, संरक्षा और समयबद्धता को शीर्ष प्राथमिकता दी जानी चाहिए। उन्होंने अधिकारियों को चेतावनी दी कि संरक्षा मानकों में किसी भी प्रकार की शिथिलता स्वीकार नहीं की जाएगी।
निरीक्षण के दौरान वरिष्ठ मंडल यांत्रिक इंजीनियर श्री अभिषेक राय, कोचिंग डिपो अधिकारी श्री हरिशंकर कुमार गुप्ता सहित कैरिज एंड वैगन विभाग के वरिष्ठ तकनीकी पर्यवेक्षक उपस्थित रहे।

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Navneet Mishra is a seasoned journalist currently associated with Nirbhik India and its digital portal, nirbhikindia.in. With over six years of experience across print and digital platforms, Navneet specializes in politics, sports, economics, and geopolitics.
A Master’s graduate in Mass Communication from Deen Dayal Upadhyay Gorakhpur University, he is also a dedicated media scholar. His academic research focuses on “the pivotal role of Gorakhpur’s Hindi newspapers during the Indian freedom struggle against the British Crown”. Before joining Nirbhik India, Navneet spent five years at Adarsh Jeevan and gained valuable field experience at Amar Ujala Gorakhpur as training reporter only for 5 days.
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नवनीत मिश्रा वर्तमान में ‘निर्भीक इंडिया’ मीडिया समूह से जुड़े हैं। उन्होंने दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन में मास्टर्स किया है। पत्रकारिता के अपने 6 वर्षों के सफर में उन्होंने प्रिंट और डिजिटल दोनों डेस्क पर काम किया है। उनके शोध का विषय ब्रिटिश शासन के खिलाफ गोरखपुर के अखबारों का योगदान रहा है, जो उनकी ऐतिहासिक समझ को दर्शाता है। वे राजनीति, अर्थव्यवस्था और अंतरराष्ट्रीय मामलों (Geopolitics) पर निरंतर लिखते रहे हैं। ‘आदर्श जीवन’ दैनिक में 5 साल का कार्यकाल और ‘अमर उजाला’ गोरखपुर में ट्रेनिंग रिपोर्टिंग के तौर पर मात्र 5 दिन काम क्या है उनकी लेखनी को और भी निखारता है।

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