बलरामपुरउत्तर प्रदेश

Engineers Day Celebration: वीसी का बड़ा संदेश

बलरामपुर: मां पाटेश्वरी राज्य विश्वविद्यालय के स्कूल ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी की ओर से भारत रत्न डॉ. मोक्षगुंडम विश्वेश्वरैया की जयंती के पावन अवसर पर इंजीनियरिंग दिवस (Engineers Day Celebration) का भव्य एवं गरिमामय आयोजन किया गया।

सोशल और माइंडसेट इंजीनियरिंग: इंजीनियरिंग दिवस (Engineers Day Celebration)
Engineers Day Celebration वीसी का बड़ा संदेश

इस राज्य स्तरीय महत्व के शैक्षणिक कार्यक्रम का शुभारंभ विश्वविद्यालय परिसर में छात्र-छात्राओं और प्राध्यापकों द्वारा व्यापक पौधरोपण कर किया गया। विद्यार्थियों ने परिसर में पौधे लगाकर पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ अपनी सामाजिक जिम्मेदारी का स्पष्ट संदेश दिया।

कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में लोक निर्माण विभाग (भवन खंड), बलरामपुर के अधिशासी अभियंता अर्पित निगम उपस्थित रहे, जबकि अध्यक्षता विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. रवि शंकर सिंह ने की।

सोशल और माइंडसेट इंजीनियरिंग: इंजीनियरिंग दिवस (Engineers Day Celebration)

विश्वविद्यालय के प्रशासनिक एवं शैक्षणिक संकाय की उपस्थिति में अध्यक्षीय संबोधन देते हुए कुलपति प्रो. रवि शंकर सिंह ने वर्तमान युग में तकनीकी शिक्षा की बदलती परिभाषा पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि आज के आधुनिक दौर में इंजीनियरिंग का दायरा केवल मशीनों, कल-पुर्जों और कोडिंग तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि इसका नया और सबसे प्रभावशाली स्वरूप ‘सोशल इंजीनियरिंग’ के रूप में उभर रहा है।

प्रो. सिंह ने कहा कि इंजीनियरों को तकनीकी विशेषज्ञता के साथ-साथ समाज की बुनियादी आवश्यकताओं और धरातलीय समस्याओं को गहराई से समझने की मानवीय दृष्टि विकसित करनी होगी।

कुलपति ने छात्र-छात्राओं को प्रेरित करते हुए स्पष्ट किया कि 21वीं सदी विशुद्ध रूप से उन्नत तकनीक की सदी है, लेकिन तकनीक तभी सार्थक सिद्ध हो सकती है जब नॉलेज (ज्ञान) और विजडम (विवेक) का उचित समन्वय हो।

इंजीनियरिंग दिवस (Engineers Day Celebration) के अवसर पर उन्होंने कहा कि वर्तमान में इंजीनियरिंग वास्तव में ‘माइंडसेट की इंजीनियरिंग’ बन चुकी है। यदि तकनीक आम नागरिकों के जीवन को अधिक सुगम, सुरक्षित, पारदर्शी और समावेशी बनाने में योगदान नहीं दे पाती, तो उसका वास्तविक उद्देश्य अधूरा रह जाता है।

मल्टीडिसिप्लिनरी अप्रोच पर जोर: इंजीनियरिंग दिवस (Engineers Day Celebration)

राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) के आलोक में अकादमिक सीमाओं को समाप्त करने का आह्वान करते हुए कुलपति ने कहा कि आने वाले समय में विभिन्न संकायों के बीच का भेद लगभग समाप्त हो जाएगा। आज के तकनीकी विद्यार्थियों को मल्टीडिसिप्लिनरी अप्रोच (बहुविषयक दृष्टिकोण) अपनाकर ही भविष्य की चुनौतियों का सामना करना होगा।

उन्होंने एक अनूठा उदाहरण देते हुए समझाया कि यदि भौतिक विज्ञान का कोई छात्र संगीत जैसे ललित कला विषय के सिद्धांतों को समझता है, तो विभिन्न विधाओं के ज्ञान का यह अद्भुत मिश्रण जटिलतम वैज्ञानिक समस्याओं के तकनीकी समाधान तलाशने में क्रांतिकारी साबित हो सकता है। प्रो. सिंह ने भावी इंजीनियरों से अपील की कि वे अपनी तकनीकी कार्यकुशलता में सामाजिक सरोकारों और राष्ट्रीय प्राथमिकताओं को अनिवार्य रूप से समाहित करें।

इंजीनियरिंग दिवस (Engineers Day Celebration) का ऐतिहासिक महत्व क्या है? (People Also Search For)

गूगल पर लोग अक्सर यह सर्च करते हैं कि भारत में इंजीनियरिंग दिवस (Engineers Day Celebration) 15 सितंबर को ही क्यों मनाया जाता है।

यह ऐतिहासिक दिवस भारत के महानतम सिविल इंजीनियर, विद्वान और राजनेता भारत रत्न डॉ. मोक्षगुंडम विश्वेश्वरैया की जयंती के उपलक्ष्य में पूरे देश में राष्ट्रीय गौरव के साथ मनाया जाता है। डॉ. विश्वेश्वरैया ने मैसूर के कृष्णराज सागर बांध के निर्माण, हैदराबाद शहर की बाढ़ सुरक्षा प्रणाली और देश भर में आधुनिक जल प्रबंधन तकनीकों की नींव रखी थी। वर्तमान डिजिटल भारत में यह दिवस तकनीकी नवाचार, अनुसंधान और राष्ट्र-निर्माण में इंजीनियरों के अद्वितीय योगदान को रेखांकित करने का माध्यम बन चुका है।

180 विद्यार्थियों ने लिया भाग: इंजीनियरिंग दिवस (Engineers Day Celebration)

तकनीकी उत्सव के अंतर्गत विद्यार्थियों की बौद्धिक और वैचारिक क्षमता को परखने के लिए एक विशेष निबंध प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। इस ज्ञानवर्धक प्रतियोगिता में विश्वविद्यालय के विभिन्न संकायों के 180 छात्र-छात्राओं ने पूरे उत्साह के साथ प्रतिभाग किया।

प्रतियोगिता के परिणाम घोषित होने के बाद मुख्य अतिथि अर्पित निगम और कुलपति प्रो. रवि शंकर सिंह ने उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले मेधावी छात्र-छात्राओं को पदक एवं प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया:

  • प्रथम स्थान: कादरिया बानो
  • द्वितीय स्थान: सुनील पाल
  • तृतीय स्थान: प्रियांशी

विशेष सम्मान: तकनीकी रचनात्मकता के लिए बीसीए (BCA) संकाय के छात्र रूपेश को विशेष पुरस्कार से नवाजा गया।

मां पाटेश्वरी विश्वविद्यालय में तकनीकी शिक्षा के अवसर (People Also Search For)

उत्तर प्रदेश के देवीपाटन मंडल और तराई क्षेत्र के छात्र लगातार सर्च करते हैं कि मां पाटेश्वरी राज्य विश्वविद्यालय में इंजीनियरिंग और आईटी के कौन-कौन से आधुनिक कोर्स उपलब्ध हैं।

विश्वविद्यालय प्रशासन तराई अंचल के युवाओं को विश्वस्तरीय तकनीकी शिक्षा सुलभ कराने के उद्देश्य से अपने स्कूल ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी के बुनियादी ढांचे को लगातार सुदृढ़ कर रहा है। यहाँ आधुनिक कंप्यूटर लैब्स, प्रैक्टिकल वर्कशॉप्स, इंडस्ट्री-एकेडेमिया पार्टनरशिप और स्किल-ओरिएंटेड पाठ्यक्रमों को प्राथमिकता दी जा रही है, ताकि ग्रामीण व अर्ध-शहरी पृष्ठभूमि के युवा राष्ट्रीय स्तर के कैंपस प्लेसमेंट में उत्कृष्ट प्रदर्शन कर सकें।

कार्यक्रम का सफल मंच संचालन आकृति विज्ञा द्वारा किया गया, जबकि सह-संयोजक के रूप में डॉ. अरुण कुमार सिंह ने महत्वपूर्ण दायित्व निभाया। कार्यक्रम की औपचारिक रूपरेखा और प्रतिवेदन डॉ. भरत कुमार गुप्ता द्वारा प्रस्तुत किया गया तथा अंत में डॉ. आशुतोष कुमार ने सभी अतिथियों का धन्यवाद ज्ञापित किया।

इस गरिमामयी इंजीनियरिंग दिवस (Engineers Day Celebration) समारोह में कला संकाय के निदेशक प्रो. बीपी सिंह, कुलसचिव श्री परमानंद सिंह, विभिन्न विभागों के विभागाध्यक्ष, प्राध्यापकगण, भारी संख्या में छात्र-छात्राएं और स्थानीय मीडियाकर्मी उपस्थित रहे।

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Navneet Mishra

Navneet Mishra is a seasoned journalist currently associated with Nirbhik India and its digital portal, nirbhikindia.in. With over six years of experience across print and digital platforms, Navneet specializes in politics, sports, economics, and geopolitics.
A Master’s graduate in Mass Communication from Deen Dayal Upadhyay Gorakhpur University, he is also a dedicated media scholar. His academic research focuses on “the pivotal role of Gorakhpur’s Hindi newspapers during the Indian freedom struggle against the British Crown”. Before joining Nirbhik India, Navneet spent five years at Adarsh Jeevan and gained valuable field experience at Amar Ujala Gorakhpur as training reporter only for 5 days.
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नवनीत मिश्रा वर्तमान में ‘निर्भीक इंडिया’ मीडिया समूह से जुड़े हैं। उन्होंने दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन में मास्टर्स किया है। पत्रकारिता के अपने 6 वर्षों के सफर में उन्होंने प्रिंट और डिजिटल दोनों डेस्क पर काम किया है। उनके शोध का विषय ब्रिटिश शासन के खिलाफ गोरखपुर के अखबारों का योगदान रहा है, जो उनकी ऐतिहासिक समझ को दर्शाता है। वे राजनीति, अर्थव्यवस्था और अंतरराष्ट्रीय मामलों (Geopolitics) पर निरंतर लिखते रहे हैं। ‘आदर्श जीवन’ दैनिक में 5 साल का कार्यकाल और ‘अमर उजाला’ गोरखपुर में ट्रेनिंग रिपोर्टिंग के तौर पर मात्र 5 दिन काम क्या है उनकी लेखनी को और भी निखारता है।

Navneet Mishra

Navneet Mishra is a seasoned journalist currently associated with Nirbhik India and its digital portal, nirbhikindia.in. With over six years of experience across print and digital platforms, Navneet specializes in politics, sports, economics, and geopolitics. A Master’s graduate in Mass Communication from Deen Dayal Upadhyay Gorakhpur University, he is also a dedicated media scholar. His academic research focuses on "the pivotal role of Gorakhpur’s Hindi newspapers during the Indian freedom struggle against the British Crown". Before joining Nirbhik India, Navneet spent five years at Adarsh Jeevan and gained valuable field experience at Amar Ujala Gorakhpur as training reporter only for 5 days. ---------------------------------------------------------------------------------- नवनीत मिश्रा वर्तमान में 'निर्भीक इंडिया' मीडिया समूह से जुड़े हैं। उन्होंने दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन में मास्टर्स किया है। पत्रकारिता के अपने 6 वर्षों के सफर में उन्होंने प्रिंट और डिजिटल दोनों डेस्क पर काम किया है। उनके शोध का विषय ब्रिटिश शासन के खिलाफ गोरखपुर के अखबारों का योगदान रहा है, जो उनकी ऐतिहासिक समझ को दर्शाता है। वे राजनीति, अर्थव्यवस्था और अंतरराष्ट्रीय मामलों (Geopolitics) पर निरंतर लिखते रहे हैं। 'आदर्श जीवन' दैनिक में 5 साल का कार्यकाल और 'अमर उजाला' गोरखपुर में ट्रेनिंग रिपोर्टिंग के तौर पर मात्र 5 दिन काम क्या है उनकी लेखनी को और भी निखारता है।

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