गुरूवार, सितम्बर 10, 2026
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नौकर ने की चोरी (Servant theft): जमीन से निकले जेवर

गोरखपुर: घरों में साफ-सफाई और खाना बनाने वाले नौकर ने की चोरी (servant theft) का एक बेहद चौंकाने वाला मामला सामने आया है। गोरखपुर पुलिस के बेलघाट थाना क्षेत्र में दो घरेलू कर्मचारियों ने भरोसे का कत्ल करते हुए अपने ही मालिक के घर को निशाना बना लिया।

नौकर ने की चोरी (servant theft): दिनदहाड़े दिया वारदात को अंजाम
नौकर ने की चोरी (Servant theft) जमीन से निकले जेवर

पुलिस अधीक्षक दक्षिणी के कड़े मार्गदर्शन में बेलघाट पुलिस (Belghat police) ने त्वरित कार्रवाई करते हुए दोनों शातिर आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। इन चोरों ने पकड़े जाने के डर से चोरी किए गए शत-प्रतिशत माल को शौचालय के पीछे जमीन में गाड़ दिया था। गोरखपुर क्राइम न्यूज़ (Gorakhpur crime news) से जुड़ा यह सनसनीखेज मामला शहरवासियों को अपने घरेलू कर्मचारियों के प्रति सतर्क रहने की एक बड़ी चेतावनी दे रहा है।

नौकर ने की चोरी (servant theft): दिनदहाड़े दिया वारदात को अंजाम

बेलघाट थाने में दर्ज मु.अ.सं. 239/2026 की आधिकारिक जानकारी के अनुसार, वादी मुकदमा ने 8 सितंबर 2026 को पुलिस को सूचना दी कि उनके घर से 80 हजार रुपये नकद और कीमती सोने-चांदी के आभूषण चोरी हो गए हैं।

पुलिस की सघन जांच में यह बात सामने आई कि आरोपी गौरव सिंह और कृष्णा उर्फ मुरारी वादी के घर पर ही लंबे समय से साफ-सफाई और खाना बनाने का काम करते थे। एक दिन दोपहर के समय जब घर के लोग आराम कर रहे थे, तब मौका पाकर इन दोनों ने बड़ी ही चालाकी से बक्से का ताला तोड़ लिया। इसके बाद इन दोनों ने घर में रखे कीमती जेवरात और नकदी पार कर दी। नौकर ने की चोरी (servant theft) की इस घटना ने वादी को गहरे सदमे में डाल दिया था क्योंकि उन्हें अपने ही इन कर्मचारियों पर अटूट भरोसा था।

नौकर ने की चोरी (Servant theft), शौचालय के पीछे गाड़े जेवर और जेवरात और नकदी बरामद (jewelry and cash recovered)

पुलिस हिरासत में कड़ाई से पूछताछ किए जाने पर दोनों आरोपियों ने अपना जुर्म कबूल कर लिया। उन्होंने बेलघाट पुलिस (Belghat police) को बताया कि चोरी करने के बाद वे घबरा गए थे कि कहीं पुलिस की तलाशी में माल मिल न जाए। इसलिए उन्होंने चोरी किए गए नकद रुपयों और गहनों को वादी के घर के शौचालय के पीछे दीवार के किनारे एक गहरा गड्ढा खोदकर जमीन में गाड़ दिया था।

क्षेत्राधिकारी खजनी के पर्यवेक्षण और प्रभारी निरीक्षक बेलघाट के निर्देशन में पुलिस टीम ने आरोपियों की सटीक निशानदेही पर निम्नलिखित जेवरात और नकदी बरामद (jewelry and cash recovered) कर लिए हैं:

  • 01 पीली धातु (सोना) का मंगलसूत्र
  • 01 पीली धातु की अंगूठी
  • 01 जोड़ी पीली धातु की कान की बाली
  • 21,800/- रुपये नकद

इन दोनों आरोपियों की पहचान गौरव सिंह (पुत्र रामानन्द सिंह) और कृष्णा उर्फ मुरारी (पुत्र भजुराम), निवासी पिपरसण्डी, थाना बेलघाट, जनपद गोरखपुर के रूप में हुई है।

आपराधिक इतिहास और बीएनएस कानून (People Also Search For)

इंटरनेट पर गोरखपुर क्राइम न्यूज़ (Gorakhpur crime news) पढ़ने वाले लोग अक्सर खोजते हैं कि विश्वासघात कर चोरी करने वाले ऐसे अपराधियों पर पुलिस नए कानून के तहत क्या कार्रवाई करती है।

बेलघाट पुलिस (Belghat police) ने इन आरोपियों के खिलाफ शुरू में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 305(1) (आवास में चोरी) और 61(2) (आपराधिक षड्यंत्र) के तहत मामला दर्ज किया था। माल की शत-प्रतिशत जेवरात और नकदी बरामद (jewelry and cash recovered) होने के बाद इस मुकदमे में धारा 317(2) BNS (चोरी की संपत्ति छिपाना या रखना) की बढ़ोत्तरी कर दी गई है।

जांच में यह भी स्पष्ट हुआ है कि मुख्य आरोपी गौरव सिंह एक अभ्यस्त अपराधी है। इसके खिलाफ बेलघाट थाने में मु.अ.सं. 0085/2025 (धारा 191(2), 351(3), 352, 78 बीएनएस) और मु.अ.सं. 0186/2021 (धारा 380, 411, 457 पुरानी भादवि) पहले से ही दर्ज हैं।

इस सफल खुलासे को अंजाम देने वाली पुलिस टीम में उ.नि. अभिषेक कुमार यादव, रिक्रूट कांस्टेबल कुलदीप, रिक्रूट कांस्टेबल रोहित सिंह और रिक्रूट कांस्टेबल फैजान अफसर (थाना बेलघाट) शामिल रहे। दोनों अभियुक्तों को सक्षम न्यायालय के समक्ष पेश कर जेल भेजा जा रहा है।

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Navneet Mishra

Navneet Mishra is a seasoned journalist currently associated with Nirbhik India and its digital portal, nirbhikindia.in. With over six years of experience across print and digital platforms, Navneet specializes in politics, sports, economics, and geopolitics.
A Master’s graduate in Mass Communication from Deen Dayal Upadhyay Gorakhpur University, he is also a dedicated media scholar. His academic research focuses on “the pivotal role of Gorakhpur’s Hindi newspapers during the Indian freedom struggle against the British Crown”. Before joining Nirbhik India, Navneet spent five years at Adarsh Jeevan and gained valuable field experience at Amar Ujala Gorakhpur as training reporter only for 5 days.
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नवनीत मिश्रा वर्तमान में ‘निर्भीक इंडिया’ मीडिया समूह से जुड़े हैं। उन्होंने दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन में मास्टर्स किया है। पत्रकारिता के अपने 6 वर्षों के सफर में उन्होंने प्रिंट और डिजिटल दोनों डेस्क पर काम किया है। उनके शोध का विषय ब्रिटिश शासन के खिलाफ गोरखपुर के अखबारों का योगदान रहा है, जो उनकी ऐतिहासिक समझ को दर्शाता है। वे राजनीति, अर्थव्यवस्था और अंतरराष्ट्रीय मामलों (Geopolitics) पर निरंतर लिखते रहे हैं। ‘आदर्श जीवन’ दैनिक में 5 साल का कार्यकाल और ‘अमर उजाला’ गोरखपुर में ट्रेनिंग रिपोर्टिंग के तौर पर मात्र 5 दिन काम क्या है उनकी लेखनी को और भी निखारता है।

Navneet Mishra

Navneet Mishra is a seasoned journalist currently associated with Nirbhik India and its digital portal, nirbhikindia.in. With over six years of experience across print and digital platforms, Navneet specializes in politics, sports, economics, and geopolitics. A Master’s graduate in Mass Communication from Deen Dayal Upadhyay Gorakhpur University, he is also a dedicated media scholar. His academic research focuses on "the pivotal role of Gorakhpur’s Hindi newspapers during the Indian freedom struggle against the British Crown". Before joining Nirbhik India, Navneet spent five years at Adarsh Jeevan and gained valuable field experience at Amar Ujala Gorakhpur as training reporter only for 5 days. ---------------------------------------------------------------------------------- नवनीत मिश्रा वर्तमान में 'निर्भीक इंडिया' मीडिया समूह से जुड़े हैं। उन्होंने दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन में मास्टर्स किया है। पत्रकारिता के अपने 6 वर्षों के सफर में उन्होंने प्रिंट और डिजिटल दोनों डेस्क पर काम किया है। उनके शोध का विषय ब्रिटिश शासन के खिलाफ गोरखपुर के अखबारों का योगदान रहा है, जो उनकी ऐतिहासिक समझ को दर्शाता है। वे राजनीति, अर्थव्यवस्था और अंतरराष्ट्रीय मामलों (Geopolitics) पर निरंतर लिखते रहे हैं। 'आदर्श जीवन' दैनिक में 5 साल का कार्यकाल और 'अमर उजाला' गोरखपुर में ट्रेनिंग रिपोर्टिंग के तौर पर मात्र 5 दिन काम क्या है उनकी लेखनी को और भी निखारता है।

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