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ठोस अपशिष्ट प्रबंधन (Solid Waste Management)पर रेलवे का नया नियम

गोरखपुर (निर्भीक इंडिया ब्यूरो): ठोस अपशिष्ट प्रबंधन (Solid Waste Management) को लेकर भारतीय रेल ने पूर्वोत्तर रेलवे के सभी प्रमुख स्टेशनों, कोचिंग डिपो, लोको शेड और रेलवे कॉलोनियों में एक व्यापक और निर्णायक अभियान छेड़ दिया है।

ठोस अपशिष्ट प्रबंधन (Solid Waste Management): लखनऊ मंडल में सफाई मित्रों व कर्मचारियों को विशेष ट्रेनिंग
ठोस अपशिष्ट प्रबंधन (Solid Waste Management)पर रेलवे का नया नियम

01 से 15 अक्टूबर, 2026 तक संचालित किए जा रहे राष्ट्रव्यापी स्वच्छता पखवाड़ा अभियान (Swachhata Pakhwada Campaign) के तहत 13 अक्टूबर का दिन विशेष रूप से रेलवे परिसरों में वैज्ञानिक कचरा निस्तारण और पर्यावरण संरक्षण को समर्पित किया गया। पूर्वोत्तर रेलवे मुख्यालय गोरखपुर सहित लखनऊ, वाराणसी और इज्जतनगर मंडलों में आयोजित इस महा-अभियान का मुख्य उद्देश्य रेलवे स्टेशनों को ‘जीरो वेस्ट’ (Zero Waste) और पर्यावरण-अनुकूल हरित परिसर में तब्दील करना है।

निर्भीक इंडिया (Nirbhik India) की विशेष रिपोर्ट के अनुसार, इस अभियान के तहत रेलवे ने स्टेशनों पर स्थित सभी व्यावसायिक प्रतिष्ठानों और बड़ी इकाइयों के लिए बल्क वेस्ट जनरेटर (Bulk Waste Generator) का पंजीकरण अनिवार्य कर दिया है।

इसके साथ ही खाद्य सामग्री बेचने वाले वेंडरों, पैंट्री कार कर्मचारियों और सफाई मित्रों को स्रोत पर ही कचरा पृथक्कीकरण (Waste Segregation at Source) के नए और कड़े नियमों का पालन करने की शपथ दिलाई गई है, जिससे ठोस अपशिष्ट प्रबंधन (Solid Waste Management) को जमीनी स्तर पर प्रभावी बनाया जा सके और रेलवे ट्रैक व प्लेटफॉर्मों पर कचरे के अंबार को हमेशा के लिए समाप्त किया जा सके।

ठोस अपशिष्ट प्रबंधन (Solid Waste Management): लखनऊ मंडल में सफाई मित्रों व कर्मचारियों को विशेष ट्रेनिंग

लखनऊ मंडल के सबसे व्यस्त रेलवे स्टेशनों—गोरखपुर जंक्शन, गोंडा, लखनऊ (एनईआर), ऐशबाग, बस्ती, खलीलाबाद, सीतापुर एवं मैलानी जंक्शन—समेत सभी रेलवे कॉलोनियों और तकनीकी डिपो में सघन गतिविधियां आयोजित की गईं:

  • सफाई मित्रों को वैज्ञानिक प्रशिक्षण: प्लेटफॉर्मों और ट्रेनों की सफाई में लगे ‘सफाई मित्रों’ और रेलकर्मियों को ठोस अपशिष्ट प्रबंधन (Solid Waste Management) की आधुनिक तकनीकों से अवगत कराया गया। इसमें कचरे को सही तरीके से एकत्र करना, गीले और सूखे कचरे को अलग-अलग छांटना और उसका सुरक्षित निस्तारण शामिल है, ताकि ठोस अपशिष्ट प्रबंधन के सभी मानकों का शत-प्रतिशत पालन हो सके।
  • संविदा कर्मचारियों को स्वच्छता की शपथ: स्टेशनों पर ठेके पर काम करने वाले संविदा कर्मचारियों को स्वच्छता बनाए रखने और यात्रियों को इसके लिए प्रेरित करने की आधिकारिक शपथ दिलाई गई।
  • ‘एक पेड़ माँ के नाम’ पौधारोपण: पर्यावरण संतुलन को बढ़ावा देने के लिए रेलवे कॉलोनियों, कोचिंग डिपो और लोको शेड परिसरों में ‘एक पेड़ माँ के नाम’ अभियान के तहत व्यापक स्तर पर छायादार और फलदार पौधे रोपे गए, जो ठोस अपशिष्ट प्रबंधन के साथ-साथ पर्यावरण संतुलन को भी सुदृढ़ करते हैं।
  • जनभागीदारी से स्वच्छ रेलवे परिसर: लखनऊ मंडल में यात्रियों और स्थानीय जनता को जोड़कर स्वच्छ, स्वस्थ और इको-फ्रेंडली रेलवे स्टेशन बनाने के लिए निरंतर संवाद स्थापित किया जा रहा है।

ठोस अपशिष्ट प्रबंधन (Solid Waste Management): वाराणसी मंडल में कैटरिंग स्टाफ और वेंडरों को सख्त निर्देश

वाराणसी मंडल अंतर्गत बनारस, वाराणसी सिटी, बलिया, मऊ, गाजीपुर सिटी, आजमगढ़ और छपरा जैसे प्रमुख स्टेशनों पर खानपान इकाइयों और वेंडरों की जवाबदेही तय करने पर विशेष जोर दिया गया:

1. वेंडरों और पैंट्री कर्मचारियों के लिए नए कड़े नियम:

ट्रेनों की पैंट्री कार में खाना पकाने वाले कैटरिंग स्टाफ, प्लेटफॉर्म के स्टॉल संचालकों और ट्रॉली वेंडरों को ठोस अपशिष्ट प्रबंधन (Solid Waste Management) के अंतर्गत कचरा अलग करने के वैधानिक प्रावधानों की जानकारी दी गई। वेंडरों ने संकल्प लिया कि वे खाद्य अपशिष्ट (गीला कचरा) और पैकेजिंग सामग्री (सूखा प्लास्टिक कचरा) को अलग-अलग डस्टबिन में ही एकत्र करेंगे और तय नियमों के अनुसार ही उसका निस्तारण करेंगे, जिससे रेलवे का ठोस अपशिष्ट प्रबंधन सुचारू रूप से चल सके।

2. यात्रियों में जागरूकता के लिए व्यापक प्रचार:

  • पोस्टर, बैनर और स्वच्छता नारे: स्टेशनों के प्रतीक्षालयों, फुट ओवरब्रिज और टिकट काउंटरों पर आकर्षक पोस्टर और स्लोगन लगाए गए हैं, जो यात्रियों को डस्टबिन का इस्तेमाल करने का संदेश देते हैं।
  • पब्लिक एड्रेस सिस्टम (PA) से उद्घोषणाएं: ट्रेनों के आगमन और प्रस्थान के दौरान स्टेशन के लाउडस्पीकरों से निरंतर सार्वजनिक अपील प्रसारित की जा रही है कि यात्री चलती ट्रेन या प्लेटफॉर्म पर कचरा न फेंकें और रेलवे की स्वच्छता रैंकिंग सुधारने तथा ठोस अपशिष्ट प्रबंधन (Solid Waste Management) के नियमों का पालन करने में सहयोग दें।

ठोस अपशिष्ट प्रबंधन (Solid Waste Management): इज्जतनगर मंडल में यात्रियों से स्वच्छता फीडबैक

बरेली, कासगंज, फर्रुखाबाद, पीलीभीत और लालकुआँ जैसे प्रमुख स्टेशनों वाले इज्जतनगर मंडल में तकनीकी और जनसहभागिता आधारित मॉडल लागू किया गया:

  • अपशिष्ट प्रसंस्करण सुविधाओं की मैपिंग: मंडल के सभी प्रमुख स्टेशनों और कार्यशालाओं में उपलब्ध वेस्ट प्रोसेसिंग प्लांट्स, कंपोस्टिंग पिट्स और रिसाइक्लिंग यूनिट्स की पहचान कर उनकी क्षमता का आकलन किया गया।
  • बल्क वेस्ट जनरेटर का अनिवार्य पंजीकरण: रेलवे परिसर में प्रतिदिन 100 किलोग्राम से अधिक कचरा उत्पन्न करने वाले बड़े प्रतिष्ठानों, कैंटीन, रेस्टोरेंट और पार्सल गोदामों को बल्क वेस्ट जनरेटर (Bulk Waste Generator) के रूप में पंजीकृत करने की प्रक्रिया शुरू की गई। इन प्रतिष्ठानों को अपने कचरे का ऑन-साइट प्रसंस्करण करना अनिवार्य होगा, जो ठोस अपशिष्ट प्रबंधन का एक अत्यंत महत्वपूर्ण वैधानिक पहलू है।
  • यात्रियों से सीधा फीडबैक: स्टेशनों पर प्रतीक्षारत यात्रियों और ट्रेनों में सफर कर रहे मुसाफिरों से साफ-सफाई की व्यवस्था पर फीडबैक फॉर्म भरवाए गए। यात्रियों के वास्तविक अनुभवों और सुझावों के आधार पर सफाई व्यवस्था में तत्काल सुधार किए जा रहे हैं, ताकि यात्रियों की भागीदारी से ठोस अपशिष्ट प्रबंधन को और अधिक प्रभावी बनाया जा सके।

रेलवे स्टेशनों पर कचरा पृथक्कीकरण के 4 रंगीन डस्टबिन नियम

निर्भीक इंडिया (Nirbhik India) अपने पाठकों और रेल यात्रियों की जानकारी के लिए रेलवे स्टेशनों पर लगाए गए विभिन्न रंगों के कूड़ेदानों और उनके सही उपयोग का ब्यौरा प्रस्तुत कर रहा है, जो ठोस अपशिष्ट प्रबंधन (Solid Waste Management) का प्राथमिक आधार हैं:

डस्टबिन का रंगकचरे का प्रकारकिस तरह का कचरा डालें
हरा डस्टबिन (Green Bin)गीला व जैविक कचराबचा हुआ भोजन, चाय की पत्ती, फल-सब्जियों के छिलके
नीला डस्टबिन (Blue Bin)सूखा व रिसाइकल योग्य कचराकागज, अखबार, गत्ता, प्लास्टिक की बोतलें, खाली डिब्बे
पीला डस्टबिन (Yellow Bin)बायोमेडिकल व सैनिटरी कचराइस्तेमाल किए गए मास्क, पट्टियां, सैनिटरी पैड्स, डायपर
लाल / काला डस्टबिन (Red/Black)खतरनाक व ई-कचराबैटरी, इलेक्ट्रॉनिक वेस्ट, रासायनिक डिब्बे, टूटे कांच

रेलवे स्वच्छता और कचरा प्रबंधन से जुड़े अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (People Also Ask)

प्र. 1: रेलवे स्टेशनों पर ‘बल्क वेस्ट जनरेटर’ (Bulk Waste Generator) किसे माना जाता है?

उत्तर: ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम, 2016 के तहत रेलवे परिसर में स्थित वे सभी प्रतिष्ठान, होटल, आईआरसीटीसी फूड प्लाजा, कैटरिंग यूनिट्स और बेस किचन जो प्रतिदिन औसतन 100 किलोग्राम या उससे अधिक कचरा उत्पन्न करते हैं, उन्हें बल्क वेस्ट जनरेटर माना जाता है। इन्हें अपने कचरे का खुद से पृथक्कीकरण और वैज्ञानिक निस्तारण करना अनिवार्य है।

प्र. 2: रेलवे स्टेशन या ट्रेन में गंदगी फैलाने पर कितना जुर्माना लगता है?

उत्तर: भारतीय रेलवे (सफाई एवं स्वच्छता) नियमावली के तहत किसी भी स्टेशन परिसर, प्लेटफॉर्म या रेलवे ट्रैक पर थूकने, कचरा फेंकने या गंदगी फैलाने पर पकड़े जाने पर ₹500 तक का ऑन-द-स्पॉट चालान और जुर्माना लगाया जा सकता है।

प्र. 3: स्वच्छता पखवाड़ा अभियान का मुख्य उद्देश्य क्या है?

उत्तर: भारतीय रेल द्वारा 01 से 15 अक्टूबर तक स्वच्छता पखवाड़ा मनाया जाता है, जिसका उद्देश्य स्टेशनों, ट्रेनों, कॉलोनियों और डिपो में गहन सफाई अभियान चलाना, प्लास्टिक मुक्त परिसर बनाना, ठोस अपशिष्ट प्रबंधन के प्रति जवाबदेही तय करना और यात्रियों में स्वच्छता के प्रति जनचेतना जागृत करना है।

प्र. 4: यात्री स्टेशन पर गंदगी दिखने पर ऑनलाइन शिकायत कैसे दर्ज करा सकते हैं?

उत्तर: यात्री ‘रेल मदद’ (RailMadad) मोबाइल ऐप, हेल्पलाइन नंबर 139 अथवा रेल मदद के आधिकारिक वेब पोर्टल पर अपनी पीएनआर संख्या या स्टेशन का नाम दर्ज कर तत्काल सफाई की मांग कर सकते हैं।

ठोस अपशिष्ट प्रबंधन (Solid Waste Management) केवल रेलवे प्रशासन की पहल नहीं है, बल्कि यह हर यात्री के नागरिक बोध की परीक्षा है। निर्भीक इंडिया (Nirbhik India) सभी यात्रियों से अपील करता है कि ट्रेनों और स्टेशनों को अपना घर समझकर स्वच्छ रखें और सिंगल-यूज प्लास्टिक का त्याग कर हरित रेलवे के निर्माण में भागीदार बनें।

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Navneet Mishra

Navneet Mishra is a seasoned journalist currently associated with Nirbhik India and its digital portal, nirbhikindia.in. With over six years of experience across print and digital platforms, Navneet specializes in politics, sports, economics, and geopolitics.
A Master’s graduate in Mass Communication from Deen Dayal Upadhyay Gorakhpur University, he is also a dedicated media scholar. His academic research focuses on “the pivotal role of Gorakhpur’s Hindi newspapers during the Indian freedom struggle against the British Crown”. Before joining Nirbhik India, Navneet spent five years at Adarsh Jeevan and gained valuable field experience at Amar Ujala Gorakhpur as training reporter only for 5 days.
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नवनीत मिश्रा वर्तमान में ‘निर्भीक इंडिया’ मीडिया समूह से जुड़े हैं। उन्होंने दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन में मास्टर्स किया है। पत्रकारिता के अपने 6 वर्षों के सफर में उन्होंने प्रिंट और डिजिटल दोनों डेस्क पर काम किया है। उनके शोध का विषय ब्रिटिश शासन के खिलाफ गोरखपुर के अखबारों का योगदान रहा है, जो उनकी ऐतिहासिक समझ को दर्शाता है। वे राजनीति, अर्थव्यवस्था और अंतरराष्ट्रीय मामलों (Geopolitics) पर निरंतर लिखते रहे हैं। ‘आदर्श जीवन’ दैनिक में 5 साल का कार्यकाल और ‘अमर उजाला’ गोरखपुर में ट्रेनिंग रिपोर्टिंग के तौर पर मात्र 5 दिन काम क्या है उनकी लेखनी को और भी निखारता है।

Navneet Mishra

Navneet Mishra is a seasoned journalist currently associated with Nirbhik India and its digital portal, nirbhikindia.in. With over six years of experience across print and digital platforms, Navneet specializes in politics, sports, economics, and geopolitics. A Master’s graduate in Mass Communication from Deen Dayal Upadhyay Gorakhpur University, he is also a dedicated media scholar. His academic research focuses on "the pivotal role of Gorakhpur’s Hindi newspapers during the Indian freedom struggle against the British Crown". Before joining Nirbhik India, Navneet spent five years at Adarsh Jeevan and gained valuable field experience at Amar Ujala Gorakhpur as training reporter only for 5 days. ---------------------------------------------------------------------------------- नवनीत मिश्रा वर्तमान में 'निर्भीक इंडिया' मीडिया समूह से जुड़े हैं। उन्होंने दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन में मास्टर्स किया है। पत्रकारिता के अपने 6 वर्षों के सफर में उन्होंने प्रिंट और डिजिटल दोनों डेस्क पर काम किया है। उनके शोध का विषय ब्रिटिश शासन के खिलाफ गोरखपुर के अखबारों का योगदान रहा है, जो उनकी ऐतिहासिक समझ को दर्शाता है। वे राजनीति, अर्थव्यवस्था और अंतरराष्ट्रीय मामलों (Geopolitics) पर निरंतर लिखते रहे हैं। 'आदर्श जीवन' दैनिक में 5 साल का कार्यकाल और 'अमर उजाला' गोरखपुर में ट्रेनिंग रिपोर्टिंग के तौर पर मात्र 5 दिन काम क्या है उनकी लेखनी को और भी निखारता है।

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