गोरखपुर समाचारउत्तर प्रदेश

Mahindra Pride classroom का विशेष प्रशिक्षण

गोरखपुर (निर्भीक इंडिया ब्यूरो): महिंद्रा प्राइड क्लासरूम (Mahindra Pride Classroom) के अंतर्गत मदन मोहन मालवीय प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (एमएमएमयूटी) में बीटेक कंप्यूटर साइंस के विद्यार्थियों के लिए छह दिवसीय विशेष प्लेसमेंट व सॉफ्ट स्किल प्रशिक्षण कार्यक्रम सफलतापूर्वक संपन्न हुआ।

महिंद्रा प्राइड क्लासरूम (Mahindra Pride Classroom): छह दिवसीय प्रशिक्षण में 36 घंटे की गहन ट्रेनिंग
महिंद्रा प्राइड क्लासरूम (Mahindra Pride) ट्रेनिंग

विश्वविद्यालय के कंप्यूटर साइंस एवं इंजीनियरिंग विभाग (CSE Department) की ओर से महिंद्रा समूह तथा नांदी फाउंडेशन (Naandi Foundation) के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस कार्यशाला में विद्यार्थियों को तकनीकी ज्ञान के साथ-साथ कॉरपोरेट जगत की मांग के अनुरूप तैयार किया गया।

निर्भीक इंडिया (Nirbhik India) की विशेष रिपोर्ट के अनुसार, 05 से 10 अक्टूबर तक चले इस ऑफलाइन प्रशिक्षण शिविर में कुल 36 घंटे की गहन ट्रेनिंग दी गई। इसका मुख्य उद्देश्य छात्रों के तकनीकी ज्ञान को व्यावहारिक व्यावसायिक कौशल, साक्षात्कार क्षमता और प्रभावी संवाद शैली से जोड़कर उनकी रोजगार क्षमता को मजबूती प्रदान करना रहा।

महिंद्रा प्राइड क्लासरूम (Mahindra Pride Classroom): छह दिवसीय प्रशिक्षण में 36 घंटे की गहन ट्रेनिंग

मदन मोहन मालवीय प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (MMMUT Gorakhpur) के परिसर में आयोजित इस कार्यक्रम में विद्यार्थियों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया, जिससे महिंद्रा प्राइड क्लासरूम का यह सत्र अत्यंत सफल रहा। इस छह दिवसीय बूटकैंप के दौरान प्रतिदिन छह घंटे के इंटरैक्टिव सत्र आयोजित किए गए।

इस सघन कार्यशाला का मुख्य फोकस इंजीनियरिंग छात्रों को केवल थ्योरी तक सीमित न रखकर उन्हें वास्तविक कार्यस्थल (Corporate Workplace) की कार्यसंस्कृति, दबाव प्रबंधन और पेशेवर तौर-तरीकों का व्यावहारिक अनुभव कराना था।

सत्रों के दौरान विद्यार्थियों को यह सिखाया गया कि किसी बहुराष्ट्रीय आईटी कंपनी के कड़े चयन प्रक्रिया में तकनीकी कोडिंग टेस्ट पास करने के बाद ग्रुप डिस्कशन (GD) और पर्सनल इंटरव्यू (PI) में खुद को सर्वश्रेष्ठ उम्मीदवार के रूप में कैसे पेश किया जाए।

महिंद्रा प्राइड क्लासरूम (Mahindra Pride Classroom): नांदी फाउंडेशन के विशेषज्ञ ने दिए प्लेसमेंट टिप्स

इस पूरे छह दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का संचालन नांदी फाउंडेशन की ओर से अधिकृत विख्यात उद्योग विशेषज्ञ एवं कॉरपोरेट ट्रेनर राज कमल मिश्रा ने किया।

प्रशिक्षक राज कमल मिश्रा ने संवादात्मक सत्रों, लाइव केस स्टडीज, रोल प्ले और समूह अभ्यासों के माध्यम से विद्यार्थियों को कॉरपोरेट जगत की वास्तविक अपेक्षाओं से रूबरू कराया, जो महिंद्रा प्राइड क्लासरूम का मुख्य उद्देश्य है।

उन्होंने प्रतिभागियों को प्रभावी संचार कौशल (Communication Skills), सक्रिय श्रवण (Active Listening), शारीरिक भाषा (Body Language) और कार्यस्थल पर सकारात्मक दृष्टिकोण बनाए रखने की बारीकियां सिखाईं। इसके साथ ही प्रभावशाली प्रेजेंटेशन देने की कला का भी अभ्यास कराया गया।

महिंद्रा प्राइड क्लासरूम (Mahindra Pride Classroom): केवल कोडिंग नहीं, कॉरपोरेट शिष्टाचार भी जरूरी

प्रशिक्षण के दौरान विशेषज्ञ ने इस बात पर विशेष जोर दिया कि आज के अत्यधिक प्रतिस्पर्धी आईटी सेक्टर में केवल बेहतरीन सॉफ्टवेयर कोड लिखना ही नौकरी की गारंटी नहीं है।

वर्तमान समय में शीर्ष तकनीकी कंपनियां ऐसे इंजीनियरों की तलाश कर रही हैं, जिनके पास मजबूत तकनीकी समझ के साथ-साथ उत्कृष्ट टीमवर्क, पारस्परिक व्यवहार (Interpersonal Skills) और व्यावसायिक शिष्टाचार (Business Etiquette) हो, और यही गुण महिंद्रा प्राइड क्लासरूम के जरिए सिखाए गए।

छात्रों को सिखाया गया कि क्रॉस-फंक्शनल टीमों में एक साथ कैसे काम किया जाता है, कार्यस्थल पर मतभेदों को पेशेवर तरीके से कैसे सुलझाया जाता है और ईमेल व बिजनेस ड्राफ्टिंग में किन औपचारिकताओं का ध्यान रखना अनिवार्य होता है।

महिंद्रा प्राइड क्लासरूम (Mahindra Pride Classroom): विभाग की दूरदर्शी पहल और कुशल समन्वय

इस गरिमामय कार्यक्रम की अध्यक्षता कंप्यूटर साइंस एवं इंजीनियरिंग विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो. राकेश कुमार ने की।

विभागाध्यक्ष ने विद्यार्थियों को प्रेरित करते हुए कहा कि नियमित डिग्री पाठ्यक्रम के साथ ऐसे उद्योग-उन्मुख प्रशिक्षण कार्यक्रम विद्यार्थियों को प्लेसमेंट ड्राइव में दूसरों से एक कदम आगे रखते हैं।

कार्यशाला का सफल एवं सुव्यवस्थित समन्वय विभाग की सहायक आचार्य डॉ. स्वप्निता श्रीवास्तव, सहायक आचार्य डॉ. विपुल नारायण तथा सह-आचार्य डॉ. सत्य प्रकाश यादव द्वारा किया गया। समन्वयकों ने सुनिश्चित किया कि प्रत्येक सत्र में छात्रों को व्यावहारिक गतिविधियों के जरिए अपनी झिझक मिटाने और मंच पर खुलकर अपनी बात रखने का पर्याप्त अवसर मिले, जिससे महिंद्रा प्राइड क्लासरूम का प्रभाव और अधिक गहरा हो सका।

महिंद्रा प्राइड क्लासरूम (Mahindra Pride Classroom): भविष्य की औद्योगिक चुनौतियों के लिए तैयारी

महिंद्रा समूह और नांदी फाउंडेशन का यह सीएसआर (CSR) अभियान देश भर के मेधावी युवाओं को सशक्त बनाने की दिशा में काम कर रहा है।

इस प्रशिक्षण के माध्यम से एमएमएमयूटी के छात्रों को भविष्य में आने वाले कैंपस प्लेसमेंट ड्राइव्स, जॉब इंटरव्यूज और कॉर्पोरेट लीडरशिप चुनौतियों के लिए मानसिक और व्यावहारिक रूप से सुसज्जित किया गया है, जो महिंद्रा प्राइड क्लासरूम की सबसे बड़ी उपलब्धि है।

सत्र के समापन पर छात्रों ने फीडबैक देते हुए कहा कि इस 36 घंटे के मॉड्यूल ने उनके आत्मविश्वास में अप्रत्याशित वृद्धि की है और उनके इंटरव्यू फोबिया को हमेशा के लिए दूर कर दिया है।

महिंद्रा प्राइड क्लासरूम प्रशिक्षण कार्यक्रम का मुख्य विवरण

छात्रों और अभिभावकों की त्वरित जानकारी के लिए इस छह दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम की प्रमुख बातें नीचे दी गई हैं, जो महिंद्रा प्राइड क्लासरूम (Mahindra Pride Classroom) की उपयोगिता को रेखांकित करती हैं:

विवरणप्रमुख जानकारी
आयोजक विभागकंप्यूटर साइंस एवं इंजीनियरिंग विभाग, एमएमएमयूटी गोरखपुर
सहयोगी संस्थाएंमहिंद्रा ग्रुप एवं नांदी फाउंडेशन (CSR इनिशिएटिव)
प्रशिक्षण की अवधि05 से 10 अक्टूबर, 2026 (छह दिवसीय ऑफलाइन बूटकैंप)
कुल प्रशिक्षण घंटे36 घंटे (प्रतिदिन 6 घंटे के व्यावहारिक सत्र)
मुख्य कॉरपोरेट ट्रेनरराज कमल मिश्रा (उद्योग विशेषज्ञ, नांदी फाउंडेशन)
विभागाध्यक्ष व अध्यक्षप्रो. राकेश कुमार (विभागाध्यक्ष, सीएसई विभाग)
कार्यक्रम समन्वयकडॉ. स्वप्निता श्रीवास्तव, डॉ. विपुल नारायण एवं डॉ. सत्य प्रकाश यादव
मुख्य प्रशिक्षण विषयसॉफ्ट स्किल्स, प्रभावी संचार, टीमवर्क, साक्षात्कार तैयारी व व्यावसायिक शिष्टाचार
महिंद्रा प्राइड क्लासरूम और रोजगार कौशल से जुड़े अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (PAA)

प्र. 1: एमएमएमयूटी में महिंद्रा प्राइड क्लासरूम प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य क्या था?

उत्तर: इसका मुख्य उद्देश्य बीटेक कंप्यूटर साइंस के छात्रों को कोडिंग ज्ञान के साथ-साथ कॉरपोरेट कम्यूनिकेशन, इंटरव्यू स्किल्स, टीमवर्क और व्यावसायिक शिष्टाचार में दक्ष बनाकर उनकी रोजगार क्षमता को बढ़ाना था।

प्र. 2: इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में कुल कितने घंटे की ट्रेनिंग दी गई?

उत्तर: 05 से 10 अक्टूबर 2026 तक चले इस छह दिवसीय ऑफलाइन कार्यक्रम में कुल 36 घंटे का व्यावहारिक और संवादात्मक प्रशिक्षण प्रदान किया गया।

प्र. 3: इंजीनियरिंग छात्रों के लिए सॉफ्ट स्किल्स सीखना क्यों आवश्यक है?

उत्तर: आधुनिक भर्ती प्रक्रियाओं में कंपनियां न केवल तकनीकी ज्ञान बल्कि उम्मीदवार के आत्मविश्वास, टीम में काम करने की क्षमता, समस्या निवारण कौशल और प्रभावी संवाद शैली को परखती हैं।

प्र. 4: महिंद्रा प्राइड क्लासरूम (MPC) की पहल किसके द्वारा संचालित की जाती है?

उत्तर: यह महिंद्रा समूह और नांदी फाउंडेशन का एक प्रमुख सामाजिक उत्तरदायित्व (CSR) कार्यक्रम है, जो देश भर के कॉलेजों में युवाओं के कौशल विकास और रोजगारपरकता को मजबूत करने के लिए निशुल्क संचालित किया जाता है।

महिंद्रा प्राइड क्लासरूम (Mahindra Pride Classroom) की यह पहल एमएमएमयूटी गोरखपुर के छात्रों को तकनीकी दक्षता के साथ-साथ एक पूर्ण पेशेवर व्यक्तित्व प्रदान करने में अत्यंत उपयोगी साबित हुई है, जिससे महिंद्रा प्राइड क्लासरूम के माध्यम से कैंपस प्लेसमेंट में छात्रों का प्रदर्शन बेहतर होगा। निर्भीक इंडिया (Nirbhik India) युवाओं के करियर, तकनीकी शिक्षा और रोजगार से जुड़ी प्रत्येक महत्वपूर्ण खबर को पूरी विश्वसनीयता और गहराई के साथ आप तक पहुंचाने के लिए निरंतर तत्पर है।

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Navneet Mishra

Navneet Mishra is a seasoned journalist currently associated with Nirbhik India and its digital portal, nirbhikindia.in. With over six years of experience across print and digital platforms, Navneet specializes in politics, sports, economics, and geopolitics.
A Master’s graduate in Mass Communication from Deen Dayal Upadhyay Gorakhpur University, he is also a dedicated media scholar. His academic research focuses on “the pivotal role of Gorakhpur’s Hindi newspapers during the Indian freedom struggle against the British Crown”. Before joining Nirbhik India, Navneet spent five years at Adarsh Jeevan and gained valuable field experience at Amar Ujala Gorakhpur as training reporter only for 5 days.
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नवनीत मिश्रा वर्तमान में ‘निर्भीक इंडिया’ मीडिया समूह से जुड़े हैं। उन्होंने दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन में मास्टर्स किया है। पत्रकारिता के अपने 6 वर्षों के सफर में उन्होंने प्रिंट और डिजिटल दोनों डेस्क पर काम किया है। उनके शोध का विषय ब्रिटिश शासन के खिलाफ गोरखपुर के अखबारों का योगदान रहा है, जो उनकी ऐतिहासिक समझ को दर्शाता है। वे राजनीति, अर्थव्यवस्था और अंतरराष्ट्रीय मामलों (Geopolitics) पर निरंतर लिखते रहे हैं। ‘आदर्श जीवन’ दैनिक में 5 साल का कार्यकाल और ‘अमर उजाला’ गोरखपुर में ट्रेनिंग रिपोर्टिंग के तौर पर मात्र 5 दिन काम क्या है उनकी लेखनी को और भी निखारता है।

Navneet Mishra

Navneet Mishra is a seasoned journalist currently associated with Nirbhik India and its digital portal, nirbhikindia.in. With over six years of experience across print and digital platforms, Navneet specializes in politics, sports, economics, and geopolitics. A Master’s graduate in Mass Communication from Deen Dayal Upadhyay Gorakhpur University, he is also a dedicated media scholar. His academic research focuses on "the pivotal role of Gorakhpur’s Hindi newspapers during the Indian freedom struggle against the British Crown". Before joining Nirbhik India, Navneet spent five years at Adarsh Jeevan and gained valuable field experience at Amar Ujala Gorakhpur as training reporter only for 5 days. ---------------------------------------------------------------------------------- नवनीत मिश्रा वर्तमान में 'निर्भीक इंडिया' मीडिया समूह से जुड़े हैं। उन्होंने दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन में मास्टर्स किया है। पत्रकारिता के अपने 6 वर्षों के सफर में उन्होंने प्रिंट और डिजिटल दोनों डेस्क पर काम किया है। उनके शोध का विषय ब्रिटिश शासन के खिलाफ गोरखपुर के अखबारों का योगदान रहा है, जो उनकी ऐतिहासिक समझ को दर्शाता है। वे राजनीति, अर्थव्यवस्था और अंतरराष्ट्रीय मामलों (Geopolitics) पर निरंतर लिखते रहे हैं। 'आदर्श जीवन' दैनिक में 5 साल का कार्यकाल और 'अमर उजाला' गोरखपुर में ट्रेनिंग रिपोर्टिंग के तौर पर मात्र 5 दिन काम क्या है उनकी लेखनी को और भी निखारता है।

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