Youth Speech Competition : छात्रों ने मंच पर भरी हुंकार
Youth Speech Competition बलरामपुर: नए भारत के निर्माण और युवाओं की वैचारिक क्षमता को निखारने के लिए मां पाटेश्वरी विश्वविद्यालय, बलरामपुर ने एक बड़ा मंच प्रदान किया है। प्रधानमंत्री के जन्मदिन के उपलक्ष्य में चल रहे ‘सेवा संकल्प अभियान’ के तहत सोमवार को विश्वविद्यालय परिसर में एक विशाल आशु संभाषण प्रतियोगिता का सफल आयोजन किया गया।

इस आशु संभाषण प्रतियोगिता में स्नातक (UG) और परास्नातक (PG) स्तर के दर्जनों छात्र-छात्राओं ने बिना किसी पूर्व तैयारी के मंच पर आकर अपनी हाजिरजवाबी और तर्कशक्ति का ऐसा शानदार प्रदर्शन किया, जिसने वहां मौजूद हर श्रोता और शिक्षक को मंत्रमुग्ध कर दिया।
Youth Speech Competition: 43 मेधावियों ने दिखाया वैचारिक दम
विश्वविद्यालय के अकादमिक ब्लॉक के भूतल स्थित अत्याधुनिक एलटी-3 (LT3) सभागार में इस बहुप्रतीक्षित आशु संभाषण प्रतियोगिता का आयोजन किया गया था। माननीय कुलपति प्रो. रवि शंकर सिंह के कुशल मार्गदर्शन और विजन के तहत आयोजित इस आशु संभाषण प्रतियोगिता में विश्वविद्यालय के विभिन्न विभागों के कुल 43 प्रतिभावान विद्यार्थियों ने पूरे उत्साह के साथ प्रतिभाग किया।
आशु संभाषण (Extempore) का मूल नियम यह होता है कि प्रतिभागियों को मंच पर आने के बाद तत्काल (On the spot) एक विषय दिया जाता है, जिस पर उन्हें तुरंत अपने विचार रखने होते हैं। इस आशु संभाषण प्रतियोगिता में भी ठीक ऐसा ही हुआ, जिससे छात्रों के मानसिक कौशल, शब्द भंडार और तात्कालिक चिंतन का असली परीक्षण देखने को मिला।
Youth Speech Competition के ज्वलंत मुद्दे और विषय
इस प्रतिष्ठित आशु संभाषण प्रतियोगिता में आयोजकों ने बेहद ज्वलंत और राष्ट्रीय महत्व के विषय रखे थे। जैसे ही छात्रों को ये विषय मिले, उन्होंने तर्कपूर्ण और प्रभावी ढंग से अपनी बेबाक बात रखी। इस आशु संभाषण प्रतियोगिता के मुख्य विषय रहे:
- नव भारत निर्माण में युवाओं की अहम भूमिका
- सामाजिक समरसता और सशक्त भारत का विजन
- समग्र विकास और पर्यावरण संरक्षण की जरूरत
- डिजिटल नागरिकता और बढ़ता भारतीय राष्ट्रवाद
- विरासत के संरक्षण द्वारा औपनिवेशिक मानस से मुक्ति
इन विषयों पर बोलते हुए इस आशु संभाषण प्रतियोगिता के प्रतिभागियों ने युवाशक्ति को राष्ट्र निर्माण की असली धुरी बताया। छात्रों ने सामाजिक एकता, पर्यावरण संतुलन, और डिजिटल दायित्व के संरक्षण पर पूरी स्पष्टता से अपने विचार व्यक्त किए।
निर्णायक और मूल्यांकन
किसी भी बड़ी अकादमिक प्रतियोगिता की तरह इस आशु संभाषण प्रतियोगिता में भी निष्पक्ष मूल्यांकन के लिए एक बेहद अनुभवी निर्णायक मंडल (Jury) का गठन किया गया था। इस आशु संभाषण प्रतियोगिता के निर्णायक मंडल में डॉ. अवनीश कुमार सिंह, डॉ. राजश्री कमल, डॉ. शांतनु सिंह तथा सुश्री सोनल पांडे ने अपनी अहम भूमिका निभाई।
निर्णायकों ने इस आशु संभाषण प्रतियोगिता में छात्रों का मूल्यांकन मुख्य रूप से चार कड़े मापदंडों पर किया: विषय की त्वरित समझ, परिष्कृत भाषा व शैली, मंच पर आत्मविश्वास (Body Language) एवं समग्र प्रस्तुति कौशल (Presentation Skills)।
छात्रों के जीवन में क्या महत्व है?
लोग अक्सर इंटरनेट पर सर्च करते हैं कि विश्वविद्यालयों में आशु संभाषण या Youth Speech Competition जैसे आयोजन क्यों जरूरी हैं।
कार्यक्रम के आयोजकों और शिक्षाविदों का स्पष्ट मानना है कि आज के प्रतिस्पर्धी युग में सिर्फ किताबी ज्ञान पर्याप्त नहीं है। इस तरह की आशु संभाषण प्रतियोगिता विद्यार्थियों के भीतर छिपी नेतृत्व क्षमता (Leadership Qualities), वैचारिक स्पष्टता (Thought Clarity) और आत्मविश्वास को विकसित करने में ‘बूस्टर डोज’ का काम करती हैं।
यह आशु संभाषण प्रतियोगिता युवाओं को राष्ट्रीय मुद्दों पर गहराई से सोचने और अपनी बात बेबाकी व प्रभावी ढंग से पब्लिक के सामने रखने का एक मजबूत मंच प्रदान करती है। कार्यक्रम के समापन पर बड़ी संख्या में उपस्थित विश्वविद्यालय के शिक्षकों और विद्यार्थियों ने तालियों की गड़गड़ाहट से इस आशु संभाषण प्रतियोगिता के सभी 43 प्रतिभागियों का उत्साहवर्धन किया और देश के प्रति उनके बौद्धिक नजरिए की जमकर सराहना की।

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