Budget Friendly Nutrition: VC का नया विजन
बलरामपुर: मां पाटेश्वरी राज्य विश्वविद्यालय के स्कूल ऑफ होम साइंस एंड कम्युनिटी स्टडीज द्वारा राष्ट्रीय पोषण माह 2026 के उपलक्ष्य में बजट अनुकूल पोषण (Budget Friendly Nutrition) विषय पर एक दिवसीय राज्य स्तरीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया।

“Power of Local Produce Food, Budget Friendly Nutrition for Healthy Life” शीर्षक पर आयोजित इस ज्ञानवर्धक संगोष्ठी का मुख्य उद्देश्य छात्र-छात्राओं को महंगे विदेशी उत्पादों के भ्रमजाल से बाहर निकालकर स्थानीय एवं मौसमी खाद्य पदार्थों के जरिए संतुलित आहार सुनिश्चित करने के प्रति जागरूक करना था।
कार्यक्रम की अध्यक्षता विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. रवि शंकर सिंह ने की, जबकि कृषि विज्ञान केंद्र गोंडा की विशेषज्ञ श्रीमती ममता त्रिपाठी एवं जिला उद्यान अधिकारी रश्मि शर्मा ने मुख्य वक्ता के रूप में तकनीकी मार्गदर्शन दिया।
स्वस्थ जीवन के लिए बजट अनुकूल पोषण (Budget Friendly Nutrition) का विज्ञान
संगोष्ठी में कृषि विज्ञान केंद्र (गोपाल ग्राम, गोंडा) दीनदयाल शोध संस्थान की गृह विज्ञान विषय विशेषज्ञ श्रीमती ममता त्रिपाठी और जिला उद्यान अधिकारी रश्मि शर्मा ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए आधुनिक खानपान की भ्रांतियों पर विस्तार से चर्चा की। वक्ताओं ने स्पष्ट किया कि सेहतमंद रहने के लिए महंगे डिब्बाबंद सप्लीमेंट्स या विदेशी ‘सुपरफूड्स’ की कोई अनिवार्यता नहीं है।
धरातलीय स्तर पर बजट अनुकूल पोषण (Budget Friendly Nutrition) को अपनाकर कोई भी सामान्य परिवार संपूर्ण पोषक तत्व प्राप्त कर सकता है। विशेषज्ञों ने रेखांकित किया कि स्थानीय स्तर पर उगाई जाने वाली सहजन (मोरिंगा), आंवला, अमरूद, मौसमी हरी पत्तेदार सब्जियां और पारंपरिक मोटे अनाज (मिलेट्स) विदेशी उत्पादों की तुलना में कहीं अधिक ताजे और पौष्टिक होते हैं।
जब खाद्य पदार्थ स्थानीय खेतों से सीधे थाली तक पहुंचते हैं, तो उनके प्राकृतिक विटामिन्स, मिनरल्स और फाइबर नष्ट नहीं होते। वक्ताओं ने विद्यार्थियों को दैनिक थाली में इंद्रधनुषी विविधता (विभिन्न रंगों की मौसमी सब्जियां) शामिल करने की वैज्ञानिक विधि समझाई।
वोकल फॉर लोकल: बजट अनुकूल पोषण (Budget Friendly Nutrition) और कृषि अर्थव्यवस्था
अध्यक्षीय उद्बोधन में कुलपति प्रो. रवि शंकर सिंह ने पोषण को केवल जैविक आवश्यकता तक सीमित न रखते हुए इसे व्यापक सामाजिक एवं आर्थिक दृष्टिकोण से जोड़ा। उन्होंने कहा कि बजट अनुकूल पोषण (Budget Friendly Nutrition) का सीधा संबंध किसानों की समृद्धि और आत्मनिर्भर भारत के संकल्प से है। स्थानीय खाद्य उत्पाद न केवल जनसामान्य के स्वास्थ्य की रक्षा करते हैं, बल्कि वे ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ भी हैं।
प्रो. सिंह ने विद्यार्थियों और शोधार्थियों से आह्वान किया कि वे तराई अंचल के विशिष्ट कृषि उत्पादों को नवाचार, आधुनिक फूड प्रोसेसिंग और पैकेजिंग तकनीकों से जोड़ें। उन्होंने कहा कि आज आवश्यकता इस बात की है कि हमारे पारंपरिक पोषक खाद्य पदार्थों को राष्ट्रीय व वैश्विक बाजार उपलब्ध कराया जाए।
यदि युवा उद्यमी स्थानीय उपज की ब्रांडिंग और वैल्यू एडिशन पर कार्य करेंगे, तो एक तरफ समाज को किफायती दर पर शुद्ध पोषण मिलेगा, वहीं दूसरी ओर स्थानीय किसानों व उत्पादकों के लिए आजीविका और रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे।
बजट अनुकूल पोषण (Budget Friendly Nutrition) में स्थानीय उपज क्यों बेहतर है? (People Also Search For)
इंटरनेट पर लोग अक्सर यह खोजते हैं कि महंगे सप्लीमेंट्स के मुकाबले स्थानीय और मौसमी फल-सब्जियों का चयन क्यों अधिक लाभकारी है।
आहार विशेषज्ञों के अनुसार, लंबी दूरी से आयातित फल और सब्जियों को कृत्रिम रसायनों और प्रिजर्वेटिव्स के जरिए सुरक्षित रखा जाता है, जिससे उनकी पोषण गुणवत्ता घट जाती है। इसके विपरीत, स्थानीय स्तर पर उत्पादित बजट अनुकूल पोषण (Budget Friendly Nutrition) युक्त खाद्य पदार्थ ताजे होते हैं।
क्षेत्रीय जलवायु के अनुसार मानव शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता (इम्यूनिटी) को स्वाभाविक रूप से मजबूत करते हैं। मौसमी भोजन का नियमित सेवन पाचन तंत्र को दुरुस्त रखता है और जीवनशैली जनित बीमारियों (जैसे मोटापा, मधुमेह और उच्च रक्तचाप) से बचाव में अत्यंत प्रभावी सिद्ध होता है।
राष्ट्रीय पोषण माह 2026 और युवाओं की सामाजिक जिम्मेदारी (People Also Search For)
गूगल पर नागरिक यह भी सर्च करते हैं कि राष्ट्रीय पोषण माह का मुख्य लक्ष्य क्या है और शैक्षणिक संस्थान इसमें क्या भूमिका निभा रहे हैं।
देशभर में कुपोषण उन्मूलन और संतुलित जीवनशैली को जन-आंदोलन बनाने के उद्देश्य से यह अभियान संचालित किया जा रहा है। विश्वविद्यालय स्तर पर इस तरह के आयोजनों का उद्देश्य छात्र-छात्राओं को ‘पोषण दूत’ के रूप में तैयार करना है, ताकि वे अपने परिवार और ग्रामीण परिवेश में वैज्ञानिक खानपान की संस्कृति का प्रचार-प्रसार कर सकें।
इस महत्वपूर्ण संगोष्ठी का सफल समन्वयन दिशिता सिंह द्वारा किया गया, जबकि संचालन डॉ. रमा मौर्या ने कुशलतापूर्वक संपन्न किया। इस दौरान गृह विज्ञान एवं सामुदायिक अध्ययन संकाय के प्राध्यापक, शोधार्थी और भारी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित रहे, जिन्होंने स्थानीय पोषण स्रोतों को अपनी दिनचर्या का अभिन्न हिस्सा बनाने का संकल्प लिया।

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Navneet Mishra is a seasoned journalist currently associated with Nirbhik India and its digital portal, nirbhikindia.in. With over six years of experience across print and digital platforms, Navneet specializes in politics, sports, economics, and geopolitics.
A Master’s graduate in Mass Communication from Deen Dayal Upadhyay Gorakhpur University, he is also a dedicated media scholar. His academic research focuses on “the pivotal role of Gorakhpur’s Hindi newspapers during the Indian freedom struggle against the British Crown”. Before joining Nirbhik India, Navneet spent five years at Adarsh Jeevan and gained valuable field experience at Amar Ujala Gorakhpur as training reporter only for 5 days.
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नवनीत मिश्रा वर्तमान में ‘निर्भीक इंडिया’ मीडिया समूह से जुड़े हैं। उन्होंने दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन में मास्टर्स किया है। पत्रकारिता के अपने 6 वर्षों के सफर में उन्होंने प्रिंट और डिजिटल दोनों डेस्क पर काम किया है। उनके शोध का विषय ब्रिटिश शासन के खिलाफ गोरखपुर के अखबारों का योगदान रहा है, जो उनकी ऐतिहासिक समझ को दर्शाता है। वे राजनीति, अर्थव्यवस्था और अंतरराष्ट्रीय मामलों (Geopolitics) पर निरंतर लिखते रहे हैं। ‘आदर्श जीवन’ दैनिक में 5 साल का कार्यकाल और ‘अमर उजाला’ गोरखपुर में ट्रेनिंग रिपोर्टिंग के तौर पर मात्र 5 दिन काम क्या है उनकी लेखनी को और भी निखारता है।

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