साइबर फ्रॉड रिफंड (Cyber Fraud Refund) से पीड़ितों को राहत
गोरखपुर निर्भीक इंडिया ब्यूरो : साइबर फ्रॉड रिफंड (Cyber Fraud Refund) को लेकर चिलुआताल थाना पुलिस और साइबर सेल की टीम ने डिजिटल ठगी और भूलवश हुए गलत लेनदेन के मामलों में बड़ी सफलता हासिल की है।

अक्टूबर माह के पहले पखवाड़े (01 से 15 अक्टूबर, 2026) के दौरान पुलिस टीम ने त्वरित तकनीकी कार्रवाई करते हुए कुल 10 पीड़ितों के खातों में ₹89,439.52 (नवासी हजार चार सौ उन्चालीस रुपये बावन पैसे) की डूबी हुई धनराशि सफलतापूर्वक वापस करा दी है, जिससे साइबर फ्रॉड रिफंड की यह पहल अन्य थानों के लिए नजीर बन गई है।
निर्भीक इंडिया (Nirbhik India) की विशेष रिपोर्ट के अनुसार, चिलुआताल पुलिस साइबर सेल (Chiluatal Police Cyber Cell) ने भारत सरकार के गृह मंत्रालय द्वारा संचालित एनसीआरपी पोर्टल (NCRP Cyber Crime Portal 1930) और अत्याधुनिक एमआरएम पोर्टल (Money Restoration Module MRM Portal) के जरिए संबंधित बैंकों से रीयल-टाइम समन्वय स्थापित कर इन पैसों को जालसाजों के खातों में फ्रीज कराया और विधिक प्रक्रिया पूरी कर पीड़ितों के खातों में रिफंड कराया, ताकि साइबर फ्रॉड रिफंड की प्रक्रिया बिना किसी कानूनी अड़चन के पूरी हो सके।
साइबर फ्रॉड रिफंड (Cyber Fraud Refund): एनसीआरपी और एमआरएम पोर्टल से 10 पीड़ितों को मिले ₹89,439
डिजिटल लेनदेन के इस दौर में साइबर ठग रोज नए-नए हथकंडे अपनाकर लोगों की गाढ़ी कमाई उड़ा रहे हैं। वहीं कई मामलों में आम नागरिक जल्दबाजी में गलत यूपीआई आईडी पर पैसा ट्रांसफर कर बैठते हैं।
चिलुआताल पुलिस की साइबर हेल्पडेस्क ने दोनों तरह की शिकायतों पर बिना समय गंवाए ‘गोल्डन ऑवर’ (Golden Hour) में एक्शन लिया। जिन 10 पीड़ितों को साइबर फ्रॉड रिफंड (Cyber Fraud Refund) मिला है, उनकी पूरी सूची इस प्रकार है, जो साइबर फ्रॉड रिफंड (Cyber Fraud Refund) की सफलता को प्रमाणित करती है:
- ₹25,000/- रिफंड: एक महिला आवेदिका द्वारा यूपीआई (UPI) से भुगतान करते समय भूलवश एक गलत यूपीआई आईडी दर्ज हो गई थी, जिसे साइबर सेल ने तकनीकी हस्तक्षेप से वापस कराया।
- ₹13,253/- रिफंड: आवेदक द्वारा ऑनलाइन बिल या खरीददारी के भुगतान के दौरान तकनीकी त्रुटि व असावधानीवश वास्तविक देय राशि से अधिक धनराशि ट्रांसफर हो गई थी, जिसे बैंक से संपर्क कर रिफंड कराया गया।
- ₹13,059.07/- रिफंड: अस्पताल का फर्जी नंबर गूगल पर खोजने के दौरान हुई ठगी की पूरी रकम बरामद की गई।
- ₹12,208/- रिफंड: फेसबुक पर फर्जी लोन ऐप डाउनलोड करने के बाद खाते से कटी रकम वापस कराई गई, जिससे साइबर फ्रॉड रिफंड के तहत ब्लैकमेलिंग के इस मामले में पीड़ित को बड़ी राहत मिली।
- ₹10,044.86/- रिफंड: जमीन पर मोबाइल टावर लगवाने और लाखों रुपये मासिक किराया दिलाने का झांसा देकर की गई ऑनलाइन धोखाधड़ी की रकम पीड़ित को वापस मिली।
- ₹8,390.67/- रिफंड: मोबाइल फोन रिमोटली हैक कर यूपीआई के माध्यम से किए गए अनधिकृत ऑनलाइन फ्रॉड की राशि रिकवर कराई गई।
- ₹4,000/- रिफंड: जालसाज द्वारा फर्जी परिचित या रिश्तेदार बनकर इमरजेंसी के नाम पर ठगी गई रकम खाते में वापस कराई गई, जिससे साइबर फ्रॉड रिफंड का दायरा हर तरह की ऑनलाइन ठगी तक पहुंच गया।
- ₹1,508/- रिफंड: आवेदक द्वारा गलत यूपीआई आईडी पर भेजी गई धनराशि वापस कराई गई।
- ₹1,179.82/- रिफंड: पीड़ित के सगे रिश्तेदार (जीजा जी) की फर्जी फेसबुक प्रोफाइल बनाकर मांगे गए पैसों की ठगी का खुलासा कर रकम वापस कराई गई।
- ₹796.10/- रिफंड: भूलवश अन्य यूपीआई खाते में ट्रांसफर हुई छोटी धनराशि को भी पुलिस ने गंभीरता से लेते हुए रिफंड कराया।
साइबर फ्रॉड रिफंड (Cyber Fraud Refund): अस्पताल के फर्जी नंबर और फ्रॉड से बचाव
इस अभियान में सबसे चौंकाने वाला मामला गूगल सर्च इंजन पर अस्पताल का नंबर खोजने से जुड़ा था। एक पीड़ित ने गोरखपुर के एक प्रतिष्ठित अस्पताल में डॉक्टर का अपॉइंटमेंट लेने के लिए गूगल पर सर्च किया।
सर्च रिजल्ट में जालसाज द्वारा दर्ज किया गया फर्जी नंबर आ गया। कॉल करने पर आरोपी ने खुद को अस्पताल का आधिकारिक कर्मचारी बताया और अपॉइंटमेंट फीस के नाम पर व्हाट्सएप पर एक एपीके (APK) फाइल भेजी।
जैसे ही पीड़ित ने उस फाइल को इंस्टॉल किया, उसका पूरा मोबाइल हैक हो गया और खाते से ₹13,059.07 कट गए, जिसके बाद साइबर फ्रॉड रिफंड के लिए पुलिस से गुहार लगाई गई। पीड़ित ने तत्काल चिलुआताल साइबर सेल से संपर्क किया, जिसके बाद पुलिस ने बैंक के नोडल अधिकारी से समन्वय कर खाते को ब्लॉक कराकर साइबर फ्रॉड रिफंड (Cyber Fraud Refund) सुनिश्चित कराया।
साइबर फ्रॉड रिफंड (Cyber Fraud Refund) में फर्जी लोन ऐप और एआई न्यूड फोटो ब्लैकमेलिंग का शिकार
डिजिटल फ्रॉड का दूसरा सबसे खतरनाक मामला फेसबुक विज्ञापनों से जुड़े फर्जी लोन ऐप का था। एक पीड़ित ने फेसबुक पर कम ब्याज दर पर तुरंत लोन का विज्ञापन देखकर ऐप डाउनलोड किया।
ऐप डाउनलोड करते ही उसने मोबाइल के कॉन्टैक्ट्स और गैलरी का अनधिकृत एक्सेस ले लिया। इसके बाद बिना लोन दिए खाते से ₹12,208 काट लिए गए और पीड़ित के व्हाट्सएप पर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) द्वारा मॉर्फ की गई अश्लील (न्यूड) फोटो भेजकर ब्लैकमेल किया जाने लगा।
पीड़ित की शिकायत पर चिलुआताल साइबर टीम ने तत्परता दिखाते हुए लेन-देन को इंटरसेप्ट किया और पैसे फ्रीज कराकर पीड़ित को सुरक्षित वापस दिलाए, जिससे साइबर फ्रॉड रिफंड की कार्रवाई पूरी हुई।
साइबर फ्रॉड रिफंड (Cyber Fraud Refund) के तहत रिश्तेदार की फर्जी फेसबुक आईडी और टावर ठगी का पर्दाफाश
सोशल मीडिया पर पहचान की चोरी (Identity Theft) और खाली जमीन पर मोबाइल टावर लगाने का लालच देकर ठगी के मामलों में भी साइबर सेल ने त्वरित न्याय दिलाया:
- फर्जी रिश्तेदार घोटाला: जालसाज ने पीड़ित के जीजा जी की हूबहू फेसबुक आईडी बनाकर प्रोफाइल फोटो लगाई और मैसेंजर पर खुद को गंभीर संकट में बताकर ₹1,179.82 ट्रांसफर करा लिए। बाद में जब जीजा जी से फोन पर बात हुई तो ठगी का पता चला।
- मोबाइल टावर इंस्टॉलेशन फ्रॉड: घर की छत पर जियो या एयरटेल का टावर लगवाने और अग्रिम ₹25 लाख देने का लालच देकर पंजीकरण शुल्क के नाम पर ₹10,044.86 ऐंठे गए थे। पुलिस ने उस मर्चेंट अकाउंट को सीज कराकर पूरी धनराशि रिफंड कराई, जो साइबर फ्रॉड रिफंड का एक उत्कृष्ट उदाहरण है।
साइबर फ्रॉड रिफंड (Cyber Fraud Refund): चिलुआताल पुलिस की 6 सदस्यीय साइबर टीम की तत्परता
चिलुआताल थाने की साइबर टीम ने यह साबित किया है कि यदि पीड़ित समय पर सूचना दे, तो तकनीकी टूल्स की मदद से हर एक रुपया वापस कराया जा सकता है। इस टीम में निम्नलिखित पुलिस अधिकारी शामिल रहे, जिन्होंने साइबर फ्रॉड रिफंड (Cyber Fraud Refund) को धरातल पर उतारा:
| पुलिस अधिकारी / कर्मी | पदनाम एवं दायित्व |
| श्री सूरज सिंह | थानाध्यक्ष, थाना चिलुआताल |
| श्री सच्चिदानन्द पाण्डेय | उप-निरीक्षक एवं साइबर नोडल अधिकारी |
| सुश्री अन्जना कुशवाहा | उप-निरीक्षक, थाना चिलुआताल |
| श्री पंकज कुमार पाण्डेय | आरक्षी, साइबर सेल हेल्पडेस्क |
| श्री विवेक चौरसिया | आरक्षी, साइबर सेल हेल्पडेस्क |
| श्री सचिन कुमार | आरक्षी, साइबर सेल हेल्पडेस्क |
साइबर फ्रॉड होने पर पैसा वापस पाने के 5 महत्वपूर्ण चरण
निर्भीक इंडिया (Nirbhik India) अपने पाठकों को सलाह देता है कि ऑनलाइन ठगी या गलत यूपीआई ट्रांसफर होने पर तुरंत ये कदम उठाएं, ताकि समय रहते साइबर फ्रॉड रिफंड (Cyber Fraud Refund) की प्रक्रिया शुरू की जा सके:
- गोल्डन ऑवर में कॉल करें (1930): धोखाधड़ी होते ही पहले 2 घंटे के भीतर राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर कॉल करें ताकि पैसा आगे ट्रांसफर न हो सके।
- पोर्टल पर शिकायत दर्ज करें: आधिकारिक वेबसाइट
cybercrime.gov.inपर जाकर अपनी शिकायत, ट्रांजैक्शन आईडी, बैंक स्टेटमेंट और स्क्रीनशॉट अपलोड करें।
- एमआरएम पोर्टल (MRM) रिक्वेस्ट: पैसा फ्रीज होने के बाद ‘मनी रेस्टोरेशन मॉड्यूल’ पर क्लेम फाइल करें।
- संबंधित बैंक को सूचित करें: अपने बैंक के कस्टमर केयर और नजदीकी शाखा को लिखित में अनधिकृत ट्रांजैक्शन की सूचना देकर खाता ब्लॉक कराएं।
- गलत यूपीआई ट्रांसफर में एनपीसीआई (NPCI): भूलवश दूसरे खाते में पैसा जाने पर
npci.org.inके डिस्प्यूट रिड्रेसल मैकेनिज्म में जाकर ‘Incorrectly transferred to another account’ विकल्प चुनें।
साइबर ठगी और पैसा वापस पाने से जुड़े अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (People Also Ask)
प्र. 1: गलत यूपीआई आईडी पर पैसा चला जाए तो क्या वह वापस मिल सकता है?
उत्तर: हां, यदि आपने गलती से किसी गलत यूपीआई आईडी पर पैसा भेज दिया है, तो तत्काल अपने बैंक, संबंधित यूपीआई ऐप (PhonePe/GooglePay/Paytm) और NPCI पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराएं। चिलुआताल पुलिस ने ऐसे 4 मामलों में शत-प्रतिशत धनराशि वापस कराई है।
प्र. 2: एमआरएम (Money Restoration Module) पोर्टल क्या है?
उत्तर: केंद्रीय गृह मंत्रालय के I4C प्रभाग द्वारा शुरू किया गया एमआरएम पोर्टल साइबर अपराध पीड़ितों के फ्रीज किए गए पैसों को अदालत और बैंक के समन्वय से सीधे पीड़ित के बैंक खाते में रिफंड कराने का आधिकारिक डिजिटल प्लेटफॉर्म है।
प्र. 3: व्हाट्सएप पर अनजान एपीके (APK) फाइल डाउनलोड करने से क्या खतरा है?
उत्तर: किसी भी अनजान स्रोत से प्राप्त APK फाइल वास्तव में स्पाइवेयर या ट्रोजन वायरस होती है। इसे इंस्टॉल करते ही जालसाज आपके मोबाइल स्क्रीन, एसएमएस, ओटीपी और बैंक पासवर्ड का लाइव एक्सेस हासिल कर लेते हैं।
प्र. 4: फर्जी लोन ऐप से ब्लैकमेलिंग होने पर क्या करें?
उत्तर: ऐसे किसी भी ऐप को तुरंत अनइंस्टॉल करें, ब्लैकमेलर्स को एक भी पैसा न दें, उनकी कॉल और मैसेज के स्क्रीनशॉट सुरक्षित रखें और नजदीकी साइबर थाने या 1930 पर तत्काल शिकायत दर्ज कराएं।
साइबर फ्रॉड रिफंड (Cyber Fraud Refund) की यह त्वरित कार्रवाई आम जनता में डिजिटल सुरक्षा और पुलिसिंग के प्रति गहरा विश्वास जगाती है। निर्भीक इंडिया (Nirbhik India) सभी नागरिकों से अपील करता है कि अनजान लिंक, लुभावने लोन ऐप और गूगल पर दिखने वाले अनवेरिफाइड कस्टमर केयर नंबरों से हमेशा सावधान रहें।

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Navneet Mishra is a seasoned journalist currently associated with Nirbhik India and its digital portal, nirbhikindia.in. With over six years of experience across print and digital platforms, Navneet specializes in politics, sports, economics, and geopolitics.
A Master’s graduate in Mass Communication from Deen Dayal Upadhyay Gorakhpur University, he is also a dedicated media scholar. His academic research focuses on “the pivotal role of Gorakhpur’s Hindi newspapers during the Indian freedom struggle against the British Crown”. Before joining Nirbhik India, Navneet spent five years at Adarsh Jeevan and gained valuable field experience at Amar Ujala Gorakhpur as training reporter only for 5 days.
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नवनीत मिश्रा वर्तमान में ‘निर्भीक इंडिया’ मीडिया समूह से जुड़े हैं। उन्होंने दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन में मास्टर्स किया है। पत्रकारिता के अपने 6 वर्षों के सफर में उन्होंने प्रिंट और डिजिटल दोनों डेस्क पर काम किया है। उनके शोध का विषय ब्रिटिश शासन के खिलाफ गोरखपुर के अखबारों का योगदान रहा है, जो उनकी ऐतिहासिक समझ को दर्शाता है। वे राजनीति, अर्थव्यवस्था और अंतरराष्ट्रीय मामलों (Geopolitics) पर निरंतर लिखते रहे हैं। ‘आदर्श जीवन’ दैनिक में 5 साल का कार्यकाल और ‘अमर उजाला’ गोरखपुर में ट्रेनिंग रिपोर्टिंग के तौर पर मात्र 5 दिन काम क्या है उनकी लेखनी को और भी निखारता है।

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