Daayra Movie Review : इंसाफ या एनकाउंटर का खूनी सच?

- फिल्म का नाम: दायरा (Daayra)
- श्रेणी (Genre): इन्वेस्टिगेटिव क्राइम-ड्रामा, सस्पेंस थ्रिलर
- निर्देशक (Director): मेघना गुलजार (Meghna Gulzar)
- निर्माता (Producer): विनीत जैन, धवल जैन (जंगली पिक्चर्स और पेन स्टूडियोज)
- रिलीज़ की तारीख: 18 सितंबर 2026
- सेंसर बोर्ड प्रमाणन: ‘A’ (केवल वयस्कों के लिए)
- रेटिंग (Rating): ⭐⭐⭐ (3/5 स्टार) [आधार: IMDb (6.8/10), Rotten Tomatoes (64%), Google Reviews (70%)]
- उपलब्धता / कहाँ देखें: भारत भर के सिनेमाघरों में (हिंदी व मलयालम) | OTT रिलीज़ बाद में
- मुख्य कलाकार (Cast): करीना कपूर खान (DCP अजूनी कोहली), पृथ्वीराज सुकुमारन (DCP रमन कुमार), कंवलजीत सिंह, अचिंत कौर, क्षिती जोग, प्रगति मिश्रा
Daayra Movie Review : फिल्म दायरा की समीक्षा: कहानी सारांश
हैदराबाद में घटित एक वास्तविक जघन्य सामूहिक दुष्कर्म और उसके बाद हुए चर्चित पुलिस एनकाउंटर की पृष्ठभूमि पर रची गई फिल्म ‘दायरा’ न्याय व्यवस्था के सबसे संवेदनशील पहलू को कुरेदती है। इस पूरे कथानक का केंद्र बिंदु वह खौफनाक अपराध है, जिसके बाद पूरा देश सड़कों पर उतरकर आरोपियों को तुरंत मौत के घाट उतारने की मांग करने लगता है।
जनता के इस बेकाबू आक्रोश और राजनीतिक दबाव के बीच पुलिस महकमे के दो सबसे तेज-तर्रार और प्रभावशाली अधिकारी आमने-सामने खड़े हो जाते हैं। एक तरफ हैं डीसीपी रमन कुमार (पृथ्वीराज सुकुमारन), जो जनता की नब्ज को पहचानते हुए ‘त्वरित न्याय’ (Instant Justice) और ऑन-द-स्पॉट एनकाउंटर को ही ऐसे दरिंदों का एकमात्र इलाज मानते हैं।
वहीं दूसरी ओर, कानून की मर्यादा और संविधान के दायरे में रहकर सच सामने लाने का जिम्मा उठाती हैं डीसीपी अजूनी कोहली (करीना कपूर खान)। अजूनी का मानना है कि यदि रक्षक ही भक्षक बनकर कानून को अपने हाथ में ले लेंगे, तो व्यवस्था और अपराधियों में कोई फर्क नहीं रह जाएगा।
दायरा मूवी रिव्यू (Daayra Movie Review) में असली तनाव तब शुरू होता है जब संदिग्धों को सीन रिक्रिएशन के बहाने ले जाकर उनका एनकाउंटर कर दिया जाता है। इस एनकाउंटर को जहां मीडिया और जनता में ‘इंसाफ’ बताकर जश्न मनाया जाता है, वहीं अजूनी को इस पूरी कहानी में गहरी साजिश और सबूतों को मिटाने की बू आती है।
अजूनी जब इस मुठभेड़ की आंतरिक जांच शुरू करती हैं, तो उनके सामने खाकी वर्दी, राजनीति और न्यायपालिका का ऐसा नापाक गठजोड़ आता है जो रोंगटे खड़े कर देता है। क्या वे संदिग्ध वास्तव में मुख्य दोषी थे या उन्हें किसी रसूखदार को बचाने के लिए मौत के घाट उतारा गया? क्या अजूनी व्यवस्था के इस चक्रव्यूह को भेदकर असली गुनहगारों को कानून के कटघरे में खड़ा कर पाएंगी? यही इस गंभीर थ्रिलर का मुख्य सार है।
Daayra Movie Review फिल्म दायरा की समीक्षा
‘तलवार’ और ‘राज़ी’ जैसी शानदार फिल्में देने वाली मेघना गुलजार ने एक बार फिर एक बेहद असहज और सुलगते हुए सामाजिक विषय पर हाथ आजमाया है। समीक्षा पोर्टल्स और दर्शकों के रिस्पॉन्स की बात करें तो दायरा मूवी रिव्यू (Daayra Movie Review) को मिला-जुला लेकिन सम्मानजनक रिस्पॉन्स मिला है।
आईएमडीबी (IMDb) पर इसे 6.8/10 की रेटिंग प्राप्त हुई है, जबकि रॉटेन टोमेटोज़ (Rotten Tomatoes) पर आलोचकों ने इसे 64% का स्कोर दिया है। वहीं, गूगल रिव्यूज़ (Google Reviews) में लगभग 70% दर्शकों ने इसे एक विचारोत्तेजक और साहसी फिल्म बताया है।
फिल्म की सबसे बड़ी खूबी यह है कि यह ‘सिंघम’ या ‘दबंग’ जैसे कमर्शियल सिनेमा के महिमामंडित एनकाउंटर कल्चर पर कड़ा तमाचा जड़ती है। यह दिखाती है कि जब भीड़ इंसाफ की मांग करती है, तो व्यवस्था कैसे अपनी नाकामियों को छुपाने के लिए शॉर्टकट अपनाती है।
अभिनय के स्तर पर पृथ्वीराज सुकुमारन ने डीसीपी रमन कुमार के आक्रामक, दबंग और अड़ियल रुख को बेहद संजीदगी से स्क्रीन पर उतारा है। करीना कपूर खान ने डीसीपी अजूनी के शांत, संयमित लेकिन दृढ़ निश्चयी रूप में बेहतरीन संतुलन साधा है। दोनों मंझे हुए कलाकारों के बीच की तल्ख वैचारिक नोकझोंक फिल्म को ऊंचाई देती है।
हालांकि, फिल्म की गति सेकंड हाफ में आकर बुरी तरह लड़खड़ाती है। कोर्टरूम ड्रामा और कानूनी दलीलों के लंबे सीन्स कहानी की थ्रिलर ग्रिप को ढीला कर देते हैं। मेघना गुलजार विषय को निष्पक्ष रखने के चक्कर में स्क्रीनप्ले को इतना अधिक उपदेशात्मक और वैचारिक बना देती हैं कि आम दर्शक कहानी से भावनात्मक रूप से कटने लगता है।
इसके अलावा, करीना कपूर के किरदार को जितना मजबूत दिखाया गया है, उस अनुपात में उन्हें स्क्रीन टाइम थोड़ा कम मिला है। यदि संपादन टेबल पर 10-15 मिनट की कैंची चलाई गई होती, तो यह एक बेहद धारदार थ्रिलर साबित होती। इसके बावजूद, यह फिल्म अपनी प्रासंगिकता और बेबाक सवाल खड़े करने के साहस के लिए तारीफ की हकदार है।
दायरा मूवी रिव्यू (Daayra Movie Review): छायांकन, निर्देशन और उपकरण
मेघना गुलजार का निर्देशन परिपक्व और बनावटी मेलोड्रामा से पूरी तरह मुक्त है। उन्होंने पुलिस सिस्टम की अंदरूनी राजनीति और फॉरेंसिक जांच की बारीकियों को बहुत ही यथार्थवादी नजरिए से पेश किया है। सिनेमैटोग्राफर सौरभ गोस्वामी ने इस डार्क टोन को बहुत खूबसूरती से उभारा है। म्यूटेड कलर पैलेट, प्राकृतिक रोशनी और किरदारों के मानसिक तनाव को पकड़ने वाले इंटेंस क्लोज-अप शॉट्स फिल्म को एक अंतरराष्ट्रीय सिनेमाई अहसास देते हैं।
वास्तविक लोकेशंस पर शूट होने के कारण दृश्यों में एक स्वाभाविक कच्चापन दिखता है। वहीं, चारू श्री रॉय और मेघना का संपादन पहले हाफ में तो चुस्त है, लेकिन दूसरे हाफ के कानूनी हिस्सों में थोड़ा खिंचा हुआ महसूस होता है। बैकग्राउंड स्कोर बैकफुट पर रहकर तनाव को धीरे-धीरे बढ़ाता है।
Daayra Movie Review: इसे क्यों देखें / न देखें
- क्यों देखें:
- करीना और पृथ्वीराज की ऑन-स्क्रीन टक्कर: दो शीर्ष कलाकारों के बीच की कड़क स्क्रीन प्रेजेंस और वैचारिक भिड़ंत देखने लायक है।
- फर्जी एनकाउंटर बनाम कानूनी प्रक्रिया: त्वरित न्याय की अंधी मांग और मानवाधिकारों की रक्षा पर आधारित एक गंभीर व आंखें खोलने वाला सिनेमा।
- मेघना गुलजार का यथार्थवादी दृष्टिकोण: बिना किसी लाउड ड्रामे, फूहड़ एक्शन या बेवजह के गानों के सच्ची घटना पर बनी एक प्रामाणिक जांच गाथा।
- क्यों न देखें:
- धीमा और उपदेशात्मक दूसरा हाफ: मध्यांतर के बाद कोर्टरूम की कानूनी बहसों और तकनीकी शब्दावली के कारण फिल्म की गति काफी सुस्त पड़ जाती है।
- कमर्शियल मसालों की गैरमौजूदगी: यदि आप तेज रफ्तार एक्शन, सीटियां बजाने वाले वन-लाइनर्स या नाच-गाने की उम्मीद कर रहे हैं, तो यह गंभीर ड्रामा आपको बोर कर सकता है।
- संवेदनशील और वयस्क विषय: जघन्य अपराध और डार्क थीम होने के कारण यह फिल्म बच्चों या हल्के-फुल्के पारिवारिक मनोरंजन के लिए उपयुक्त नहीं है (‘A’ रेटेड)।
📺 कहाँ और कैसे देखें (Where to Watch & Availability):
- थिएटर्स / सिनेमाघर: यह फिल्म आज (18 सितंबर 2026) से देशभर के प्रमुख सिनेमाघरों (PVR, INOX, Cinepolis) में प्रदर्शित हो रही है।
- ऑडियो व भाषा विकल्प: फिल्म मूल रूप से हिंदी के साथ-साथ दक्षिण भारत के चुनिंदा सिनेमाघरों में मलयालम भाषा में भी रिलीज की गई है।
- ओटीटी प्लेटफॉर्म: चूंकि फिल्म आज ही थिएटर्स में आई है, इसलिए यह अभी किसी भी ओटीटी (Netflix / Prime Video) पर मौजूद नहीं है। इसके 8 से 10 हफ्ते बाद ही डिजिटल प्लेटफॉर्म पर आने की संभावना है।
फिल्म समीक्षक – नवनीत मिश्र
पत्रकार व मीडिया शोधार्थी
जनसंचार व मीडिया अध्ययन में मास्टर

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Navneet Mishra is a seasoned journalist currently associated with Nirbhik India and its digital portal, nirbhikindia.in. With over six years of experience across print and digital platforms, Navneet specializes in politics, sports, economics, and geopolitics.
A Master’s graduate in Mass Communication from Deen Dayal Upadhyay Gorakhpur University, he is also a dedicated media scholar. His academic research focuses on “the pivotal role of Gorakhpur’s Hindi newspapers during the Indian freedom struggle against the British Crown”. Before joining Nirbhik India, Navneet spent five years at Adarsh Jeevan and gained valuable field experience at Amar Ujala Gorakhpur as training reporter only for 5 days.
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नवनीत मिश्रा वर्तमान में ‘निर्भीक इंडिया’ मीडिया समूह से जुड़े हैं। उन्होंने दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन में मास्टर्स किया है। पत्रकारिता के अपने 6 वर्षों के सफर में उन्होंने प्रिंट और डिजिटल दोनों डेस्क पर काम किया है। उनके शोध का विषय ब्रिटिश शासन के खिलाफ गोरखपुर के अखबारों का योगदान रहा है, जो उनकी ऐतिहासिक समझ को दर्शाता है। वे राजनीति, अर्थव्यवस्था और अंतरराष्ट्रीय मामलों (Geopolitics) पर निरंतर लिखते रहे हैं। ‘आदर्श जीवन’ दैनिक में 5 साल का कार्यकाल और ‘अमर उजाला’ गोरखपुर में ट्रेनिंग रिपोर्टिंग के तौर पर मात्र 5 दिन काम क्या है उनकी लेखनी को और भी निखारता है।

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