डीडीयू परीक्षा पैटर्न (DDU Exam Pattern) : नया कुलपति नया नियम
स्थान (डेटलाइन): गोरखपुर: डीडीयू परीक्षा पैटर्न (DDU Exam Pattern) को लेकर दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय की परीक्षा समिति ने आगामी सत्र के लिए एक अत्यंत महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक निर्णय लिया है। विश्वविद्यालय के नवनियुक्त कुलपति प्रो. के.पी. सिंह (VC Prof KP Singh) की अध्यक्षता में संपन्न हुई परीक्षा समिति की उच्चस्तरीय बैठक में परीक्षाओं के संचालन, मूल्यांकन, प्रश्न-पत्रों के स्वरूप, मिड-टर्म टेस्ट और प्रायोगिक परीक्षाओं को लेकर विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं।

इस बैठक में विश्वविद्यालय और संबद्ध महाविद्यालयों के लाखों छात्र-छात्राओं की परीक्षा प्रणाली में बड़ा बदलाव करते हुए प्रथम सेमेस्टर के लिए ‘मिश्रित मूल्यांकन मॉडल’ (Mixed Pattern) को औपचारिक मंजूरी दे दी गई है।
गोरखपुर विश्वविद्यालय (Gorakhpur University) द्वारा जारी आधिकारिक निर्णय के अनुसार, अब विश्वविद्यालय परिसर और उससे जुड़े चारों जनपदों (गोरखपुर, देवरिया, कुशीनगर और महराजगंज) के संबद्ध कॉलेजों में नवप्रवेशित विद्यार्थियों यानी प्रथम सेमेस्टर परीक्षा (First Semester Exam) के छात्र-छात्राओं का मूल्यांकन वस्तुनिष्ठ (MCQ) और वर्णनात्मक (Descriptive) दोनों पद्धतियों के संयोजन से किया जाएगा।
वहीं दूसरी ओर, पूर्व से अध्ययनरत वरिष्ठ छात्रों, कृषि संकाय और स्नातकोत्तर (PG) कक्षाओं के लिए पहले से चली आ रही व्यवस्था को बरकरार रखा गया है, जिससे परीक्षा के स्वरूप को लेकर महीनों से बना असमंजस अब पूरी तरह समाप्त हो गया है।
Gorakhpur University : नया कुलपति, नया डीडीयू परीक्षा पैटर्न (DDU Exam Pattern) और छात्रों की चिंताएं
दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय में जब भी कोई नया नेतृत्व आता है, तो प्रशासनिक और अकादमिक नीतियों में बदलाव की सुगबुगाहट तेज हो जाती है। कुलपति प्रो. के.पी. सिंह के कार्यभार संभालने के बाद से ही छात्र संगठनों और अध्ययनरत विद्यार्थियों के बीच लगातार यह चर्चा थी कि क्या विश्वविद्यालय फिर से अपनी पुरानी परीक्षा प्रणाली की ओर लौटेगा।
पिछले कुछ सत्रों से विश्वविद्यालय में स्नातक स्तर पर केवल बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQ Pattern) आधारित ओएमआर शीट पर परीक्षाएं आयोजित की जा रही थीं। शिक्षाविदों और शिक्षकों का एक वर्ग लंबे समय से यह तर्क दे रहा था कि केवल टिक मार्क करने की व्यवस्था से विद्यार्थियों की मौलिक लेखन क्षमता, विश्लेषणात्मक समझ और विस्तृत उत्तर देने की बौद्धिक क्षमता कमजोर हो रही है।
यही कारण है कि परीक्षा समिति ने बीच का रास्ता निकालते हुए नए छात्रों के लिए मिक्स्ड फॉर्मूला पेश किया है। हालांकि, विद्यार्थियों के बीच यह फैसला ‘नया कुलपति, नया एग्जाम पैटर्न, नया सिरदर्द’ के रूप में भी देखा जा रहा है। छात्रों का कहना है कि सत्र के बीच में अचानक परीक्षा प्रणाली बदलने से उन्हें अपनी पढ़ाई और तैयारी की पूरी रणनीति बदलनी होगी।
अब तक छात्र केवल बहुविकल्पीय प्रश्नों के त्वरित अभ्यास पर निर्भर थे, लेकिन अब उन्हें 100 शब्दों के संक्षिप्त नोट्स और 200 शब्दों के निबंधात्मक उत्तर लिखने की आदत डालनी होगी। समय प्रबंधन और उत्तर-पुस्तिका में निर्धारित सीमित स्थान पर सटीक उत्तर लिखना नए विद्यार्थियों के लिए एक नई चुनौती बनकर उभरा है।
डीडीयू परीक्षा पैटर्न (DDU Exam Pattern): 1st सेमेस्टर में 75 अंकों का नया मिक्स्ड फॉर्मूला
परीक्षा समिति के निर्णय के अनुसार, स्नातक स्तर पर प्रथम सेमेस्टर परीक्षा (First Semester Exam) का मुख्य थ्योरी प्रश्न-पत्र कुल 75 अंकों का होगा। इस प्रश्न-पत्र को दो स्पष्ट खंडों—वस्तुनिष्ठ (Objective) और वर्णनात्मक (Descriptive) में विभाजित किया गया है:
Gorakhpur University : डीडीयू परीक्षा पैटर्न (DDU Exam Pattern) के तहत 35 बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQ) के नियम
- प्रश्नों की संख्या: प्रश्न-पत्र के पहले खंड में कुल 35 बहुविकल्पीय प्रश्न पूछे जाएंगे।
- अंक विभाजन: प्रत्येक बहुविकल्पीय प्रश्न 1 अंक का होगा।
- कुल अधिभार: वस्तुनिष्ठ खंड कुल 35 अंकों का होगा।
मूल्यांकन का उद्देश्य: यह खंड विद्यार्थियों के विषय से संबंधित बुनियादी सिद्धांतों, तथ्यात्मक जानकारी और त्वरित निर्णय लेने की क्षमता की परख करेगा। इसमें किसी भी प्रकार की निगेटिव मार्किंग नहीं होगी।
डीडीयू परीक्षा पैटर्न (DDU Exam Pattern) में 5 लघु एवं 2 दीर्घ उत्तरीय प्रश्न
वर्णनात्मक पद्धति (Descriptive Pattern) के तहत विद्यार्थियों की लेखन क्षमता और विषय की गहनता की जांच की जाएगी। इस खंड को दो श्रेणियों में बांटा गया है:
लघु उत्तरीय प्रश्न (Short Answer Questions):
- कुल प्रश्न: परीक्षा में कुल 5 लघु उत्तरीय प्रश्न पूछे जाएंगे।
- अंक आवंटन: प्रत्येक प्रश्न 4 अंकों का होगा (5 × 4 = कुल 20 अंक)।
- शब्द सीमा: विद्यार्थियों को प्रत्येक लघु उत्तरीय प्रश्न का उत्तर लगभग 100 शब्दों में लिखना होगा।
दीर्घ उत्तरीय प्रश्न (Long Answer Questions):
- कुल प्रश्न: प्रश्न-पत्र में कुल 2 दीर्घ उत्तरीय प्रश्न शामिल होंगे।
- अंक आवंटन: प्रत्येक प्रश्न 10 अंकों का होगा (2 × 10 = कुल 20 अंक)।
- शब्द सीमा: इन प्रश्नों का उत्तर परीक्षार्थियों को लगभग 200 शब्दों में विस्तृत और विश्लेषणात्मक ढंग से देना होगा।
विशेष तकनीकी निर्देश: परीक्षा समिति ने सख्त निर्देश दिया है कि वर्णनात्मक प्रश्नों के उत्तर, उत्तर-पुस्तिका में निर्धारित स्थान पर ही लिखने होंगे। उत्तर-पुस्तिका में प्रत्येक प्रश्न के लिए निश्चित बॉक्स या खाली स्थान मुद्रित रहेगा। छात्रों को उसी तय स्थान के भीतर अपना उत्तर पूरा करना होगा। निर्धारित स्थान से बाहर लिखा गया उत्तर स्वीकार्य नहीं होगा।
डीडीयू परीक्षा पैटर्न (DDU Exam Pattern): 3rd, 5th और 7th सेमेस्टर में जारी रहेगा MCQ
विश्वविद्यालय प्रशासन ने वरिष्ठ कक्षाओं में अध्ययनरत विद्यार्थियों के हित को ध्यान में रखते हुए यह स्पष्ट किया है कि विषम सेमेस्टरों में पहले से लागू व्यवस्था में कोई व्यवधान नहीं डाला जाएगा।
- विषम सेमेस्टर (Odd Semesters): तृतीय (3rd), पंचम (5th) एवं सप्तम (7th) सेमेस्टर (जैसे बीए एलएलबी व अन्य यूजी पाठ्यक्रम) के विद्यार्थियों की परीक्षाएं पूर्व निर्धारित व्यवस्था के अनुसार ही आयोजित की जाएंगी।
- प्रश्न-पत्र का स्वरूप: इन सभी सेमेस्टरों की मुख्य परीक्षाओं में बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQ Pattern) पद्धति ही पूरी तरह लागू रहेगी।
छात्रों को राहत: इससे वरिष्ठ छात्रों को अपनी अध्ययन शैली बदलने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी और वे अपनी पुरानी रणनीति के अनुसार ही ओएमआर आधारित परीक्षा दे सकेंगे।
पीजी और कृषि संकाय के लिए पूर्ववत वर्णनात्मक व्यवस्था
परीक्षा समिति ने कृषि और परास्नातक विद्यार्थियों के लिए भी स्थिति पूरी तरह स्पष्ट कर दी है:
- कृषि संकाय (B.Sc / M.Sc Agriculture): कृषि के विद्यार्थियों की परीक्षाएं पूर्व निर्धारित व्यवस्था के अनुसार पूर्णतः वर्णनात्मक (Subjective) पद्धति से ही आयोजित की जाएंगी।
- परास्नातक (PG Courses): एमए, एमएससी, एमकॉम समेत पीजी स्तर की सभी परीक्षाएं पूर्व की भांति वर्णनात्मक पद्धति से ही संचालित होंगी। इनमें वस्तुनिष्ठ (MCQ) प्रणाली लागू नहीं होगी।
डीडीयू परीक्षा पैटर्न (DDU Exam Pattern): मिड-टर्म मूल्यांकन में ‘बेस्ट ऑफ टू’ नियम
छात्रों के आंतरिक मूल्यांकन को पारदर्शी, निष्पक्ष और लचीला बनाने के लिए मिड-टर्म मूल्यांकन (Mid-Term Assessment) को लेकर परीक्षा समिति ने छात्रों के हित में बड़ा फैसला लिया है। विश्वविद्यालय ने पहली बार ‘बेस्ट ऑफ टू’ का सिद्धांत लागू किया है:
- दो बार आयोजित होगा मिड-टर्म: सभी सेमेस्टरों के विद्यार्थियों के लिए सत्र के दौरान दो मिड-टर्म परीक्षाएं कराई जाएंगी:
- पहला मिड-टर्म मूल्यांकन: 20 अक्टूबर से पहले अनिवार्य रूप से संपन्न कराया जाएगा।
- दूसरा मिड-टर्म मूल्यांकन: 20 नवंबर से पहले आयोजित किया जाएगा।
- अधिकतम अंक होंगे मान्य (Best of Two): दोनों मूल्यांकनों में से विद्यार्थी जिस टेस्ट में सबसे अधिक अंक अर्जित करेगा, उसी प्राप्तांक को अंतिम मार्कशीट में जोड़ा जाएगा।
- परीक्षा छूटने पर विशेष छूट: यदि किसी अपरिहार्य कारण या बीमारी की वजह से किसी विद्यार्थी का एक मिड-टर्म टेस्ट छूट जाता है, तो उसके द्वारा दिए गए एकमात्र मूल्यांकन में प्राप्त अंक ही अंतिम रूप से मान्य होंगे और उसका साल या सत्र खराब नहीं होगा।
- पोर्टल पर अंक अपलोड की समय-सीमा: सभी संबद्ध महाविद्यालयों को 25 नवंबर तक प्रत्येक विद्यार्थी के मिड-टर्म अंक विश्वविद्यालय के आधिकारिक पोर्टल पर अपलोड करना अनिवार्य होगा।
डीडीयू परीक्षा पैटर्न (DDU Exam Pattern): 20 नवंबर तक प्रायोगिक परीक्षाएं अनिवार्य
प्रायोगिक (Practical) परीक्षाओं में होने वाली लेटलतीफी और अंक अपलोड न होने से परीक्षा परिणाम अटकने की समस्या को देखते हुए विश्वविद्यालय प्रशासन ने कड़ा रुख अपनाया है:
- अंतिम समय-सीमा: सभी महाविद्यालयों को 20 नवंबर तक हर हाल में प्रायोगिक परीक्षाएं संपन्न करानी होंगी।
- अंक अपलोड करने की अंतिम तिथि: 25 नवंबर तक सभी प्रायोगिक परीक्षाओं के प्राप्तांक विश्वविद्यालय की वेबसाइट पर अपलोड करने होंगे।
- लापरवाह कॉलेजों पर सीधी कार्रवाई: निर्धारित समय-सीमा में यदि किसी महाविद्यालय द्वारा प्रायोगिक परीक्षा आयोजित नहीं कराई जाती है, तो विश्वविद्यालय प्रशासन संबंधित विद्यार्थियों की प्रायोगिक परीक्षा विश्वविद्यालय मुख्य परिसर अथवा किसी अन्य संबद्ध महाविद्यालय में अपने स्तर से आयोजित कराएगा और दोषी कॉलेज के खिलाफ कठोर अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।
विभिन्न पाठ्यक्रमों के लिए परीक्षा पैटर्न तुलना चार्ट
| कक्षा / संकाय | सेमेस्टर | परीक्षा का स्वरूप | कुल अंक व प्रश्न संरचना |
|---|---|---|---|
| यूजी (स्नातक) – बीए, बीएससी, बीकॉम आदि | प्रथम सेमेस्टर (1st Sem) | मिश्रित (MCQ + वर्णनात्मक) | 75 अंक (35 MCQ + 5 लघु उत्तरीय + 2 दीर्घ उत्तरीय) |
| यूजी (स्नातक) – बीए, बीएससी, बीकॉम, बीए एलएलबी | 3rd, 5th, 7th सेमेस्टर | बहुविकल्पीय (Pure MCQ) | पूर्व निर्धारित ओएमआर (OMR) आधारित व्यवस्था |
| कृषि संकाय (Agriculture) | सभी सेमेस्टर | वर्णनात्मक (Subjective) | पूर्व निर्धारित लिखित वर्णनात्मक व्यवस्था |
| पीजी (परास्नातक) – एमए, एमएससी, एमकॉम | सभी सेमेस्टर | वर्णनात्मक (Subjective) | पूर्व निर्धारित लिखित वर्णनात्मक व्यवस्था |
छात्रों की त्वरित समझ के लिए विश्वविद्यालय के नए परीक्षा ढांचे का विवरण नीचे दिया गया है:
छात्र अक्सर क्या पूछ रहे हैं? (People Also Ask)
प्र. 1: प्रथम सेमेस्टर के 75 अंकों के अलावा बाकी 25 अंक कैसे मिलेंगे?
उत्तर: कुल 100 अंकों के मूल्यांकन में 75 अंक मुख्य सेमेस्टर थ्योरी परीक्षा के होंगे। शेष 25 अंक कॉलेज स्तर पर आयोजित होने वाले मिड-टर्म मूल्यांकन (Mid-Term Assessment), असाइनमेंट, प्रोजेक्ट और कक्षा में उपस्थिति के आधार पर दिए जाएंगे।
प्र. 2: क्या 35 बहुविकल्पीय प्रश्नों में निगेटिव मार्किंग होगी?
उत्तर: नहीं, विश्वविद्यालय परीक्षा समिति ने स्पष्ट किया है कि बहुविकल्पीय प्रश्नों में कोई निगेटिव मार्किंग नहीं होगी। प्रत्येक सही उत्तर के लिए 1 अंक मिलेगा।
प्र. 3: क्या उत्तर-पुस्तिका में अतिरिक्त पेज (B-Copy) मिलेगी?
उत्तर: नहीं, वर्णनात्मक प्रश्नों (5 लघु और 2 दीर्घ उत्तरीय) के उत्तर लिखने के लिए उत्तर-पुस्तिका में ही प्रश्नवार निर्धारित स्थान (Printed Space) दिया जाएगा। छात्रों को उसी तय स्थान और शब्द सीमा (100 व 200 शब्द) के भीतर अपना उत्तर लिखना होगा।
प्र. 4: क्या 3rd और 5th सेमेस्टर के छात्रों को भी थ्योरी उत्तर लिखने होंगे?
उत्तर: बिल्कुल नहीं। तृतीय, पंचम और सप्तम सेमेस्टर के विद्यार्थियों के लिए 100% बहुविकल्पीय (MCQ) ओएमआर आधारित परीक्षा ही जारी रहेगी।
गोरखपुर विश्वविद्यालय (Gorakhpur University) का यह नया हाइब्रिड परीक्षा मॉडल जहां एक ओर छात्रों की वस्तुनिष्ठ क्षमता को परखेगा, वहीं दूसरी ओर वर्णनात्मक प्रश्नों के माध्यम से उनकी मौलिक लेखन शैली को भी तराशने का कार्य करेगा।

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Navneet Mishra is a seasoned journalist currently associated with Nirbhik India and its digital portal, nirbhikindia.in. With over six years of experience across print and digital platforms, Navneet specializes in politics, sports, economics, and geopolitics.
A Master’s graduate in Mass Communication from Deen Dayal Upadhyay Gorakhpur University, he is also a dedicated media scholar. His academic research focuses on “the pivotal role of Gorakhpur’s Hindi newspapers during the Indian freedom struggle against the British Crown”. Before joining Nirbhik India, Navneet spent five years at Adarsh Jeevan and gained valuable field experience at Amar Ujala Gorakhpur as training reporter only for 5 days.
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नवनीत मिश्रा वर्तमान में ‘निर्भीक इंडिया’ मीडिया समूह से जुड़े हैं। उन्होंने दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन में मास्टर्स किया है। पत्रकारिता के अपने 6 वर्षों के सफर में उन्होंने प्रिंट और डिजिटल दोनों डेस्क पर काम किया है। उनके शोध का विषय ब्रिटिश शासन के खिलाफ गोरखपुर के अखबारों का योगदान रहा है, जो उनकी ऐतिहासिक समझ को दर्शाता है। वे राजनीति, अर्थव्यवस्था और अंतरराष्ट्रीय मामलों (Geopolitics) पर निरंतर लिखते रहे हैं। ‘आदर्श जीवन’ दैनिक में 5 साल का कार्यकाल और ‘अमर उजाला’ गोरखपुर में ट्रेनिंग रिपोर्टिंग के तौर पर मात्र 5 दिन काम क्या है उनकी लेखनी को और भी निखारता है।

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