Dropsy Disease से 3 रहस्यमई मौतें, वजह जान आएगा गुस्सा
गोरखपुर: Dropsy Disease नामक बीमारी से बीते दिनों एक ही परिवार के तीन सदस्यों की रहस्यमय बीमारी से हुई दर्दनाक मौतों ने पूरे स्वास्थ्य महकमे और आम जनता में दहशत फैला दी थी। अब एम्स गोरखपुर (AIIMS Gorakhpur) के डॉक्टरों ने इस जानलेवा बीमारी की गुत्थी सुलझा ली है।
![Dropsy Disease से 3 रहस्यमई मौतें, वजह जान आएगा गुस्सा सरसों तेल या जहर? कैसे फैली [Dropsy Disease] की बीमारी](https://i0.wp.com/nirbhikindia.com/wp-content/uploads/2026/09/Dropsy-Disease-%E0%A4%B8%E0%A5%87-3-%E0%A4%B0%E0%A4%B9%E0%A4%B8%E0%A5%8D%E0%A4%AF%E0%A4%AE%E0%A4%88-%E0%A4%AE%E0%A5%8C%E0%A4%A4%E0%A5%87%E0%A4%82-%E0%A4%B5%E0%A4%9C%E0%A4%B9-%E0%A4%9C%E0%A4%BE%E0%A4%A8-%E0%A4%86%E0%A4%8F%E0%A4%97%E0%A4%BE-%E0%A4%97%E0%A5%81%E0%A4%B8%E0%A5%8D%E0%A4%B8%E0%A4%BE.webp?resize=738%2C414&ssl=1)
विस्तृत जांच के बाद पता चला है कि इन मौतों का मुख्य कारण [Dropsy Disease] (ड्रॉप्सी) है, जो ‘सत्यानाशी’ (Argemone Mexicana) के बीजों के तेल के सेवन से होती है। स्वास्थ्य विभाग द्वारा प्रारंभिक जांच में विफल रहने के बाद, शुरुआत में ही सही पहचान कर इस [Dropsy Disease] के रहस्य को एम्स द्वारा सुलझाने से इलाके के लोगों ने बड़ी राहत की सांस ली है।
सरसों तेल या जहर? कैसे फैली [Dropsy Disease] की बीमारी
शुरुआत में स्वास्थ्य विभाग की टीम और स्थानीय लोगों को यह प्रबल आशंका थी कि मौतें सरसों के तेल में मिलावट के कारण हुई हैं। लेकिन जब एम्स की मेडिकल टीम ने जीवित बचे पिता और पुत्र से सघन पूछताछ की, तो [Dropsy Disease] फैलने का चौंकाने वाला और दुखद सच सामने आया। पीड़ित परिवार ने जोड़ों के दर्द निवारक और अन्य घरेलू उपचार के लिए करीब 7 से 8 किलो ‘सत्यानाशी’ (Argemone Mexicana) के बीजों का तेल पेरवाया था।
चूंकि सत्यानाशी का तेल देखने, रंग और महक में बिल्कुल सामान्य सरसों के तेल जैसा ही होता है, इसलिए घर पर रहने वाली तीनों महिलाओं ने भूलवश भोजन पकाने में सरसों के तेल की जगह इसी जहरीले तेल का इस्तेमाल कर लिया। इस भारी भूल के कारण उनके शरीर में तेजी से जहर फैल गया और वे गंभीर [Dropsy Disease] का शिकार हो गईं।
दूषित भोजन खाने से [Dropsy Disease] के लक्षण तेजी से बिगड़े और अंततः तीनों महिलाओं की मृत्यु हो गई। बेटा चूंकि घर से बाहर रहता था, इसलिए उसमें [Dropsy Disease] के लक्षण नहीं पाए गए, फिर भी एहतियातन उसे मेडिकल ऑब्जर्वेशन में रखा गया है।
एम्स गोरखपुर की टीम ने सुलझाई [Dropsy Disease] की गुत्थी
जब गांव स्तर पर मौतों का कारण स्पष्ट नहीं हुआ और स्थानीय जांच टीम खाली हाथ रही, तो माननीय सांसद श्री रमाशंकर राजभर जी की त्वरित पहल पर परिवार के जीवित सदस्यों (पिता और पुत्र) को रहस्यमय बीमारी (यानी [Dropsy Disease]) का पता लगाने और इलाज के लिए एम्स गोरखपुर भेजा गया।
स्थिति की गंभीरता का संज्ञान लेते हुए एम्स की कार्यकारी निदेशिका डॉ. विभा दत्ता ने तत्काल प्रभाव से [Dropsy Disease] के संदिग्ध मरीजों के इलाज के लिए मेडिकल सुपरिटेंडेंट डॉ. अजय भारती को एक विशेष मेडिकल टीम गठित करने का निर्देश दिया।
इस टीम में शामिल न्यूरोलॉजी विभाग के डॉ. आशुतोष तिवारी ने मरीजों के क्लिनिकल लक्षणों की बारीकी से जांच की और सबसे पहले [Dropsy Disease] की प्रबल आशंका जताई। इसके बाद मेडिसिन विभाग के डॉ. कनिष्क कुमार, विभागाध्यक्ष डॉ. अजय कुमार मिश्रा और टीम के अन्य विशेषज्ञों के बीच गहन विमर्श हुआ। सभी आवश्यक पैथोलॉजिकल जांचों के बाद आधिकारिक पुष्टि की गई कि यह पूरी घटना सत्यानाशी के बीजों से होने वाली जानलेवा [Dropsy Disease] ही है।
सत्यानाशी (Argemone) और [Dropsy Disease] के खतरनाक लक्षण
आम जनता के लिए यह जानना बेहद जरूरी है कि आखिर यह [Dropsy Disease] क्या है और यह शरीर को कैसे नष्ट करती है। सत्यानाशी (Argemone Mexicana) पीले फूलों वाला एक कंटीला जंगली पौधा है, जो अक्सर सरसों के खेतों या खाली मैदानों में खरपतवार के रूप में उग आता है।
इसके बीज बिल्कुल सरसों के काले दानों जैसे दिखते हैं। जब इसका तेल सरसों के तेल में मिल जाता है (चाहे अनजाने में या मिलावटखोरों द्वारा), तो इसके लगातार सेवन से ‘एपिडेमिक ड्रॉप्सी’ (Epidemic [Dropsy Disease]) फैलती है।
[Dropsy Disease] के प्रमुख लक्षणों में शामिल हैं:
- अचानक शरीर (खासकर पैरों और टखनों) में भारी सूजन आना।
- पेट खराब होना, उल्टी और दस्त की शिकायत।
- त्वचा पर लाल चकत्ते (Erythema) पड़ना।
- सांस फूलना और हृदय गति का अनियमित होना।
- गंभीर मामलों में [Dropsy Disease] के कारण हार्ट फेलियर और मृत्यु।
[Dropsy Disease] से बचाव: स्वास्थ्य विभाग की अहम अपील
एम्स के वरिष्ठ डॉक्टरों का कहना है कि “टीम ने मरीज की बीमारी एवं [Dropsy Disease] के मुख्य कारण का पता लगाकर काफी तत्परता एवं लगन से मरीज का इलाज किया। परिवार के बाकी सदस्यों को हम बचा पाए, इसके लिए एम्स के डॉक्टर्स की टीम बधाई की पात्र है।”
इस दर्दनाक घटना ने पूरे प्रदेश को [Dropsy Disease] के प्रति सचेत कर दिया है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने जनता से अपील की है कि ग्रामीण क्षेत्रों में लोग बिना पुख्ता वैज्ञानिक जानकारी के किसी भी जंगली पौधे या बीज (जैसे सत्यानाशी) का तेल निकालकर उपयोग न करें। यदि घर में ऐसा कोई तेल रखा है, तो उसे खाद्य तेलों से बिल्कुल अलग और सुरक्षित रखें।
सरसों का तेल खरीदते समय भी प्रमाणित जगह से ही खरीदारी करें। इस बीमारी के कारणों, लक्षणों की पहचान एवं शीघ्र इलाज को लेकर जनता में जागरूकता फैलाकर ही भविष्य में [Dropsy Disease] से होने वाली ऐसी दुखद और रहस्यमय घटनाओं को रोका जा सकता है।

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Navneet Mishra is a seasoned journalist currently associated with Nirbhik India and its digital portal, nirbhikindia.in. With over six years of experience across print and digital platforms, Navneet specializes in politics, sports, economics, and geopolitics.
A Master’s graduate in Mass Communication from Deen Dayal Upadhyay Gorakhpur University, he is also a dedicated media scholar. His academic research focuses on “the pivotal role of Gorakhpur’s Hindi newspapers during the Indian freedom struggle against the British Crown”. Before joining Nirbhik India, Navneet spent five years at Adarsh Jeevan and gained valuable field experience at Amar Ujala Gorakhpur as training reporter only for 5 days.
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नवनीत मिश्रा वर्तमान में ‘निर्भीक इंडिया’ मीडिया समूह से जुड़े हैं। उन्होंने दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन में मास्टर्स किया है। पत्रकारिता के अपने 6 वर्षों के सफर में उन्होंने प्रिंट और डिजिटल दोनों डेस्क पर काम किया है। उनके शोध का विषय ब्रिटिश शासन के खिलाफ गोरखपुर के अखबारों का योगदान रहा है, जो उनकी ऐतिहासिक समझ को दर्शाता है। वे राजनीति, अर्थव्यवस्था और अंतरराष्ट्रीय मामलों (Geopolitics) पर निरंतर लिखते रहे हैं। ‘आदर्श जीवन’ दैनिक में 5 साल का कार्यकाल और ‘अमर उजाला’ गोरखपुर में ट्रेनिंग रिपोर्टिंग के तौर पर मात्र 5 दिन काम क्या है उनकी लेखनी को और भी निखारता है।

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