अवैध कच्ची शराब (Illicit Liquor) पर कार्रवाई: आबकारी की तत्परता या सिस्टम की नाकामी? विश्लेषण
अवैध कच्ची शराब (Illicit Liquor) का ज़हरीला कारोबार उत्तर प्रदेश के कई जिलों में एक नासूर बन चुका है। हाल ही में आबकारी आयुक्त, उत्तर प्रदेश के सख्त आदेश और जिला आबकारी अधिकारी के निर्देशन में 9 अगस्त से 12 अगस्त 2026 तक गोरखपुर (Gorakhpur) में लगातार चार दिनों तक सघन प्रवर्तन अभियान (Enforcement Drive) चलाया गया।

आधिकारिक प्रेस विज्ञप्तियों के अनुसार, राजघाट और गीडा थाना क्षेत्रों, विशेषकर चकराआयुल ग्राम और राप्ती नदी के किनारे भारी मात्रा में शराब और भट्ठियां पकड़ी गई हैं। कागज़ों पर यह आबकारी विभाग (Excise Department) की ‘तत्परता’ (Promptness) और एक बड़ी कामयाबी प्रतीत होती है।
लेकिन एक विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण से देखने पर एक बेहद गंभीर सवाल खड़ा होता है: अगर हर रोज़ एक ही इलाके से इतनी बड़ी मात्रा में अवैध शराब बरामद हो रही है, तो क्या यह इस बात का स्पष्ट प्रमाण नहीं है कि यह पूरा धंधा प्रशासन की नाक के नीचे धड़ल्ले से फल-फूल रहा है?
अवैध कच्ची शराब (Illicit Liquor) पर लगातार दबिश और बरामदगी के आंकड़े: सत्य क्या है?
9 अगस्त से 12 अगस्त 2026 के बीच आबकारी विभाग (Excise Department) के इंस्पेक्टर एस. एन. वर्मा और उनकी टीम द्वारा जारी किए गए बरामदगी के आंकड़े इस प्रकार हैं:
- 9 अगस्त: राप्ती नदी के किनारे व अमरूद बागों में दबिश, 110 लीटर शराब बरामद और भट्ठियां नष्ट।
- 10 अगस्त: ग्राम चकराआयुल में दबिश, 75 लीटर शराब बरामद।
- 11 अगस्त: राप्ती नदी के किनारे और झाड़ियों में 155 लीटर शराब की बरामदगी और कई भट्ठियां ध्वस्त।
- 12 अगस्त: चकराआयुल और गीडा/राजघाट क्षेत्र में 25 लीटर शराब बरामद और 1 अभियुक्त की गिरफ्तारी।
कुल मिलाकर मात्र चार दिनों में 365 लीटर से अधिक अवैध कच्ची शराब बरामद की गई। इसके साथ ही वैध आबकारी दुकानों (Licence Shops) का निरीक्षण भी किया गया, जहाँ सब कुछ “नियमानुसार” संचालित होता मिला।
आबकारी विभाग (Excise Department) की नाक के नीचे पनपता सिंडिकेट
जब कोई सरकारी विभाग रोज़ाना प्रेस विज्ञप्ति जारी करता है, तो वह अपनी सक्रियता जताना चाहता है। लेकिन क्रिमिनोलॉजी (Criminology) का सीधा सा सिद्धांत है कि ‘लगातार बरामदगी, अबाध उत्पादन का सुबूत है’। एक ही थाना क्षेत्र (राजघाट) और एक ही गांव (चकराआयुल) में पुलिस और आबकारी की टीम लगातार चार दिन जाती है और हर दिन नई भट्ठियां और शराब का जखीरा मिलता है। इसका सीधा अर्थ यह है कि अवैध कच्ची शराब बनाने वाले माफियाओं के भीतर कानून का कोई खौफ (Fear of Law) नहीं है।
तस्कर जानते हैं कि यह कार्रवाई महज़ एक ‘रूटीन प्रक्रिया’ (Routine Process) है। रोज़ाना कुछ लीटर शराब पकड़ने और इक्का-दुक्का लोगों को मोहरा बनाकर गिरफ्तार करने (जैसे 12 अगस्त को केवल 1 गिरफ्तारी) से इस विशाल नेक्सस (Nexus) को कोई आर्थिक नुकसान नहीं होता। लहन (Fermentation Wash) को बहा देना केवल एक सतही इलाज है। जब तक कच्चा माल (Raw Material) उपलब्ध कराने वाले सप्लायर्स और असली सरगनाओं (Kingpins) की रीढ़ नहीं तोड़ी जाती, तब तक यह चूहे-बिल्ली का खेल (Cat and Mouse Game) चलता रहेगा।
राप्ती नदी का किनारा अवैध कच्ची शराब (Illicit Liquor) का सेफ ज़ोन
गोरखपुर (Gorakhpur) में राप्ती नदी के किनारे की भौगोलिक स्थिति (Geographical Topography)—जहाँ घने अमरूद के बाग और झाड़ियाँ हैं शराब तस्करों के लिए एक आदर्श ‘बफर ज़ोन’ (Buffer Zone) का काम करती है। सबसे बड़ा सवाल पुलिस और आबकारी विभाग (Excise Department) के खूफ़िया तंत्र (Intelligence Network) पर उठता है।
ऐसा क्यों है कि भट्ठियां सुलगने और किण्वन (Fermentation) पूरा होने के बाद ही उन्हें खबर मिलती है? यह प्रिवेंटिव एक्शन (Preventive Action) के बजाय केवल एक रिएक्टिव अप्रोच (Reactive Approach) है।
लोग यह भी पूछते हैं (People Also Ask – PAA): ज़मीनी सवाल
प्रश्न: अवैध कच्ची शराब स्वास्थ्य के लिए इतनी जानलेवा क्यों होती है?
विश्लेषण: छिपकर बनने वाली इस शराब में एथिल अल्कोहल (Ethyl Alcohol) के साथ अनजाने में मेथिल अल्कोहल (Methyl Alcohol) बन जाता है, जो अत्यधिक विषैला (Highly Toxic) होता है। इसके निर्माण में यूरिया (Urea), नौसादर और सड़े हुए गुड़ का अनियंत्रित तरीके से इस्तेमाल किया जाता है। इसका सेवन सीधे नर्वस सिस्टम पर हमला करता है, जिससे अंधापन या सामूहिक मृत्यु (Hooch Tragedy) जैसी भयानक घटनाएं होती हैं।
प्रश्न: क्या आबकारी विभाग (Excise Department) की कार्रवाइयां केवल कागज़ी दिखावा हैं?
विश्लेषण: इन छापों को पूरी तरह से दिखावा नहीं कहा जा सकता, लेकिन यह सिर्फ ‘लक्षणों का इलाज’ (Treating the Symptoms) है, मूल बीमारी का नहीं। जब तक बीट कांस्टेबल और स्थानीय खूफ़िया तंत्र की सख्त जवाबदेही (Accountability) तय नहीं होगी, तब तक कुछ लीटर शराब पकड़कर प्रेस विज्ञप्ति जारी करना सिर्फ कागज़ी खानापूर्ति (Paperwork Fulfillment) ही माना जाएगा।
निष्कर्ष: जड़ों पर प्रहार करने का समय
गोरखपुर (Gorakhpur) में 9 से 12 अगस्त के बीच चलाए गए इस प्रवर्तन अभियान ने यह साबित कर दिया है कि अवैध कच्ची शराब (Illicit Liquor) का नेटवर्क प्रशासन की पहुंच से कहीं अधिक गहरा और संगठित है। आबकारी निरीक्षक और पुलिस की तत्परता अपनी जगह है, लेकिन जब तक इस धंधे को संरक्षण देने वाले स्थानीय भ्रष्ट तत्वों के गठजोड़ को नहीं तोड़ा जाएगा, तब तक राप्ती के किनारे यूं ही भट्ठियां सुलगती रहेंगी। विभाग को प्रेस विज्ञप्तियों की संख्या गिनाने के बजाय, इस अवैध सप्लाई चेन (Supply Chain) को हमेशा के लिए ध्वस्त करने की ठोस रणनीति बनानी होगी।
सरकारी विज्ञप्ति समीक्षक - नवनीत मिश्र
पत्रकार व मीडिया शोधार्थी
जनसंचार व मीडिया अध्ययन में मास्टर

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Navneet Mishra is a seasoned journalist currently associated with Nirbhik India and its digital portal, nirbhikindia.in. With over six years of experience across print and digital platforms, Navneet specializes in politics, sports, economics, and geopolitics.
A Master’s graduate in Mass Communication from Deen Dayal Upadhyay Gorakhpur University, he is also a dedicated media scholar. His academic research focuses on “the pivotal role of Gorakhpur’s Hindi newspapers during the Indian freedom struggle against the British Crown”. Before joining Nirbhik India, Navneet spent five years at Adarsh Jeevan and gained valuable field experience at Amar Ujala Gorakhpur as training reporter only for 5 days.
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नवनीत मिश्रा वर्तमान में ‘निर्भीक इंडिया’ मीडिया समूह से जुड़े हैं। उन्होंने दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन में मास्टर्स किया है। पत्रकारिता के अपने 6 वर्षों के सफर में उन्होंने प्रिंट और डिजिटल दोनों डेस्क पर काम किया है। उनके शोध का विषय ब्रिटिश शासन के खिलाफ गोरखपुर के अखबारों का योगदान रहा है, जो उनकी ऐतिहासिक समझ को दर्शाता है। वे राजनीति, अर्थव्यवस्था और अंतरराष्ट्रीय मामलों (Geopolitics) पर निरंतर लिखते रहे हैं। ‘आदर्श जीवन’ दैनिक में 5 साल का कार्यकाल और ‘अमर उजाला’ गोरखपुर में ट्रेनिंग रिपोर्टिंग के तौर पर मात्र 5 दिन काम क्या है उनकी लेखनी को और भी निखारता है।

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