Offroad Burnout: MMMUT में किसने मारी बाजी? Nirbhik India
गोरखपुर (निर्भीक इंडिया): मदन मोहन मालवीय प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (MMMUT Gorakhpur) के यांत्रिक अभियांत्रिकी विभाग में 24 और 25 अक्टूबर 2026 को आयोजित दो दिवसीय तकनीकी आयोजन ऑफ-रोड बर्नआउट (Offroad Burnout) का रोमांचक समापन हुआ। क्या स्थानीय प्रतिभाएं राष्ट्रीय मानकों पर खरी उतरीं? कड़े मुकाबलों के बीच 23 टीमों को पछाड़ते हुए ग्रैविटी ब्रेकर्स ने पहला स्थान हासिल कर अपनी श्रेष्ठता साबित कर दी।

निर्भीक इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, पूर्वी उत्तर प्रदेश के तकनीकी शिक्षा केंद्र गोरखपुर में ऑटोमोटिव इंजीनियरिंग की बारीकियों को जमीन पर परखने के लिए यह मंच सजाया गया था। मदन मोहन मालवीय प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के यांत्रिक अभियांत्रिकी (Mechanical Engineering) विभाग के एसएई कॉलेजिएट क्लब (SAE Collegiate Club) द्वारा आयोजित इस ऑफ-रोड बर्नआउट (Offroad Burnout) ने छात्रों को थ्योरी से निकलकर रियल-वर्ल्ड व्हीकल डिजाइनिंग और ऑफ-रोड परफॉर्मेंस का लाइव अनुभव दिया।
Offroad Burnout में छाया MMMUT: ग्रैविटी ब्रेकर्स ने जीती रेस, देखें पूरी रिपोर्ट
गोरखपुर स्थित मदन मोहन मालवीय प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (MMMUT Gorakhpur) के कैंपस में 24 और 25 अक्टूबर 2026 को आयोजित ऑफ-रोड बर्नआउट (Offroad Burnout) प्रतियोगिता में युवा इंजीनियरों ने नवाचार और गति का अनूठा प्रदर्शन किया। दो दिनों तक चले इस तकनीकी आयोजन (Technical Event) के समापन एवं सम्मान समारोह का आयोजन 25 अक्टूबर 2026 को गरिमामय वातावरण में संपन्न हुआ।
mmmut gorakhpur : यांत्रिक अभियांत्रिकी (Mechanical Engineering) का महामुकाबला
समापन समारोह का औपचारिक शुभारंभ अतिथियों के स्वागत एवं अभिनंदन के साथ हुआ। यांत्रिक अभियांत्रिकी (Mechanical Engineering) विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो. संजय मिश्रा ने मुख्य अतिथि प्रो. जीऊत सिंह (अधिष्ठाता, स्नातकोत्तर अध्ययन) को पुष्पगुच्छ भेंट कर उनका अभिनंदन किया। वहीं, ऑफ-रोड बर्नआउट के समन्वयक डॉ. धीरेन्द्र सिंह एवं डॉ. राबेश कुमार सिंह ने प्रो. संजय मिश्रा का स्वागत किया।
विभागाध्यक्ष प्रो. संजय मिश्रा ने अपने स्वागत संबोधन में सभी प्रतिभागियों के उत्साह की सराहना की और छात्रों को भविष्य में भी ऐसी तकनीकी प्रतियोगिताओं में निरंतर सहभागिता करने के लिए प्रेरित किया। इसके बाद समन्वयक डॉ. धीरेन्द्र सिंह ने समापन संबोधन देते हुए बताया कि इस पूरे आयोजन में कुल 23 टीमों ने हिस्सा लिया था।
स्थानीय स्तर पर प्रतिस्पर्धा को और अधिक धार देते हुए दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय (DDU Gorakhpur University) की 3 टीमों ने भी इस तकनीकी आयोजन (Technical Event) में हिस्सा लिया। इससे शहर के दो बड़े शैक्षणिक संस्थानों के बीच ऑटोमोटिव नवाचार को लेकर एक स्वस्थ तकनीकी प्रतिस्पर्धा देखने को मिली।
ऑफ-रोड बर्नआउट (Offroad Burnout) के विजेता: पदक तालिका
समारोह का मुख्य आकर्षण पुरस्कार एवं प्रमाणपत्र वितरण रहा, जिसमें मुख्य अतिथि प्रो. जीऊत सिंह, प्रो. संजय मिश्रा तथा उपस्थित संकाय सदस्यों ने विजेता टीमों को मंच से पुरस्कृत किया।
| स्थान / श्रेणी | टीम का नाम | टीम लीडर | मुख्य उपलब्धि / विवरण |
|---|---|---|---|
| प्रथम स्थान (विजेता) | ग्रैविटी ब्रेकर्स (Gravity Breakers) | जयानंद | उत्कृष्ट वाहन संतुलन और ऑफ-रोड ट्रैक पर सर्वश्रेष्ठ टाइमिंग |
| द्वितीय स्थान (उपविजेता) | रेडलाइन रेबेल्स (Redline Rebels) | पार्थ पांडेय | प्रभावी स्टीयरिंग कंट्रोल और मजबूत तकनीकी डिजाइन |
| तृतीय स्थान | लाइटनिंग मैकक्वीन (Lightning McQueen) | हर्ष वर्धन सिंह | निरंतर गति और संतुलित चेसिस डायनामिक्स |
| विशेष नवाचार पुरस्कार | टीम टॉर्क (Team Torque) | — | नवाचार एवं सक्रिय सहभागिता के लिए विशेष सराहना |
प्रतियोगिता में हिस्सा लेने वाली अन्य सभी प्रतिभागी टीमों के सदस्यों को भी उनके समर्पण और प्रयास के लिए सहभागिता प्रमाणपत्र प्रदान किए गए।
पीपुल ऑल्सो आस्क (PAA): ऑफ-रोड बर्नआउट और ऑटोमोटिव तकनीकी से जुड़े मुख्य सवाल
1. इंजीनियरिंग छात्रों के लिए ऑफ-रोड बर्नआउट (Offroad Burnout) जैसी प्रतियोगिताएं क्यों जरूरी हैं?
ऑटोमोटिव और मैकेनिकल इंजीनियरिंग के छात्रों के लिए केवल किताबी ज्ञान पर्याप्त नहीं होता। ऑफ-रोड बर्नआउट जैसी प्रतियोगिताएं छात्रों को वाहन के सस्पेंशन, ब्रेकिंग सिस्टम, टॉर्क मैनेजमेंट और वेट डिस्ट्रीब्यूशन जैसी जटिल वास्तविक चुनौतियों को हल करने का सीधा अवसर प्रदान करती हैं। मुख्य अतिथि प्रो. जीऊत सिंह ने भी अपने संबोधन में स्पष्ट किया कि व्यावहारिक कौशल ही छात्रों को भविष्य की औद्योगिक जरूरतों के लिए तैयार करता है।
2. एसएई कॉलेजिएट क्लब (SAE Collegiate Club) का तकनीकी शिक्षा में क्या योगदान है?
एसएई कॉलेजिएट क्लब (SAE Collegiate Club) विद्यार्थियों को अंतरराष्ट्रीय ऑटोमोटिव मानकों के अनुरूप वाहन डिजाइन करने और टीम वर्क के साथ जटिल प्रोजेक्ट्स को धरातल पर उतारने का मंच देता है। इस आयोजन को सुचारू रूप से संचालित करने में क्लब के चेयरपर्सन मिलिंद संखवार एवं वाइस चेयरपर्सन अंकित यादव सहित कोर टीम के सदस्यों की महत्वपूर्ण भूमिका रही, जिनकी आयोजकों ने विशेष रूप से सराहना की।
3. क्या ऑफ-रोड बर्नआउट से कैंपस प्लेसमेंट और स्किल डेवलपमेंट में मदद मिलती है?
हां, ऐसे प्रोजेक्ट-आधारित आयोजनों से छात्रों की प्रॉब्लम-सॉल्विंग क्षमता और हैंड्स-ऑन एक्सपीरियंस बढ़ता है। यह अनुभव कोर इंजीनियरिंग कंपनियों में रोजगार पाने और स्टार्टअप नवाचार के लिए बेहद उपयोगी सिद्ध होता है।
राष्ट्रगान के साथ हुआ समापन
कार्यक्रम के अंतिम चरण में ऑफ-रोड बर्नआउट (Offroad Burnout) के समन्वयक डॉ. राबेश कुमार सिंह ने विश्वविद्यालय प्रशासन, मैकेनिकल इंजीनियरिंग विभाग, शिक्षकों, एसएई कॉलेजिएट क्लब (SAE Collegiate Club) की टीम और स्वयंसेवकों के प्रति धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया।
यह तकनीकी आयोजन (Technical Event) राष्ट्रगान के साथ संपन्न हुआ। मदन मोहन मालवीय प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (MMMUT Gorakhpur) में आयोजित इस दो दिवसीय ऑफ-रोड बर्नआउट (Offroad Burnout) ने पूर्वांचल के छात्रों में व्यावहारिक इंजीनियरिंग और नवाचार को एक नया आयाम दिया है।

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