सुरक्षित पेयजल (Safe Drinking Water): रेलवे का महा-अभियान!
गोरखपुर: पूर्वोत्तर रेलवे (North Eastern Railway) ने रेल यात्रियों, कर्मचारियों और उनके परिजनों के स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए एक बड़ा कदम उठाया है। सभी रेलवे स्टेशनों और कॉलोनियों में 100 प्रतिशत सुरक्षित पेयजल (Safe Drinking Water) उपलब्ध कराने के उद्देश्य से जल स्रोतों तथा वितरण प्रणाली की सघन और नियमित जांच शुरू कर दी गई है। यह अभियान तीनों रेल मंडलों वाराणसी, इज्जतनगर और लखनऊ में युद्धस्तर पर चलाया जा रहा है ताकि जल जनित बीमारियों को पूरी तरह से रोका जा सके।

पूर्वोत्तर रेलवे (North Eastern Railway) में सुरक्षित पेयजल (Safe Drinking Water) टेस्टिंग
रेलवे प्रशासन द्वारा पानी की टंकियों, वाटर कूलर, यूवी/आरओ सिस्टम (UV/RO System), फिल्टर, वाटर टैप और पाइपलाइनों की नियमित सफाई और प्रिवेंटिव मेंटेनेंस (Preventive Maintenance) पर जोर दिया जा रहा है। चिकित्सा और इंजीनियरिंग विभाग की संयुक्त टीमें निर्धारित समय-सारणी के अनुसार इनका लगातार निरीक्षण कर रही हैं। स्वास्थ्य निरीक्षकों द्वारा एक सख्त सैंपलिंग प्रोटोकॉल के तहत जल स्रोतों से पानी के नमूने लिए जा रहे हैं।
वाराणसी, इज्जतनगर और लखनऊ में सुरक्षित पेयजल (Safe Drinking Water) परीक्षण
आधिकारिक प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, वाराणसी मंडल में 28 सितंबर से 04 अक्टूबर 2026 के बीच कुल 577 अवशिष्ट क्लोरीन परीक्षण किए गए। इसके अलावा, 52 जल नमूनों का बैक्टीरियोलॉजिकल (जीवाणु संवर्धन) परीक्षण और 2 नमूनों का रासायनिक विश्लेषण राज्य सरकार की प्रयोगशाला में सफलतापूर्वक कराया गया।
इसी तरह, इज्जतनगर मंडल के 9 प्रमुख स्टेशनों (काठगोदाम, इज्जतनगर, फर्रुखाबाद, कासगंज, बरेली सिटी, काशीपुर, पीलीभीत, मथुरा कैंट एवं फतेहगढ़) तथा न्यू मॉडल कॉलोनी में कुल 45 अवशिष्ट क्लोरीन परीक्षण किए गए। राहत की बात यह है कि ये सभी परीक्षण निर्धारित मानकों के बिल्कुल अनुरूप पाए गए। यहां जीवाणु संवर्धन परीक्षण के लिए भी 5 जल नमूने लैब भेजे गए हैं।
वहीं, लखनऊ मंडल के 12 प्रमुख स्टेशनों और 4 आवासीय कॉलोनियों से कुल 125 अवशिष्ट क्लोरीन परीक्षण किए गए, और 3 विशेष नमूने लैब में जांच के लिए भेजे गए हैं।
स्टेशनों पर सुरक्षित पेयजल (Safe Drinking Water) कैसे तय होता है?
आम नागरिक और यात्री अक्सर गूगल पर खोजते हैं कि रेलवे स्टेशनों पर मिलने वाला पानी पीने योग्य है या नहीं और इसका जल गुणवत्ता परीक्षण (Water Quality Test) किन पैमानों पर होता है।
रेलवे स्टेशनों, रनिंग रूम, क्रू लॉबी, कार्यालयों और चिकित्सालयों में पानी की शुद्धता सुनिश्चित करने के लिए मुख्य रूप से ‘क्लोरीन लेवल’ की जांच होती है ताकि पानी कीटाणुमुक्त रहे। इसके बाद प्रयोगशालाओं में जल के नमूनों का रासायनिक (Chemical) और जीवाणु संबंधी (Bacteriological) परीक्षण किया जाता है, जिससे यह सुनिश्चित हो सके कि जल में किसी भी प्रकार का हानिकारक तत्व मौजूद नहीं है।
रेलवे प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि लाखों यात्रियों और कर्मचारियों को सुरक्षित पेयजल (Safe Drinking Water) उपलब्ध कराना उनकी सर्वोच्च प्राथमिकताओं (Top Priorities) में से एक है। जल स्रोतों की डीप क्लीनिंग, जल शोधन व्यवस्थाओं का निरंतर निरीक्षण और जरूरत पड़ने पर त्वरित सुधारात्मक कार्रवाई सुनिश्चित की जा रही है। इस सघन निगरानी व्यवस्था को और अधिक सशक्त बनाने के लिए सभी संबंधित विभागों को सख्त निर्देश जारी कर दिए गए हैं।

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Navneet Mishra is a seasoned journalist currently associated with Nirbhik India and its digital portal, nirbhikindia.in. With over six years of experience across print and digital platforms, Navneet specializes in politics, sports, economics, and geopolitics.
A Master’s graduate in Mass Communication from Deen Dayal Upadhyay Gorakhpur University, he is also a dedicated media scholar. His academic research focuses on “the pivotal role of Gorakhpur’s Hindi newspapers during the Indian freedom struggle against the British Crown”. Before joining Nirbhik India, Navneet spent five years at Adarsh Jeevan and gained valuable field experience at Amar Ujala Gorakhpur as training reporter only for 5 days.
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नवनीत मिश्रा वर्तमान में ‘निर्भीक इंडिया’ मीडिया समूह से जुड़े हैं। उन्होंने दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन में मास्टर्स किया है। पत्रकारिता के अपने 6 वर्षों के सफर में उन्होंने प्रिंट और डिजिटल दोनों डेस्क पर काम किया है। उनके शोध का विषय ब्रिटिश शासन के खिलाफ गोरखपुर के अखबारों का योगदान रहा है, जो उनकी ऐतिहासिक समझ को दर्शाता है। वे राजनीति, अर्थव्यवस्था और अंतरराष्ट्रीय मामलों (Geopolitics) पर निरंतर लिखते रहे हैं। ‘आदर्श जीवन’ दैनिक में 5 साल का कार्यकाल और ‘अमर उजाला’ गोरखपुर में ट्रेनिंग रिपोर्टिंग के तौर पर मात्र 5 दिन काम क्या है उनकी लेखनी को और भी निखारता है।

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