NER Gorakhpur का अभियान: रेलवे स्टेशनों पर 100% शुद्ध पानी!
NER Gorakhpur (पूर्वोत्तर रेलवे) ने अपने लाखों यात्रियों और रेल कर्मचारियों के स्वास्थ्य को सर्वोपरि रखते हुए एक बड़ा और सघन अभियान शुरू किया है। अक्सर सफर के दौरान या रेलवे कॉलोनियों में गंदे पानी की शिकायतें मिलती रहती हैं, जिससे जलजनित बीमारियों (Waterborne Diseases) का खतरा बना रहता है।

इसी समस्या को जड़ से खत्म करने और सभी को स्वच्छ एवं सुरक्षित पेयजल (Safe Drinking Water) उपलब्ध कराने के उद्देश्य से NER Gorakhpur प्रशासन युद्धस्तर पर जल गुणवत्ता की नियमित और वैज्ञानिक जांच कर रहा है।
इस वृहद अभियान के तहत रेलवे स्टेशनों, मंडल कार्यालयों, अस्पतालों और आवासीय कॉलोनियों में स्थापित पानी की टंकियों, वाटर कूलर, टैप (नल), वाटर फिल्टर और वितरण पाइपलाइनों की चौबीसों घंटे निगरानी और डीप-क्लीनिंग (Deep Cleaning) की जा रही है। आइए विस्तार से जानते हैं कि रेलवे प्रशासन पानी की शुद्धता को लेकर क्या-क्या वैज्ञानिक उपाय कर रहा है।
NER Gorakhpur: पानी की शुद्धता जांचने के 3 वैज्ञानिक मानक
स्वच्छ जल केवल दिखने में साफ नहीं होना चाहिए, बल्कि वह रासायनिक और जैविक रूप से भी पूरी तरह शुद्ध होना चाहिए। इसी को ध्यान में रखते हुए NER Gorakhpur के स्वास्थ्य निरीक्षकों (Health Inspectors) द्वारा मुख्य रूप से तीन प्रकार के वैज्ञानिक परीक्षण (Tests) नियमित रूप से किए जा रहे हैं:
- अवशिष्ट क्लोरीन परीक्षण (Residual Chlorine Test): पानी को कीटाणुमुक्त करने के लिए उसमें एक निश्चित मात्रा में क्लोरीन मिलाई जाती है। यह टेस्ट सुनिश्चित करता है कि पानी में क्लोरीन का स्तर न तो बहुत कम हो (जिससे बैक्टीरिया न मरें) और न ही बहुत अधिक हो (जो स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो)।
- जीवाणु संवर्धन परीक्षण (Bacteriological Culture Test): यह एक अहम माइक्रोबायोलॉजिकल टेस्ट है। इसके जरिए पानी के सैंपल (नमूने) लेकर लैब में यह चेक किया जाता है कि कहीं उसमें ई-कोलाई (E. coli) या अन्य हानिकारक बीमारी फैलाने वाले बैक्टीरिया तो नहीं पनप रहे हैं।
- रासायनिक विश्लेषण (Chemical Analysis): इस प्रक्रिया में पानी के टीडीएस (TDS), पीएच (pH) लेवल और फ्लोराइड व आर्सेनिक जैसे भारी तत्वों की जांच की जाती है, ताकि पानी पीने योग्य मानकों (WHO/BIS Standards) पर खरा उतरे।
इज्जतनगर, लखनऊ और वाराणसी मंडलों में NER Gorakhpur का सघन एक्शन
पेयजल की गुणवत्ता सुनिश्चित करने का यह अभियान पूर्वोत्तर रेलवे के सभी प्रमुख मंडलों में पूरी मुस्तैदी से चलाया जा रहा है।
- इज्जतनगर मंडल का हाल: इज्जतनगर मंडल के अंतर्गत आने वाले 10 प्रमुख स्टेशनों— काठगोदाम, इज्जतनगर, फर्रुखाबाद, कासगंज, बरेली सिटी, लालकुआँ, काशीपुर, पीलीभीत, मथुरा कैंट एवं फतेहगढ़ के साथ-साथ न्यू मॉडल कॉलोनी में सघन चेकिंग की गई। इस दौरान कुल 44 ‘अवशिष्ट क्लोरीन परीक्षण’ किए गए, और राहत की बात यह रही कि सभी परीक्षण निर्धारित मानकों के बिल्कुल अनुरूप पाए गए। इसके अतिरिक्त, लैब में ‘जीवाणु संवर्धन परीक्षण’ के लिए 06 विभिन्न जल नमूने (Water Samples) भी सुरक्षित लिए गए हैं।
- लखनऊ और वाराणसी मंडलों में जांच: इसी तर्ज पर लखनऊ मंडल के विभिन्न ए-वन और छोटे स्टेशनों तथा रेलवे आवासीय कॉलोनियों में भी पेयजल के क्लोरीन और जीवाणु संवर्धन परीक्षण किए गए। वहीं, वाराणसी मंडल में स्वास्थ्य निरीक्षकों ने स्टेशनों, रेलवे कॉलोनियों, कोचिंग डिपो, रेलवे चिकित्सालयों, स्वास्थ्य केंद्रों, रनिंग रूम (Running Room), क्रू लॉबी और मंडल कार्यालयों में स्थापित वाटर कूलर, फिल्टर, पाइप लाइनों एवं पंपिंग प्रणाली की बारीकी से जांच की।
शुद्ध पेयजल रेलवे की सर्वोच्च प्राथमिकता
यात्री अक्सर इंटरनेट पर रेलवे की ‘रेल नीर’ (Rail Neer) और स्टेशनों पर मिलने वाले मुफ्त पेयजल की गुणवत्ता के बारे में सर्च करते हैं।
NER Gorakhpur प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि रेल यात्रियों और अपने हजारों कर्मचारियों को 100% शुद्ध और सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराना रेलवे की सर्वोच्च प्राथमिकताओं (Top Priorities) में से एक है। गर्मी या बरसात का मौसम हो, जल प्रदूषण का खतरा हमेशा बना रहता है।
इसीलिए, रेलवे स्टेशनों, आवासीय कॉलोनियों एवं कार्यालयों में पेयजल स्थलों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिये यह जांच अभियान कोई एक दिन की प्रक्रिया नहीं है, बल्कि यह एक मिशन के रूप में पूरे वर्ष निरंतर जारी रहेगा। यदि यात्रियों को स्टेशन पर गंदे पानी की शिकायत मिलती है, तो वे तुरंत रेल मदद (RailMadad) ऐप या टोल-फ्री नंबर 139 पर अपनी शिकायत दर्ज करा सकते हैं।

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Navneet Mishra is a seasoned journalist currently associated with Nirbhik India and its digital portal, nirbhikindia.in. With over six years of experience across print and digital platforms, Navneet specializes in politics, sports, economics, and geopolitics.
A Master’s graduate in Mass Communication from Deen Dayal Upadhyay Gorakhpur University, he is also a dedicated media scholar. His academic research focuses on “the pivotal role of Gorakhpur’s Hindi newspapers during the Indian freedom struggle against the British Crown”. Before joining Nirbhik India, Navneet spent five years at Adarsh Jeevan and gained valuable field experience at Amar Ujala Gorakhpur as training reporter only for 5 days.
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नवनीत मिश्रा वर्तमान में ‘निर्भीक इंडिया’ मीडिया समूह से जुड़े हैं। उन्होंने दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन में मास्टर्स किया है। पत्रकारिता के अपने 6 वर्षों के सफर में उन्होंने प्रिंट और डिजिटल दोनों डेस्क पर काम किया है। उनके शोध का विषय ब्रिटिश शासन के खिलाफ गोरखपुर के अखबारों का योगदान रहा है, जो उनकी ऐतिहासिक समझ को दर्शाता है। वे राजनीति, अर्थव्यवस्था और अंतरराष्ट्रीय मामलों (Geopolitics) पर निरंतर लिखते रहे हैं। ‘आदर्श जीवन’ दैनिक में 5 साल का कार्यकाल और ‘अमर उजाला’ गोरखपुर में ट्रेनिंग रिपोर्टिंग के तौर पर मात्र 5 दिन काम क्या है उनकी लेखनी को और भी निखारता है।

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