पंचनामा

THE World University Rankings 2027 के खोखले दावों का पंचनामा

यह प्रेस विज्ञप्तियां दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय (DDU) और मदन मोहन मालवीय प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (MMMUT) प्रशासन द्वारा जारी की गई हैं, जिनकी ‘निर्भीक इंडिया’ (Nirbhik India) के लिए सरकारी विज्ञप्ति समीक्षक नवनीत मिश्रा (Navneet Mishra) द्वारा गहन शोध, समीक्षा और ‘पंचनामा’ किया जा रहा है।

THE World University Rankings 2027 : पहला चरण: कागज़ी दावे बनाम ज़मीनी हकीकत (The Official Claims)
THE World University Rankings 2027 के खोखले दावों का पंचनामा

शिक्षा के बाज़ार में जब ‘रैंकिंग’ (Ranking) का जश्न मनाया जाता है, तो अक्सर ज़मीनी हकीकत की सड़ांध को रंग-बिरंगे विज्ञापनों और प्रेस रिलीज़ के नीचे दबा दिया जाता है। हाल ही में गोरखपुर के दो सबसे बड़े शैक्षणिक संस्थानों दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय (DDU Gorakhpur) और मदन मोहन मालवीय प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (MMMUT Gorakhpur) ने ढोल-नगाड़ों के साथ यह घोषणा की है कि उन्हें टाइम्स हायर एजुकेशन वर्ल्ड यूनिवर्सिटी रैंकिंग 2027 (THE World University Rankings 2027) में वैश्विक स्थान प्राप्त हुआ है।

प्रशासनिक दावों के अनुसार, एमएमएमयूटी (MMMUT) ने 1201–1400 रैंक बैंड में जगह बनाई है, और डीडीयू (DDU) ने 2001+ बैंड में पहली बार प्रवेश किया है। कागज़ों पर यह एक “ऐतिहासिक और गौरवशाली” उपलब्धि प्रतीत होती है। लेकिन जनसंचार (Mass Communication) और खोजी पत्रकारिता के नियमों के तहत जब हम इन दावों का ‘ऑपरेशन’ (पंचनामा) करते हैं, तो एक बेहद खौफनाक और शर्मनाक तस्वीर सामने आती है।

जिस डीडीयू (DDU Gorakhpur) में छात्रों को ‘स्क्रैप ऑयल’ (कचरा तेल) खिलाया जा रहा हो, और जिस एमएमएमयूटी (MMMUT Gorakhpur) में लाखों की घूस लेकर फर्जी बीटेक (B.Tech) एडमिशन हो रहे हों, उसे ‘ग्लोबल रैंकिंग’ कैसे मिल सकती है?

आइए, इस टाइम्स हायर एजुकेशन वर्ल्ड यूनिवर्सिटी रैंकिंग 2027 (THE World University Rankings 2027) का ‘सफेद झूठ’ और इन विश्वविद्यालयों के घोटालों का पारदर्शी विश्लेषण करते हैं, ताकि एक आम नागरिक और छात्र इस ‘रैंकिंग गेम’ के असली सच को समझ सके।

THE World University Rankings 2027 : पहला चरण: कागज़ी दावे बनाम ज़मीनी हकीकत (The Official Claims)

प्रेस रिलीज़ के अनुसार, मदन मोहन मालवीय प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (MMMUT Gorakhpur) के कुलपति प्रो. अनुपमा कौशिक शर्मा ने बताया कि उनका टीचिंग स्कोर 34.5 और रिसर्च एनवायरनमेंट स्कोर 12.3 हो गया है। वहीं, दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय (DDU Gorakhpur) के कुलपति प्रो. केपी सिंह ने 2001+ बैंड में शामिल होने को “शिक्षण, शोध और नवाचार के क्षेत्र में किए गए निरंतर प्रयासों” का नतीजा बताया है।

लेकिन क्या सच में इन विश्वविद्यालयों में ‘नवाचार’ (Innovation) और ‘शोध’ (Research) हो रहा है? आइए, इनके हालिया ‘नवाचारों’ का ग्राउंड रिपोर्ट कार्ड देखते हैं।

दूसरा चरण: THE World University Rankings 2027 और एमएमएमयूटी का सच (MMMUT Gorakhpur Ground Reality)

एमएमएमयूटी (MMMUT) प्रशासन टाइम्स हायर एजुकेशन वर्ल्ड यूनिवर्सिटी रैंकिंग 2027 (THE World University Rankings 2027) में 1201–1400 रैंक पाने का जश्न मना रहा है, लेकिन पिछले कुछ महीनों में इस संस्थान ने जो ‘प्रशासनिक नवाचार’ किए हैं, वे शर्मसार करने वाले हैं:

  • बीटेक फर्जी प्रवेश घोटाला (BTech Fake Admission Scam): यह संस्थान का सबसे बड़ा घोटाला है। 2023 में खुलासा हुआ कि 2020 से 2022 के बैचों में 40 छात्रों ने फर्जी दस्तावेजों के सहारे बीटेक में एडमिशन ले लिया था। जुलाई 2025 में पता चला कि क्लर्क (लिपिक) रवि मोहन श्रीवास्तव ने प्रति छात्र ₹2.70 लाख की रिश्वत लेकर यह फर्जीवाड़ा किया था। जिस विश्वविद्यालय का एडमिनिस्ट्रेशन (Administration) बैकडोर से फर्जी इंजीनियर बना रहा हो, उसका ‘ग्लोबल’ ढिंढोरा पीटना हास्यास्पद है।
  • गर्ल्स हॉस्टल में पुरुष प्रोफेसर का प्रवेश (Privacy Breach): अप्रैल 2026 में विश्वविद्यालय के चीफ वार्डन (पुरुष प्रोफेसर) सुरक्षाकर्मियों के साथ अचानक गर्ल्स हॉस्टल के कमरों के पास पहुंच गए। छात्राओं को जबरन एक इवेंट में शामिल करने के लिए दरवाजे पीटे गए। छात्राओं की निजता (Privacy) के इस उल्लंघन पर 10 घंटे तक चक्काजाम हुआ और डीएम-एसएसपी को दखल देना पड़ा। क्या THE World University Rankings 2027 में छात्राओं की सुरक्षा का कोई पैमाना है?
  • पेपर लीक का डर और पुरानी प्रणाली: एमएमएमयूटी (MMMUT Gorakhpur) आज भी अपनी पुरानी और असुरक्षित परीक्षा प्रणाली से जूझ रहा है।

तीसरा चरण: THE World University Rankings 2027 और डीडीयू गोरखपुर का महा-घोटाला (DDU Gorakhpur Controversies)

टाइम्स हायर एजुकेशन वर्ल्ड यूनिवर्सिटी रैंकिंग 2027 (THE World University Rankings 2027) में 2001+ बैंड पाने वाले डीडीयू (DDU Gorakhpur) का हाल तो और भी बुरा है। यहाँ शिक्षा कम और पुलिस के डंडे ज्यादा चलते हैं:

  • असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती घोटाला (Assistant Professor Scam): 2021-2022 में 44 असिस्टेंट प्रोफेसरों की भर्ती में भारी गड़बड़ी हुई। नियमों को ताक पर रखकर चहेतों को नौकरी दी गई, जिस पर हाईकोर्ट और राजभवन को दखल देना पड़ा।
  • रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तारी: सितंबर 2025 में एंटी-करप्शन टीम ने डीडीयू के प्रशासनिक भवन से अधीक्षक बृजनाथ सिंह को ₹50,000 की रिश्वत लेते गिरफ्तार किया। यह ‘शोध’ नहीं, बल्कि ‘भ्रष्टाचार का नवाचार’ है।
  • छात्रों पर पुलिस की गुंडागर्दी: सितंबर 2026 में अपनी मांगों को लेकर भूख हड़ताल कर रहे छात्रों को हटाने के लिए पुलिस बुलाई गई। चौकी इंचार्ज अविरल मिश्रा का छात्रों को घूंसा तानकर धमकाते हुए वीडियो वायरल हुआ: “इतनी फोर्स मंगाऊंगा कि ठंडा कर दूंगा, जानते नहीं हो ये गोरखपुर पुलिस है।” क्या THE World University Rankings 2027 छात्रों पर होने वाले इस पुलिसिया अत्याचार को मापती है?
  • रिजल्ट में देरी और फर्जी पीएचडी (RATE) प्रवेश: प्राइवेट एजेंसी को मार्कशीट का ठेका देने से रिजल्ट महीनों लेट हुए। RATE-2023 में NET-JRF पास छात्रों को जानबूझकर फेल करने और फर्जी डिग्री बांटने की एफआईआर तक दर्ज हुई।
  • असिस्टेंट प्रॉक्टर का गाली-गलौज: अक्टूबर 2026 में असिस्टेंट प्रॉक्टर डॉ. वेद प्रकाश राय पर अन्य प्रोफेसरों को अपशब्द कहने का आरोप लगा, जिसके बाद छात्रों ने दलित महापंचायत बुलाई।

चौथा चरण: कुलाधिपति (राज्यपाल) का ‘हंटर’ और ‘स्क्रैप ऑयल’ की सच्चाई

इन दोनों विश्वविद्यालयों की असली औकात तब सामने आई जब अगस्त 2026 में उत्तर प्रदेश की राज्यपाल और कुलाधिपति (Chancellor) आनंदीबेन पटेल ने यहाँ का औचक निरीक्षण किया। उनका बयान आज भी इन ‘ग्लोबल रैंकिंग’ के मुंह पर एक तमाचा है:

“यह तो गोरखपुर है, जहां स्वयं हमारे मुख्यमंत्री (योगी आदित्यनाथ) विराजमान हैं, और वहां ही ऐसी कमियां रहेंगी तो क्या होगा?”

डीडीयू (DDU Gorakhpur) का कच्चा चिट्ठा: राज्यपाल ने पाया कि ब्वॉयज हॉस्टल में मेस ही नहीं है। लड़के बाहर से टिफिन मंगा रहे हैं, जिसमें खाने की आड़ में ड्रग्स और नशीले पदार्थ आ रहे हैं। सबसे खौफनाक खुलासा रसोई में हुआ। एक गृहिणी के रूप में राज्यपाल ने तेल देखकर कहा: “यह खाना पकाने वाला तेल है या स्क्रैप (वेस्ट) ऑयल?” उन्होंने फूड सेफ्टी टीम से सैंपल भरवाए।

एमएमएमयूटी (MMMUT Gorakhpur) की दुर्दशा: राज्यपाल ने सार्वजनिक मंच से एमएमएमयूटी को धोते हुए कहा कि हॉस्टल में चारों तरफ गंदगी है, कुत्ते घूम रहे हैं। जहाँ शौचालय है, ठीक उसके सामने पीने का पानी रखा है, जो सीधे स्वास्थ्य से खिलवाड़ है। दो ब्लॉकों के बीच तीन साल से गंदा पानी जमा है।

पांचवां चरण: पंचनामा कैसे मिलती है टाइम्स हायर एजुकेशन रैंकिंग? (The Ranking Illusion)

अब एक आम नागरिक या छात्र के मन में यह सवाल उठना लाज़िमी है कि जब यहाँ का प्रशासन इतना भ्रष्ट है, हॉस्टल में कुत्ते घूम रहे हैं, बच्चों को ‘कचरा तेल’ (Scrap Oil) खिलाया जा रहा है, और एडमिशन घूस देकर हो रहे हैं, तो फिर इन्हें टाइम्स हायर एजुकेशन वर्ल्ड यूनिवर्सिटी रैंकिंग 2027 (THE World University Rankings 2027) में स्थान कैसे मिल गया?

इस ‘सफेद झूठ’ को समझने के लिए हमें इस रैंकिंग की कार्यप्रणाली (Methodology) का पंचनामा करना होगा।

आम जनता के लिए सरल उदाहरण (The Restaurant Example):

मान लीजिए आपके शहर में एक रेस्टोरेंट है। उस रेस्टोरेंट में खाना सड़ा हुआ मिलता है, वेटर ग्राहकों को गालियां देते हैं, और रसोई में कॉकरोच घूमते हैं। अब एक ‘ग्लोबल मैगज़ीन’ उस रेस्टोरेंट को दुनिया के टॉप रेस्टोरेंट का अवार्ड दे देती है। आप हैरान होंगे कि ऐसा कैसे हुआ? जवाब है: मैगज़ीन वालों ने उन ग्राहकों से कभी पूछा ही नहीं जो वहां खाना खाते हैं! उन्होंने सिर्फ रेस्टोरेंट के मालिक से आंकड़े मांगे और दूर बैठे कुछ दूसरे शेफ (Chefs) से राय ले ली।

ठीक यही खेल THE World University Rankings 2027 में होता है:

  • छात्रों से कोई बात नहीं (No Student Feedback): इस रैंकिंग में पढ़ने वाले छात्रों या आम कर्मचारियों से कोई प्रश्नावली (Questionnaire) नहीं भरवाई जाती। उन्हें पता ही नहीं होता कि बच्चों को कचरा तेल खिलाया जा रहा है या पुलिस से पिटवाया जा रहा है।
  • अकादमिक प्रतिष्ठा सर्वेक्षण (Academic Reputation Survey – 33% वेटेज): THE की टीम दुनिया भर के कुछ स्थापित शिक्षाविदों (Academics) को ईमेल भेजकर पूछती है कि “आपके हिसाब से कौन सी यूनिवर्सिटी अच्छी है?” ज़ाहिर है, नेटवर्किंग और पीआर (PR) के दम पर यहाँ वोटिंग मैनेज की जाती है।
  • खुद के भेजे गए आंकड़े: विश्वविद्यालय प्रशासन खुद THE को अपने आंकड़े (डेटा) भेजता है। जैसे- हमारे यहाँ विदेशी छात्र कितने हैं, पीएचडी वाले कितने हैं (भले ही वे फर्जी प्रवेश घोटाले से आए हों)। THE टीम आकर ज़मीन पर यह चेक नहीं करती कि जो कागज़ पर भेजा गया है, वह सच है या झूठ।

यही कारण है कि डीडीयू (DDU Gorakhpur) और एमएमएमयूटी (MMMUT Gorakhpur) जैसे संस्थान, जो ज़मीनी स्तर पर अपनी प्रशासनिक विफलताओं, भ्रष्टाचार और बुनियादी सुविधाओं की कमी से जूझ रहे हैं, वे विदेशी रैंकिंग एजेंसियों के ‘डेटा सबमिशन’ के खेल में खुद को ग्लोबल साबित कर लेते हैं।

लोग यह भी पूछते हैं (People Also Ask – PAA)

प्रश्न 1: टाइम्स हायर एजुकेशन वर्ल्ड यूनिवर्सिटी रैंकिंग 2027 (THE World University Rankings 2027) क्या है?

विश्लेषण: यह एक ब्रिटिश पत्रिका द्वारा जारी की जाने वाली वार्षिक वैश्विक विश्वविद्यालय रैंकिंग है। इसमें मुख्य रूप से शिक्षण, शोध, उद्योग आय और अंतर्राष्ट्रीय दृष्टिकोण के आधार पर विश्वविद्यालयों को आंका जाता है। हालांकि, डीडीयू और एमएमएमयूटी के मामले में यह रैंकिंग ज़मीनी हकीकत (जैसे छात्र सुविधाएं, भ्रष्टाचार मुक्त प्रशासन) को नहीं दर्शाती क्योंकि इसमें छात्रों का सीधा फीडबैक शामिल नहीं होता।

प्रश्न 2: DDU Gorakhpur और MMMUT Gorakhpur विवादों में क्यों हैं?

विश्लेषण: डीडीयू (DDU) मुख्य रूप से असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती घोटाले, परीक्षा पैटर्न में मनमाने बदलाव, छात्रों पर पुलिसिया कार्रवाई और हॉस्टल में ‘स्क्रैप ऑयल’ के इस्तेमाल के कारण विवादों में है। वहीं, एमएमएमयूटी (MMMUT) बीटेक के फर्जी एडमिशन घोटाले, रिश्वतखोरी और गर्ल्स हॉस्टल में पुरुष वार्डन के जबरन प्रवेश को लेकर सुर्खियों में रहा है।

प्रश्न 3: क्या ग्लोबल रैंकिंग का मतलब यह है कि विश्वविद्यालय की पढ़ाई अच्छी हो गई है?

विश्लेषण: बिल्कुल नहीं। विदेशी रैंकिंग एजेंसियां मुख्य रूप से शोध प्रकाशनों (Research Papers) और विदेशी फैकल्टी के आंकड़ों पर काम करती हैं। वे कैंपस के अंदर होने वाले भ्रष्टाचार, रिश्वतखोरी, रिजल्ट में देरी या पुलिस के लाठीचार्ज को अपने मापदंडों में नहीं रखतीं। इसलिए रैंकिंग अच्छी होने का मतलब यह कतई नहीं है कि आम छात्र के लिए वहां का माहौल सुरक्षित या शैक्षणिक रूप से उत्कृष्ट है।

निष्कर्ष: ‘ग्लोबल’ सर्टिफिकेट से ‘लोकल’ सड़ांध नहीं छिपती

दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय और मदन मोहन मालवीय प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय द्वारा जारी की गई यह प्रेस रिलीज़ छात्रों और अभिभावकों की आंखों में धूल झोंकने का एक प्रशासनिक प्रयास है। जब उत्तर प्रदेश की राज्यपाल और कुलाधिपति स्वयं कैमरे के सामने इन विश्वविद्यालयों के प्रशासन को ‘नाकारा’ बता चुकी हों, तो लंदन में बैठकर बनाई गई टाइम्स हायर एजुकेशन वर्ल्ड यूनिवर्सिटी रैंकिंग 2027 (THE World University Rankings 2027) कोई मायने नहीं रखती।

एक विश्वविद्यालय की असली ‘रैंकिंग’ उसके छात्रों के संतुष्टि स्तर, सुरक्षित परिसर, निष्पक्ष और पारदर्शी परीक्षा प्रणाली, और भ्रष्टाचार मुक्त प्रशासन से तय होती है और इन सभी पैमानों पर डीडीयू (DDU Gorakhpur) और एमएमएमयूटी (MMMUT Gorakhpur) बुरी तरह फेल हैं। कागज़ पर छपी विदेशी ट्रॉफियां गोरखपुर की ज़मीनी सच्चाई का दाग नहीं धो सकतीं।

सरकारी विज्ञप्ति समीक्षक - नवनीत मिश्र
पत्रकार व मीडिया शोधार्थी
जनसंचार व मीडिया अध्ययन में मास्टर
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Navneet Mishra

Navneet Mishra is a seasoned journalist currently associated with Nirbhik India and its digital portal, nirbhikindia.in. With over six years of experience across print and digital platforms, Navneet specializes in politics, sports, economics, and geopolitics.
A Master’s graduate in Mass Communication from Deen Dayal Upadhyay Gorakhpur University, he is also a dedicated media scholar. His academic research focuses on “the pivotal role of Gorakhpur’s Hindi newspapers during the Indian freedom struggle against the British Crown”. Before joining Nirbhik India, Navneet spent five years at Adarsh Jeevan and gained valuable field experience at Amar Ujala Gorakhpur as training reporter only for 5 days.
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नवनीत मिश्रा वर्तमान में ‘निर्भीक इंडिया’ मीडिया समूह से जुड़े हैं। उन्होंने दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन में मास्टर्स किया है। पत्रकारिता के अपने 6 वर्षों के सफर में उन्होंने प्रिंट और डिजिटल दोनों डेस्क पर काम किया है। उनके शोध का विषय ब्रिटिश शासन के खिलाफ गोरखपुर के अखबारों का योगदान रहा है, जो उनकी ऐतिहासिक समझ को दर्शाता है। वे राजनीति, अर्थव्यवस्था और अंतरराष्ट्रीय मामलों (Geopolitics) पर निरंतर लिखते रहे हैं। ‘आदर्श जीवन’ दैनिक में 5 साल का कार्यकाल और ‘अमर उजाला’ गोरखपुर में ट्रेनिंग रिपोर्टिंग के तौर पर मात्र 5 दिन काम क्या है उनकी लेखनी को और भी निखारता है।

Navneet Mishra

Navneet Mishra is a seasoned journalist currently associated with Nirbhik India and its digital portal, nirbhikindia.in. With over six years of experience across print and digital platforms, Navneet specializes in politics, sports, economics, and geopolitics. A Master’s graduate in Mass Communication from Deen Dayal Upadhyay Gorakhpur University, he is also a dedicated media scholar. His academic research focuses on "the pivotal role of Gorakhpur’s Hindi newspapers during the Indian freedom struggle against the British Crown". Before joining Nirbhik India, Navneet spent five years at Adarsh Jeevan and gained valuable field experience at Amar Ujala Gorakhpur as training reporter only for 5 days. ---------------------------------------------------------------------------------- नवनीत मिश्रा वर्तमान में 'निर्भीक इंडिया' मीडिया समूह से जुड़े हैं। उन्होंने दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन में मास्टर्स किया है। पत्रकारिता के अपने 6 वर्षों के सफर में उन्होंने प्रिंट और डिजिटल दोनों डेस्क पर काम किया है। उनके शोध का विषय ब्रिटिश शासन के खिलाफ गोरखपुर के अखबारों का योगदान रहा है, जो उनकी ऐतिहासिक समझ को दर्शाता है। वे राजनीति, अर्थव्यवस्था और अंतरराष्ट्रीय मामलों (Geopolitics) पर निरंतर लिखते रहे हैं। 'आदर्श जीवन' दैनिक में 5 साल का कार्यकाल और 'अमर उजाला' गोरखपुर में ट्रेनिंग रिपोर्टिंग के तौर पर मात्र 5 दिन काम क्या है उनकी लेखनी को और भी निखारता है।

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