उत्तर प्रदेश

Orthopaedic Implants वर्कशॉप का एम्स गोरखपुर में आयोजन

गोरखपुर (निर्भीक इंडिया ब्यूरो): ऑर्थोपेडिक इम्प्लांट्स (Orthopaedic Implants) और उन्नत सर्जिकल वर्कस्टेशन को लेकर अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स), गोरखपुर में एक विशेष कार्यशाला सह सतत चिकित्सा शिक्षा (CME) कार्यक्रम का सफल आयोजन किया गया।

ऑर्थोपेडिक इम्प्लांट्स (Orthopaedic Implants): एम्स गोरखपुर में ओटी कर्मियों के लिए सीएमई कार्यशाला
Orthopaedic Implants वर्कशॉप का एम्स गोरखपुर में आयोजन

एम्स गोरखपुर के अस्थिरोग विभाग (Department of Orthopaedics) द्वारा सामान्य शल्य चिकित्सा विभाग, डेप्यू सिंथेस (DePuy Synthes) तथा विश्वविख्यात एओ (AO) के शैक्षणिक सहयोग से आयोजित इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य ऑपरेशन थियेटर कर्मियों (ORP) को आधुनिक शल्य तकनीकों और ऑर्थोपेडिक इम्प्लांट्स के कुशल संचालन में पारंगत बनाना रहा।

निर्भीक इंडिया (Nirbhik India) की विशेष रिपोर्ट के अनुसार, संस्थान के सेमिनार हॉल (ऑडिटोरियम) में प्रातः 8:00 बजे से दोपहर 2:00 बजे तक चले इस छह घंटे के सघन प्रशिक्षण में मुख्य ओटी और टीईएम ओटी कॉम्प्लेक्स में तैनात कुल 85 नर्सिंग अधिकारियों और तकनीशियनों ने भाग लिया, जहां ऑर्थोपेडिक इम्प्लांट्स की असेंबली और फिक्सेशन पर विशेष बल दिया गया।

ऑर्थोपेडिक इम्प्लांट्स (Orthopaedic Implants): एम्स गोरखपुर में ओटी कर्मियों के लिए सीएमई कार्यशाला

संस्थान में आयोजित इस उच्चस्तरीय कार्यशाला को एम्स गोरखपुर की कार्यकारी निदेशक एवं सीईओ मेजर जनरल (डॉ.) विभा दत्ता, एसएम (सेवानिवृत्त) का मुख्य संरक्षण प्राप्त रहा।

वहीं डीन (अकादमिक) प्रो. (डॉ.) महिमा मित्तल ने सह-संरक्षक की भूमिका निभाई। कार्यक्रम के आयोजन अध्यक्ष चिकित्सा अधीक्षक एवं अस्थि रोग विभागाध्यक्ष प्रो. (डॉ.) अजय भारती रहे।

एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. राजेंद्र कुमार पिपल ने आयोजन सचिव तथा असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. विवेक कुमार ने संयुक्त सचिव के रूप में कार्यशाला का कुशल समन्वय किया। डॉ. रजनंद कुमार के स्वागत भाषण के साथ कार्यक्रम की शुरुआत हुई, जिसमें ऑर्थोपेडिक इम्प्लांट्स के महत्व और आधुनिक सर्जरी में उनकी भूमिका को रेखांकित किया गया।

ऑर्थोपेडिक इम्प्लांट्स (Orthopaedic Implants) में फ्रैक्चर फिक्सेशन और नेलिंग के आधुनिक सिद्धांत

कार्यशाला का मुख्य फोकस फ्रैक्चर फिक्सेशन (Fracture Fixation Principles) के बुनियादी और उन्नत सिद्धांतों को ऑपरेशन रूम कर्मियों तक पहुंचाना था, ताकि जटिल हड्डी फ्रैक्चर सर्जरी के दौरान इम्प्लांट्स का सटीक चयन हो सके।

तकनीकी सत्रों के दौरान डेप्यू सिंथेस टीम ने विश्व प्रसिद्ध एओ (AO Foundation) की विचारधारा और अस्थि रोग प्रबंधन में निरंतर सीखने की परंपरा से सभी को परिचित कराया।

विशेषज्ञ चिकित्सकों द्वारा प्रस्तुत तकनीकी सत्रों की रूपरेखा इस प्रकार रही:

  • फ्रैक्चर फिक्सेशन के सिद्धांत: डॉ. नितीश कुमार ने हड्डियों के विभिन्न प्रकार के फ्रैक्चर, उनकी स्टेबिलिटी और आधुनिक फिक्सेशन तकनीकों की बारीकियां साझा कीं, जो ऑर्थोपेडिक इम्प्लांट्स के सफल नियोजन का आधार हैं।
  • इंट्रामेडुलरी नेलिंग के सिद्धांत: डॉ. राजेंद्र कुमार पिपल ने हड्डी के भीतर नेल (रॉड) डालकर किए जाने वाले उन्नत फिक्सेशन के वैज्ञानिक नियम समझाए, ताकि ऑर्थोपेडिक इम्प्लांट्स का इस्तेमाल सुरक्षित और प्रभावी रहे।
  • प्लेट्स – स्वरूप एवं कार्यप्रणाली: डॉ. विवेक कुमार ने विभिन्न प्रकार की ऑर्थोपेडिक लॉकिंग एवं नॉन-लॉकिंग प्लेट्स के डिजाइन और उनके बायोमैकेनिकल कार्यों पर विस्तृत व्याख्यान दिया।
  • ओटी मशीनों और तकनीकों में प्रगति: डॉ. मनीष कुमार ने ऑपरेशन थियेटर में उपयोग होने वाली आधुनिक सी-आर्म, पावर टूल्स और उन्नत मशीनों के सही उपयोग के बारे में जानकारी दी।

ऑर्थोपेडिक इम्प्लांट्स (Orthopaedic Implants): प्लेट्स, स्क्रू और टीएफएनए-आरएफएनए का वीडियो प्रदर्शन

व्यावहारिक दक्षता बढ़ाने के लिए कार्यशाला में आधुनिक नेलिंग प्रणालियों के लाइव वीडियो प्रदर्शन और हैंड्स-ऑन सत्र आयोजित किए गए।

विशेष रूप से टीएफएनए (TFNA – ट्रोकैन्टेरिक फिक्सेशन नेल एडवांस्ड), आरएफएनए (RFNA – रेट्रोग्रेड फेमोरल नेल एडवांस्ड) और टीएनए (TNA – टिबियल नेल एडवांस्ड) प्रणालियों के संचालन का गहराई से विश्लेषण किया गया।

प्रतिभागियों को नए ऑर्थोपेडिक इम्प्लांट्स (Orthopaedic Implants) के डिजाइन, स्क्रू लॉकिंग मैकेनिज्म और सर्जिकल टूल्स की हैंडलिंग का सीधा व्यावहारिक अभ्यास कराया गया, जिससे ओटी में सर्जरी के दौरान लगने वाले समय को कम किया जा सके।

ऑर्थोपेडिक इम्प्लांट्स (Orthopaedic Implants) के उपयोग में संक्रमण नियंत्रण और ओटी शिष्टाचार

किसी भी आर्थोपेडिक सर्जरी में इम्प्लांट लगाने के बाद सबसे बड़ा खतरा संक्रमण (Infection) का होता है। इसी को ध्यान में रखते हुए ऑपरेशन थियेटर तकनीक (Operation Theater Techniques) पर विशेष सत्र आयोजित किया गया।

विभागाध्यक्ष एवं चिकित्सा अधीक्षक प्रो. (डॉ.) अजय भारती ने ऑपरेशन थियेटर शिष्टाचार, स्टरलाइजेशन प्रोटोकॉल और संक्रमण की शत-प्रतिशत रोकथाम पर विस्तार से चर्चा की।

उन्होंने स्पष्ट किया कि ओटी कर्मियों की थोड़ी सी लापरवाही भी मरीज के लिए घातक हो सकती है, इसलिए हर उपकरण को पूरी तरह जीवाणुरहित रखना और सर्जिकल अनुशासन का पालन करना अनिवार्य है, जिससे ऑर्थोपेडिक इम्प्लांट्स के बाद मरीज तेजी से स्वस्थ हो सके।

ऑर्थोपेडिक इम्प्लांट्स (Orthopaedic Implants): ‘मैंने क्या सीखा?’ सत्र से खत्म हुईं तकनीकी जिज्ञासाएं

कार्यशाला का समापन सभी संकाय सदस्यों और 85 प्रतिभागियों के साथ एक अत्यंत संवादात्मक सत्र के साथ हुआ, जिसका शीर्षक “मैंने क्या सीखा?” (What Did I Learn?) रखा गया था।

इस सत्र में नर्सिंग अधिकारियों और ओटी तकनीशियनों ने दिन भर के प्रशिक्षण से जुड़े अपने अनुभव साझा किए और ओपन फोरम में वरिष्ठ सर्जनों से सीधे सवाल पूछे।

विशेषज्ञों ने ओटी टेबल पर टूल्स की त्वरित पहचान, सही क्रम में उपकरणों की आपूर्ति और आपात स्थिति में इम्प्लांट असेंबली से जुड़ी सभी शंकाओं का समाधान किया, ताकि ऑर्थोपेडिक इम्प्लांट्स से जुड़ी गलतियों की गुंजाइश शून्य हो जाए।

एम्स गोरखपुर ऑर्थोपेडिक कार्यशाला सारांश चार्ट

चिकित्सा कर्मियों और पाठकों की त्वरित जानकारी के लिए इस सीएमई कार्यशाला का संपूर्ण विवरण नीचे तालिका में दिया गया है:

विवरणप्रमुख जानकारी
आयोजक संस्थानएम्स गोरखपुर (AIIMS Gorakhpur)
आयोजक विभागअस्थिरोग विभाग एवं सामान्य शल्य चिकित्सा विभाग
शैक्षणिक व तकनीकी सहयोगीडेप्यू सिंथेस (DePuy Synthes) एवं एओ (AO)
मुख्य विषयऑर्थोपेडिक इम्प्लांट्स एवं सर्जिकल वर्कस्टेशन
संरक्षक नेतृत्वमेजर जनरल (डॉ.) विभा दत्ता (कार्यकारी निदेशक एवं सीईओ)
आयोजन अध्यक्षप्रो. (डॉ.) अजय भारती (चिकित्सा अधीक्षक एवं विभागाध्यक्ष)
आयोजन सचिव व संयुक्त सचिवडॉ. राजेंद्र कुमार पिपल एवं डॉ. विवेक कुमार
कुल प्रतिभागी85 सीनियर नर्सिंग ऑफिसर्स, नर्सिंग ऑफिसर्स व ओटी तकनीशियन
प्रमुख नेलिंग प्रणालियांटीएफएनए (TFNA), आरएफएनए (RFNA) एवं टीएनए (TNA) सिस्टम
ऑर्थोपेडिक सर्जरी और इम्प्लांट्स से जुड़े अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (People Also Ask)

प्र. 1: एम्स गोरखपुर में ऑर्थोपेडिक इम्प्लांट्स कार्यशाला किसके लिए आयोजित की गई थी?

उत्तर: यह कार्यशाला ऑपरेशन रूम कर्मियों (ORP) यानी मुख्य ओटी और टीईएम ओटी में तैनात वरिष्ठ नर्सिंग अधिकारियों, नर्सिंग स्टाफ और ओटी तकनीशियनों के कौशल संवर्धन के लिए आयोजित की गई थी।

प्र. 2: सर्जरी के दौरान इंट्रामेडुलरी नेलिंग (Intramedullary Nailing) क्या होती है?

उत्तर: यह लंबी हड्डियों (जैसे जांघ की फीमर या पैर की टिबिया) के टूटने पर हड्डी के खोखले केंद्र (कैनाल) के भीतर टाइटेनियम या स्टील की रॉड डालकर फ्रैक्चर को स्थिर करने की आधुनिक सर्जिकल प्रक्रिया है।

प्र. 3: ऑर्थोपेडिक सर्जरी में टीएफएनए (TFNA) और आरएफएनए (RFNA) क्या हैं?

उत्तर: ये उन्नत नेलिंग सिस्टम हैं, जिनका उपयोग कूल्हे और जांघ की हड्डी के जटिल फ्रैक्चर को न्यूनतम चीरे और अत्यधिक मजबूती के साथ फिक्स करने के लिए किया जाता है।

प्र. 4: आर्थोपेडिक ऑपरेशन थियेटर में संक्रमण नियंत्रण क्यों सबसे महत्वपूर्ण है?

उत्तर: क्योंकि ऑर्थोपेडिक सर्जरी में शरीर के भीतर स्थायी विदेशी तत्व (इम्प्लांट्स और प्लेट्स) लगाए जाते हैं। यदि वहां संक्रमण हो जाए तो इम्प्लांट निकालना पड़ सकता है, इसलिए सख्त स्टरलाइजेशन जीवनरक्षक होता है।

ऑर्थोपेडिक इम्प्लांट्स (Orthopaedic Implants) और सर्जिकल वर्कस्टेशन पर आयोजित यह कार्यशाला एम्स गोरखपुर की रोगी सुरक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता को नए मुकाम पर ले जाएगी। निर्भीक इंडिया (Nirbhik India) चिकित्सा जगत की अत्याधुनिक तकनीकों, स्वास्थ्य नवाचारों और जनस्वास्थ्य से जुड़ी प्रत्येक विश्वसनीय खबर को सबसे पहले और सबसे सटीक रूप में आप तक पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध है।

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