बलरामपुरउत्तर प्रदेश

युवाओं ने Seva Sankalp Abhiyan में दिखाया दम, वीसी ने दिया बड़ा मंत्र!

बलरामपुर: Seva Sankalp Abhiyan जो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 76वें जन्मदिन के उपलक्ष्य में मां पाटेश्वरी विश्वविद्यालय, बलरामपुर में चल रहे है उसमें अब एक वृहद वैचारिक और आध्यात्मिक आंदोलन का रूप ले लिया है। शुक्रवार को इस महाअभियान के तहत परिसर में एक साथ हुए दो बड़े आयोजनों ने छात्रों और शिक्षकों में एक नई ऊर्जा का संचार कर दिया है।

विपश्यना और ब्रह्मकुमारीज सेंटर ने Seva Sankalp Abhiyan में सिखाए गुरविपश्यना और ब्रह्मकुमारीज सेंटर ने Seva Sankalp Abhiyan में सिखाए गुर

एक ओर जहां युवाओं ने योग और ध्यान के जरिए अपनी मानसिक शक्ति को जागृत किया, वहीं दूसरी ओर ‘विकसित भारत’ के निर्माण को लेकर अपनी बौद्धिक क्षमता का भी शानदार प्रदर्शन किया। आइए जानते हैं कि इस बहुचर्चित आयोजन में ऐसा क्या खास हुआ जिसने पूरे विश्वविद्यालय परिसर का माहौल बदल कर रख दिया।

एडमिन ब्लॉक में [Seva Sankalp Abhiyan] का विशेष योग व ध्यान शिविर

शुक्रवार सुबह विश्वविद्यालय के एडमिन ब्लॉक स्थित केंद्रीय लाइब्रेरी (Central Library) का नजारा बिल्कुल अलग था। [Seva Sankalp Abhiyan] के अंतर्गत यहां एक वृहद योग एवं ध्यान शिविर का आयोजन किया गया था, जिसमें छात्र-छात्राओं के साथ-साथ शिक्षकों और कर्मचारियों ने भी जमीन पर बैठकर ध्यान की गहराइयों का अनुभव किया।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. रवि शंकर सिंह ने वर्तमान पीढ़ी की सबसे बड़ी समस्या ‘तनाव’ पर गंभीर चर्चा की। उन्होंने छात्रों को तनावमुक्ति का मंत्र देते हुए कहा, “स्वस्थ मन ही सकारात्मक जीवन की वास्तविक आधारशिला है।” कुलपति ने चिंता व्यक्त की कि आज के प्रतिस्पर्धात्मक दौर में पढ़ाई, करियर की चिंता और बदलती डिजिटल जीवनशैली के कारण युवाओं में तनाव और अवसाद का स्तर तेजी से बढ़ रहा है।

ऐसे मुश्किल समय में केवल योग एवं ध्यान ही वह अचूक अस्त्र है, जो मानसिक शांति, एकाग्रता और सकारात्मक सोच विकसित करने में सौ प्रतिशत सहायक है। प्रो. सिंह ने सभी उपस्थित विद्यार्थियों को संकल्प दिलाया कि वे इस विधा को अपनी दैनिक दिनचर्या का अनिवार्य हिस्सा बनाएंगे।

विपश्यना और ब्रह्मकुमारीज सेंटर ने Seva Sankalp Abhiyan में सिखाए गुर

इस ध्यान शिविर को और अधिक प्रायोगिक और प्रभावशाली बनाने के लिए बाहर से कई विशिष्ट अतिथियों और विशेषज्ञों को आमंत्रित किया गया था। श्रावस्ती के जगजीत इंटर कॉलेज के प्राचार्य और कार्यक्रम के मुख्य अतिथि राम बिहारी वाजपेई ने छात्रों को आत्मनिरीक्षण (Introspection) की कला सिखाई। उन्होंने स्पष्ट किया कि ध्यान व्यक्ति को अंदर से शांत और बाहरी चुनौतियों के प्रति मानसिक रूप से संतुलित करता है।

शिविर में विपश्यना ध्यान केंद्र, श्रावस्ती से आए प्रशिक्षकों ऋषभ भार्गव और अर्चना शर्मा ने प्रतिभागियों को सांसों पर नियंत्रण और ध्यान की विभिन्न प्राचीन विधियों का सजीव अभ्यास कराया। उनके साथ विपश्यना केंद्र के राममनोहर वर्मा और सेंटर मैनेजर प्रवीण यंदे ने भी युवाओं का उचित मार्गदर्शन किया।

वहीं, इस आयोजन में ब्रह्मकुमारीज सेंटर (बलरामपुर) की तरफ से पधारे बीके रविकर भाई ने सकारात्मक चिंतन (Positive Thinking) और आध्यात्मिक चेतना को जागृत करने के महत्व पर अपने ओजस्वी विचार रखे। उन्होंने समझाया कि ध्यान से भीतर की नकारात्मकता खत्म होती है और एक नई सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। इस सत्र में ब्रह्मकुमारीज सेंटर की बीके मधु दीदी और बीके शकुंतला दीदी ने भी उपस्थित रहकर छात्र-छात्राओं को तनावमुक्त जीवन जीने की कला सिखाई।

Seva Sankalp Abhiyan में ‘विकसित भारत 2047’ पर छात्रों ने चलाई कलम

शारीरिक और मानसिक विकास के साथ-साथ बौद्धिक विकास को गति देने के लिए शुक्रवार को ही [Seva Sankalp Abhiyan] के दूसरे चरण में एक राज्य स्तरीय निबंध प्रतियोगिता का भी सफल आयोजन किया गया। इस प्रतियोगिता का मुख्य विषय अत्यंत समसामयिक ‘डिजिटल शिक्षा और विकसित भारत 2047’ (Digital Education and Viksit Bharat 2047)— रखा गया था।

इस प्रतियोगिता में विश्वविद्यालय के विभिन्न संकायों के विद्यार्थियों ने पूरे उत्साह के साथ प्रतिभाग किया। युवा सोच ने अपनी कलम के जरिए बताया कि कैसे डिजिटल शिक्षा (ई-लर्निंग, एआई, और स्मार्ट क्लासरूम) भारत के दूर-दराज के गांवों तक पहुंच रही है। छात्रों ने अपने निबंधों में इस बात का सूक्ष्म विश्लेषण किया कि वर्ष 2047 तक भारत को एक पूर्ण विकसित राष्ट्र (Viksit Bharat) बनाने के राष्ट्रीय लक्ष्य में तकनीकी और डिजिटल शिक्षा की भूमिका कितनी निर्णायक होने वाली है।

Seva Sankalp Abhiyan से युवाओं में रचनात्मकता का विकास

विश्वविद्यालय प्रशासन ने स्पष्ट किया कि [Seva Sankalp Abhiyan] के तहत आयोजित इस निबंध प्रतियोगिता का मुख्य उद्देश्य केवल प्रतिस्पर्धा नहीं था, बल्कि विद्यार्थियों के भीतर रचनात्मक लेखन (Creative Writing), समसामयिक वैश्विक विषयों की गहरी समझ और राष्ट्र-निर्माण के प्रति उनकी जिम्मेदारी को बढ़ावा देना था।

कुलपति कार्यालय की ओर से यह घोषणा की गई है कि इस निबंध प्रतियोगिता में उत्कृष्ट और सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाले मेधावी विद्यार्थियों का चयन कर उन्हें विश्वविद्यालय की ओर से एक विशेष समारोह में आधिकारिक रूप से पुरस्कृत किया जाएगा।

निष्कर्षतः, प्रधानमंत्री के जन्मदिन के अवसर पर शुरू किए गए इस अभियान ने मां पाटेश्वरी विश्वविद्यालय के शैक्षणिक माहौल में सेवा, स्वास्थ्य और बौद्धिक जागरूकता का एक नया और अनुकरणीय अध्याय जोड़ दिया है।

nirbhik india WhatsApp channel for update and newspaper cutting
NIRBHIK-INDIA-WHATSAPP-CHANNEL (2)
निर्भीक इंडिया (NIRBHIK INDIA) एक समाचार पत्र नही अपितु 245 साल से भी लम्बे समय से चल रहे पत्रकारिता की विचारधारा है, जो हमेशा लोकतंत्र के चारो स्तम्भ को मान्यता देने एवं जनता सर्वोपरि की विचारों का प्रतिनिधित्वकत्र्ता है। आप सभी हमारे साथ जुड़े अपने तन, मन व धन से हमें ताकत दें जिससे कि हम आप (जनता) के लिए आप (जनता) के द्वारा, आप (जनता) के आदेशों पर केन्द्र से सवाल करते हुए एक पूर्ण लोकतंत्र बना सकें।
Navneet Mishra

Navneet Mishra is a seasoned journalist currently associated with Nirbhik India and its digital portal, nirbhikindia.in. With over six years of experience across print and digital platforms, Navneet specializes in politics, sports, economics, and geopolitics.
A Master’s graduate in Mass Communication from Deen Dayal Upadhyay Gorakhpur University, he is also a dedicated media scholar. His academic research focuses on “the pivotal role of Gorakhpur’s Hindi newspapers during the Indian freedom struggle against the British Crown”. Before joining Nirbhik India, Navneet spent five years at Adarsh Jeevan and gained valuable field experience at Amar Ujala Gorakhpur as training reporter only for 5 days.
———————————————————————————-
नवनीत मिश्रा वर्तमान में ‘निर्भीक इंडिया’ मीडिया समूह से जुड़े हैं। उन्होंने दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन में मास्टर्स किया है। पत्रकारिता के अपने 6 वर्षों के सफर में उन्होंने प्रिंट और डिजिटल दोनों डेस्क पर काम किया है। उनके शोध का विषय ब्रिटिश शासन के खिलाफ गोरखपुर के अखबारों का योगदान रहा है, जो उनकी ऐतिहासिक समझ को दर्शाता है। वे राजनीति, अर्थव्यवस्था और अंतरराष्ट्रीय मामलों (Geopolitics) पर निरंतर लिखते रहे हैं। ‘आदर्श जीवन’ दैनिक में 5 साल का कार्यकाल और ‘अमर उजाला’ गोरखपुर में ट्रेनिंग रिपोर्टिंग के तौर पर मात्र 5 दिन काम क्या है उनकी लेखनी को और भी निखारता है।

Navneet Mishra

Navneet Mishra is a seasoned journalist currently associated with Nirbhik India and its digital portal, nirbhikindia.in. With over six years of experience across print and digital platforms, Navneet specializes in politics, sports, economics, and geopolitics. A Master’s graduate in Mass Communication from Deen Dayal Upadhyay Gorakhpur University, he is also a dedicated media scholar. His academic research focuses on "the pivotal role of Gorakhpur’s Hindi newspapers during the Indian freedom struggle against the British Crown". Before joining Nirbhik India, Navneet spent five years at Adarsh Jeevan and gained valuable field experience at Amar Ujala Gorakhpur as training reporter only for 5 days. ---------------------------------------------------------------------------------- नवनीत मिश्रा वर्तमान में 'निर्भीक इंडिया' मीडिया समूह से जुड़े हैं। उन्होंने दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन में मास्टर्स किया है। पत्रकारिता के अपने 6 वर्षों के सफर में उन्होंने प्रिंट और डिजिटल दोनों डेस्क पर काम किया है। उनके शोध का विषय ब्रिटिश शासन के खिलाफ गोरखपुर के अखबारों का योगदान रहा है, जो उनकी ऐतिहासिक समझ को दर्शाता है। वे राजनीति, अर्थव्यवस्था और अंतरराष्ट्रीय मामलों (Geopolitics) पर निरंतर लिखते रहे हैं। 'आदर्श जीवन' दैनिक में 5 साल का कार्यकाल और 'अमर उजाला' गोरखपुर में ट्रेनिंग रिपोर्टिंग के तौर पर मात्र 5 दिन काम क्या है उनकी लेखनी को और भी निखारता है।

Leave a Reply

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.

Discover more from NIRBHIK INDIA

Subscribe now to keep reading and get access to the full archive.

Continue reading