नशामुक्त युवा (drug free youth) से बनेगा विकसित भारत
निर्भीक इंडिया (संवाददाता नवनीत मिश्रा) : उत्तर प्रदेश के गोरखपुर स्थित महायोगी गोरखनाथ विश्वविद्यालय में रविवार को राष्ट्रीय सेवा योजना (एनएसएस) और युवा कार्यक्रम विभाग के संयुक्त तत्वावधान में एक वृहद जन-जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस विशेष आयोजन का मुख्य विषय ‘नशामुक्त युवा (drug free youth) फॉर विकसित भारत’ था।

इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य युवा पीढ़ी को नशे की गंभीर लत से बचाना, उन्हें जागरूक करना और एक स्वस्थ तथा प्रगतिशील समाज के निर्माण के लिए प्रेरित करना था। कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि गोरखपुर के मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) डॉ. राजेश झा ने शिरकत की। उन्होंने उपस्थित युवाओं को नशावृत्ति के विनाशकारी दुष्प्रभावों के बारे में विस्तार से वैज्ञानिक और व्यावहारिक जानकारी प्रदान की।
नशामुक्त युवा (drug free youth) : एक झटके में नशा छोड़ने की आवश्यकता
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. राजेश झा ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि देश के उज्ज्वल और स्वस्थ भविष्य के लिए समाज में नशामुक्त युवा (drug free youth) का होना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने युवाओं का आह्वान करते हुए कहा कि नशे को एक झटके में ही ‘‘ना’’ कहना होगा।
अक्सर युवाओं में यह भारी भ्रांति होती है कि नशे की लत को धीरे-धीरे कम करके छोड़ा जा सकता है, लेकिन चिकित्सा विज्ञान और अनुभव यही बताते हैं कि जिन्हें सचमुच नशा छोड़ना होता है, उन्हें एक झटके में किसी भी प्रकार के नशे का सेवन पूर्ण रूप से बंद कर देना चाहिए।
डॉ. झा ने आगे बताया कि नशावृत्ति में बुरी संगति (Bad Company) की बहुत बड़ी और नकारात्मक भूमिका होती है। युवाओं को सबसे पहले ऐसी संगति और माहौल से तुरंत बचना चाहिए जहां नशे का बोलबाला हो। उन्होंने अपने लंबे चिकित्सीय अनुभव को साझा करते हुए कहा कि उन्होंने धूम्रपान और तंबाकू के अत्यधिक सेवन के कारण कैंसर जैसी जानलेवा बीमारी से पीड़ित मरीजों को काफी करीब से देखा है और उनकी असहनीय पीड़ा को भी गहराई से महसूस किया है।
इसलिए समाज में व्यापक स्तर पर जागरूकता का एक सकारात्मक वातावरण तैयार कर सिगरेट, मदिरा, ड्रग्स आदि प्राणघातक नशे से युवाओं को दूर रखना केवल सरकार ही नहीं, बल्कि पूरे समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है।
नशामुक्त युवा (drug free youth) कैसे बनें और नशा कैसे छोड़ें? (People Also Search For)
इंटरनेट पर लोग अक्सर यह खोजते हैं कि युवा पीढ़ी को नशे से कैसे बचाया जाए और नशामुक्त युवा (drug free youth) बनने के अचूक उपाय क्या हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों और मनोवैज्ञानिकों के अनुसार, दृढ़ इच्छाशक्ति, सही मार्गदर्शन और परिवार के सहयोग से किसी भी प्रकार का नशा छोड़ा जा सकता है। नशा अचानक छोड़ने से शरीर में कुछ अस्थायी मनोवैज्ञानिक और शारीरिक बदलाव (Withdrawal Symptoms) आ सकते हैं, लेकिन उचित चिकित्सीय सहायता से इनसे आसानी से उबरा जा सकता है। विकसित भारत का सपना तभी साकार हो सकता है जब देश की युवा शक्ति शारीरिक और मानसिक रूप से पूरी तरह स्वस्थ हो और राष्ट्र निर्माण में अपना शत-प्रतिशत योगदान दे सके।
विश्वविद्यालय का योगदान और नशामुक्त युवा (drug free youth) संकल्प
इस महत्वपूर्ण अवसर पर जिला युवा अधिकारी सीमा पांडेय ने भी अपने विचार साझा किए। उन्होंने ‘नशामुक्त युवा (drug free youth) फॉर विकसित भारत’ कार्यक्रम के दूरगामी लक्ष्यों के बारे में विस्तार से जानकारी दी। श्रीमती पांडेय ने बताया कि युवाओं के बीच जागरूकता का वातावरण तैयार करने और उन्हें इस अभियान की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए विश्वविद्यालय परिसर में आठ विभिन्न श्रेणियों की रचनात्मक प्रतियोगिताएं आयोजित कराई गई हैं। इन प्रतियोगिताओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले मेधावी विजेताओं को आगे चलकर राज्य स्तर पर प्रतिभाग करने का सुनहरा अवसर प्राप्त होगा, जिससे उनका मनोबल और भी बढ़ेगा।
कार्यक्रम की शुरुआत में महायोगी गोरखनाथ विश्वविद्यालय के राष्ट्रीय सेवा योजना के कार्यक्रम समन्वयक धनन्जय पांडेय ने सभी मंचासीन अतिथियों और आगतुंकों का औपचारिक स्वागत किया। उन्होंने पूरे कार्यक्रम की विस्तृत रूपरेखा और इसके सामाजिक महत्व के बारे में जानकारी दी। प्रतियोगिताओं के पहले उद्घाटन सत्र का समापन पूरे सम्मान के साथ वंदे मातरम् और राष्ट्र गान के गायन के साथ किया गया। इस अवसर पर जिला चिकित्सालय से डॉ. प्रशांत अस्थाना और महायोगी गोरखनाथ विश्वविद्यालय से संदीप श्रीवास्तव सहित बड़ी संख्या में युवा, शिक्षकगण और निर्णायक मंडल के सदस्य मौजूद रहे।

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Navneet Mishra is a seasoned journalist currently associated with Nirbhik India and its digital portal, nirbhikindia.in. With over six years of experience across print and digital platforms, Navneet specializes in politics, sports, economics, and geopolitics.
A Master’s graduate in Mass Communication from Deen Dayal Upadhyay Gorakhpur University, he is also a dedicated media scholar. His academic research focuses on “the pivotal role of Gorakhpur’s Hindi newspapers during the Indian freedom struggle against the British Crown”. Before joining Nirbhik India, Navneet spent five years at Adarsh Jeevan and gained valuable field experience at Amar Ujala Gorakhpur as training reporter only for 5 days.
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नवनीत मिश्रा वर्तमान में ‘निर्भीक इंडिया’ मीडिया समूह से जुड़े हैं। उन्होंने दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन में मास्टर्स किया है। पत्रकारिता के अपने 6 वर्षों के सफर में उन्होंने प्रिंट और डिजिटल दोनों डेस्क पर काम किया है। उनके शोध का विषय ब्रिटिश शासन के खिलाफ गोरखपुर के अखबारों का योगदान रहा है, जो उनकी ऐतिहासिक समझ को दर्शाता है। वे राजनीति, अर्थव्यवस्था और अंतरराष्ट्रीय मामलों (Geopolitics) पर निरंतर लिखते रहे हैं। ‘आदर्श जीवन’ दैनिक में 5 साल का कार्यकाल और ‘अमर उजाला’ गोरखपुर में ट्रेनिंग रिपोर्टिंग के तौर पर मात्र 5 दिन काम क्या है उनकी लेखनी को और भी निखारता है।

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